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जबरन ठूंसे बच्चे तो नपेंगे टेंपो वाले
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 25 Jul 2015 01:54 AM IST
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इलाहाबाद। शहर और आसपास के इलाकों मेें संचालित स्कूलों के सैकड़ों वाहनों में मानक से दोगुने, तीन गुने बच्चे बैठा लिए जाने से इन मासूमों को तो परेशानी हो ही रही है, उनके अभिभावक भी इससे खासे चिंतित हैं। वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे होने की वजह से हर पल दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। अभिभावकों की इसी दिक्कत को देखते हुए संभागीय परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार से ऐसे स्कूली वाहन संचालकों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
तमाम स्कूलों में लगे टैंपो और वैन में भी निर्धारित मानक से अधिक दोगुने बच्चे ठूंसे जा रहे हैं। स्थिति कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बच्चे तो इन वाहनों में महज किसी तरह टिके रहकर स्कूल पहुंचते हैं। स्कूली बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने और परिवहन विभाग की अनुमति लिए बगैर अनाधिकृत तरीके से संचालित वाहनों के खिलाफ संयुक्त टीम का अभियान शनिवार से शहर के नामी स्कूलों से शुरू होगा।
शुक्रवार को सड़क सुरक्षा नीति की बैठक में तय हुआ कि इस बार ऐसे वाहन संचालकों को बिल्कुल भी नहीं बख्शा जाएगा, जो स्कूली वाहनों में जबरन बच्चों को ठूंस देते हैं। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अभियान को चलाने के लिए पूरी रणनीति भी बनाई गई। आरटीओ प्रवर्तन आरके सिंह ने बताया कि इस दौरान देखा जाएगा कि स्कूली बसों में जालीदार खिड़कियां, आग लगने की स्थिति में अग्निशमन उपकरण, छोटे बच्चों को बस से उतरने के लिए ‘लो फ्लोरिंग स्टेयर’ आदि है कि नहीं।
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तमाम स्कूलों में लगे टैंपो और वैन में भी निर्धारित मानक से अधिक दोगुने बच्चे ठूंसे जा रहे हैं। स्थिति कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बच्चे तो इन वाहनों में महज किसी तरह टिके रहकर स्कूल पहुंचते हैं। स्कूली बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने और परिवहन विभाग की अनुमति लिए बगैर अनाधिकृत तरीके से संचालित वाहनों के खिलाफ संयुक्त टीम का अभियान शनिवार से शहर के नामी स्कूलों से शुरू होगा।
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शुक्रवार को सड़क सुरक्षा नीति की बैठक में तय हुआ कि इस बार ऐसे वाहन संचालकों को बिल्कुल भी नहीं बख्शा जाएगा, जो स्कूली वाहनों में जबरन बच्चों को ठूंस देते हैं। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अभियान को चलाने के लिए पूरी रणनीति भी बनाई गई। आरटीओ प्रवर्तन आरके सिंह ने बताया कि इस दौरान देखा जाएगा कि स्कूली बसों में जालीदार खिड़कियां, आग लगने की स्थिति में अग्निशमन उपकरण, छोटे बच्चों को बस से उतरने के लिए ‘लो फ्लोरिंग स्टेयर’ आदि है कि नहीं।
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