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आनंद गिरि की रिहाई के नाम पर चार करोड़ की वसूली की बात हास्यास्पद

Mon, 17 May 2021 12:34 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 17 May 2021 12:34 AM IST
सार

  • महंत हरिगिरि ने खुलकर किया अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का समर्थन
  • बोले, गुरु का अपमान करना स्वामी आनंद गिरि के लिए पड़ा भारी

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Talking about the recovery of four crores in the name of Anand Giri's release is ridiculous
prayagraj news : हरि गिरी। - फोटो : prayagraj

विस्तार

निरंजनी अखाड़े में संपत्ति विवाद की चिंगारी वर्षों पहले से सुलग रही है। अखाड़े से निष्कासित स्वामी आनंद गिरि के संपत्ति विवाद संबंधी आरोपों को लेकर जहां अखाड़ा घिरने लगा है, वहीं अब जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के समर्थन में खुलकर आ गए हैं। उनरा कहना है कि बड़े महाराज यानी महंत नरेंद्र गिरि ने सही कदम उठाया है। उन पर मठ की जमीन बेचने या रिहाई के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली करने का आरोप गलत है। और इस पर यकीन नहीं किया जा सकता। छोटे महाराज की शोहरत पा चुके आनंद गिरि ने अपने गुरु पर इस तरह का मिथ्या आरोप लगाकर बचकानी हरकत की है। उन्हें इसका पश्चाताप करना चाहिए।
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अमर उजाला से बाचचीत में महंत हरि गिरि ने कहा,गुरु-शिष्य के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। कई बार शिकायत मिलने पर स्वामी आनंद गिरि को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। आस्ट्रेलिया में विदेशी युवती के आरोप में गिरफ्तारी के बाद आनंद गिरि की रिहाई के लिए प्रयागराज में उनके नाम पर चार करोड़ रुपये इकट्ठा कर हजम किए जाने का आरोप पूरी तरह हास्यास्पद है। स्वामी आनंद गिरि ने हाल के वर्षों मेंअपना प्रभाव बना लिया था, लेकिन उनके नाम पर प्रयागराज में कोई चार करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि दे सकता है, इस पर सपने में भी विश्वास नहीं किया जा सकता। कार्रवाई के बाद आनंद गिरि चुप लगा जाते और फिर उनके पास आते तो वह बड़े महाराज से निवेदन कर माफी मगंवा सकते थे, लेकिन अब जिस तरह से उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया है, ऐसे में उसकी कोई गुंजाइश नहीं रह गई है।
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कम से कम दस वर्ष भजन करें आनंद गिरि

गुरु-शिष्य विवाद पर महंत हरि गिरि ने कहा कि स्वामी आनंद गिरि की अभी उम्र है, उन्हें इंतजार करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने जल्दबाजी दिखाकर गलत किया। अगर उनको अखाड़े से निकाल दिया गया तो क्या हुआ, वह जाकर
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भजन करते तो फिर उनके बारे में विचार किया जाता। महंत हरि गिरि ने कहा कि आनंद गिरि को कम से कम 10 वर्ष तक भजन करना चाहिए। यह परंपरा त्याग, तप और साधना की है।

परिवार से संबंध संन्यासी के लिए अपराध नहीं, 

जूना अखाड़े से जुड़े किन्नर अखाड़े ने गुरु-शिष्य के विवाद में स्वामी आनंद गिरि के साथ खड़े रहने का एलान किया है। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि अगर कोई संन्यास ग्रहण करके सनातन धर्म को मजबूत करना चाहता है, तो उसके साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए। सनातन धर्म की स्थिति वैसे भी अच्छी नहीं है। स्वामी आनंद गिरि संन्यास धारण करने के बाद निरंजनी अखाड़े  में आए थे। अगर उनका परिवार से जुड़ाव या संबंध है तो यह कोई अनैतिक नहीं है। आदि शंकराचार्य ने अपने माता -पिता की सेवा के साथ अंतिम संस्कार तक किया था।

कहा, किसी ने अगर संन्यास धारण किया है और उसकी मां बीमार है, तो संन्यास यह नहीं कहता है कि बीमार और वृद्धा मां को छोड़ दिया जाए। स्वामी आनंद गिरि युवा संन्यासी के साथ समाज को नई दिशा देने वाले और दूर दृष्टि वाले संन्यासी हैं। उनके साथ कुछ भी गलत नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, जिससे समाज और सनातन परंपरा को लेकर गलत संदेश जाए।

बड़े हनुमान मंदिर का अधिग्रहण कर चढ़ावे की जांच कराए सरकार

प्रयागराज। भाजपा काशी प्रांत के पूर्व उपाध्यक्ष दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के चढ़ावे की रकम का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। रविवार को उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर बड़े हनुमान मंदिर का भी अधिग्रहण किया जाना चाहिए। साथ ही वहां के चढ़ावे की रकम का कितना सदुपयोग और किस स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है, इसकी जांच कराई जानी चाहिए। (ब्यूरो)
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