प्रयागराज : क्रिकेट की दुनिया में फिर जलवा बिखेरेगा सायमंड्स का बल्ला
अस्सी के दशक में तकरीबन हर बड़े क्रिकेटर की पहली पसंद सायमंड्स का बल्ला था। लेकिन हालात बदले और 1997 में कंपनी ने खेल से जुड़ी सामग्री बनाना बंद कर दिया। लेकिन अब बनर्जी परिवार फिर से बल्ले बनाने का काम शुरू करने जा रहा है।
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किसी जमाने में क्रिकेट के मैदान पर धुरंधर क्रिकेटरों के बल्ले से निकलने वाले हर चौके-छक्के का कनेक्शन संगमनगरी से हुआ करता था। शहर के चौफटका इलाके में स्थापित सायमंड्स एंड कंपनी के बनाए गए बल्ले ही कई विश्व कीर्तिमान बने। 1962 में आरएन बनर्जी ने कंपनी की शुरुआत की।
अस्सी के दशक में तकरीबन हर बड़े क्रिकेटर की पहली पसंद सायमंड्स का बल्ला था। लेकिन हालात बदले और 1997 में कंपनी ने खेल से जुड़ी सामग्री बनाना बंद कर दिया। लेकिन अब बनर्जी परिवार फिर से बल्ले बनाने का काम शुरू करने जा रहा है। मशीनों की सर्विसिंग कराई जा रही है और पुराने कारीगर वापस बुलाए जा रहे हैं।
आरएन बनर्जी खुद एक दिग्गज टेनिस खिलाड़ी हुआ करते थे। उनकी कंपनी में खेल के सामान की गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जाता था। यही कारण रहा कि सायमंड्स के बल्ले ख्याति पाने लगे। बेहद कम समय में ही कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोह मनवा लिया। अस्सी के दशक के धुरंधर क्रिकेटरों के हाथों में सायमंड्स का बल्ला ही दिखाई देता था।
इनमें तब के दिगगज क्रिकेटर एलन बार्डर, रिची रिचर्डसन, स्टीव वॉ, क्लाइव लॉयड, गैरी सोबर्स, गॉर्डन ग्रीनिज, लैरी गोम्स, माक वॉ, सुनील गावस्कर, कपिल देव, कृष्णमचारी श्रीकांत, रवि शास्त्री, इमरान खान, मो. अजहरुद्दीन, रमीज राजा और मोहिंद्र अमरनाथ जैसे खिलाड़ी शामिल रहे। इन्होंने सायमंड्स के बल्ले से खेलकर कई विश्व रिकार्ड बनाए हैं। सायमंड्स के बल्ले की तारीफ धुरंधर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी कई बार सार्वजनिक मंच से कर चुके हैं।
1997 से खेल के सामान बनने बंद हो गए
बनर्जी परिवार के अमित बनर्जी के मुताबिक कंपनी में क्रिकेट बल्ला, हॉकी स्टिक, बैडमिंटन और टेनिस रैकेट भी बनते थे और कई देशों में निर्यात हुआ करता था। लेकिन 1997 के आखिर में खेल के सामान बनने बंद हो गए। अब इसे वह अपने भाई रणजीत, जयंत और देवाशीष के साथ मिलकर दोबारा शुरू करने जा रहे हैं। इस साल के अंत तक कंपनी क्रिकेट की पूरा किट तैयार कर लांच करेगी।
अमित ने बताया कि मशीनों की मरम्मत और उसकी मेंटेनेंस शुरू करा दी है, और सभी पुराने कारीगरों को वापस बुलाया जा रहा है। यह कारीगर फिलहाल मेरठ, कोलकाता व मुंबई में काम कर रहे हैं। जल्द ही सायमंड्स का बल्ला वैश्विक स्तर पर जलवा बिखेरेगा।