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संत सम्मेलन में स्वामी वासुदेवानंद के नाम पर लगी थी मुहर
Thu, 06 Feb 2020 01:49 AM IST
विनोद सिंह
राहुल शर्मा, अमर उजाला, प्रयागराज
राहुल शर्मा, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 06 Feb 2020 01:49 AM IST
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vasudevanand saraswati
- फोटो : प्रयागराज
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पिछले माह विहिप के माघ मेला शिविर में आयोजित संत सम्मेलन और उसके पूर्व विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में ही स्वामी वासुदेवानंद को राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में शामिल किए जाने की मुहर लग गई थी। संत सम्मेलन संपन्न होने के बाद विहिप ने वासुदेवानंद को ट्रस्ट में शामिल किए जाने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा था।
दरअसल प्रयागराज में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के साथ मंदिर आंदोलन में शुरू से ही स्वामी वासुदेवानंद सक्रिय रहे। प्रयागराज शुरू से ही मंदिर आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। विहिप प्रांत कार्यालय में राम मंदिर मुद्दे को गरमाने के लिए न जाने कितनी ही बैठके हुई। अशोक सिंहल आज भले ही इस दुनिया में न रहे हो लेकिन उनके साथ इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले वासुदेवानंद उनके निधन के बाद भी सक्रिय रहे। उन्हीं की मौजूदगी में वर्ष 1989 में महाकुंभ के दौरान हुई धर्मसंसद में अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल स्वीकृत हुआ था।
मंदिर निर्माण के लिए हर हिंदू से सवा रुपये लिए जाने की मुहिम में भी स्वामी वासुदेवानंद का उल्लेखनीय योगदान रहा। उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के मद्देनजर पिछले माह विहिप मार्ग दर्शक मंडल और उसके अगले दिन हुए संत सम्मेलन की अध्यक्षता विहिप ने स्वामी वासुदेवानंद को ही सौंपी। विहिप के केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी बताते हैं कि निश्चित ही स्वामी वासुदेवानंद का राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका रही। अशोक सिंहल की तरह वह भी इस आंदोलन के नायकों में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट में विहिप का कोई पदाधिकारी नहीं है, लेकिन जिन्हें सदस्य बनाया गया है उन सभी का विहिप से नाता है।
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उधर विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य उडुप्पी स्थित पेजावर मठ के स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ महाराज, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद महाराज और स्वामी गोविंद देव गिरि को भी ट्रस्ट में शामिल किया है। स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ महाराज और परमानंद महाराज पिछले माह प्रयागराज आए भी थे। इन दोनों ने विहिप केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल और संत सम्मेलन में शिरकत की थी, जबकि स्वामी गोविंद देव गिरि पिछले वर्ष विहिप की धर्म संसद में शामिल होने को प्रयागराज आए थे।
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दरअसल प्रयागराज में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल के साथ मंदिर आंदोलन में शुरू से ही स्वामी वासुदेवानंद सक्रिय रहे। प्रयागराज शुरू से ही मंदिर आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। विहिप प्रांत कार्यालय में राम मंदिर मुद्दे को गरमाने के लिए न जाने कितनी ही बैठके हुई। अशोक सिंहल आज भले ही इस दुनिया में न रहे हो लेकिन उनके साथ इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले वासुदेवानंद उनके निधन के बाद भी सक्रिय रहे। उन्हीं की मौजूदगी में वर्ष 1989 में महाकुंभ के दौरान हुई धर्मसंसद में अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल स्वीकृत हुआ था।
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मंदिर निर्माण के लिए हर हिंदू से सवा रुपये लिए जाने की मुहिम में भी स्वामी वासुदेवानंद का उल्लेखनीय योगदान रहा। उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के मद्देनजर पिछले माह विहिप मार्ग दर्शक मंडल और उसके अगले दिन हुए संत सम्मेलन की अध्यक्षता विहिप ने स्वामी वासुदेवानंद को ही सौंपी। विहिप के केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी बताते हैं कि निश्चित ही स्वामी वासुदेवानंद का राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका रही। अशोक सिंहल की तरह वह भी इस आंदोलन के नायकों में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट में विहिप का कोई पदाधिकारी नहीं है, लेकिन जिन्हें सदस्य बनाया गया है उन सभी का विहिप से नाता है।
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उधर विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य उडुप्पी स्थित पेजावर मठ के स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ महाराज, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद महाराज और स्वामी गोविंद देव गिरि को भी ट्रस्ट में शामिल किया है। स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ महाराज और परमानंद महाराज पिछले माह प्रयागराज आए भी थे। इन दोनों ने विहिप केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल और संत सम्मेलन में शिरकत की थी, जबकि स्वामी गोविंद देव गिरि पिछले वर्ष विहिप की धर्म संसद में शामिल होने को प्रयागराज आए थे।