{"_id":"6967a5632f3e8b0b1108f608","slug":"swami-avimukteshwaranand-saraswati-said-magh-is-the-month-of-destruction-of-sins-2026-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Magh Mela : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- पापों के नाश का महीना है माघ, हिंसा से दूर रहने वाला ही हिंदू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Magh Mela : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- पापों के नाश का महीना है माघ, हिंसा से दूर रहने वाला ही हिंदू
Wed, 14 Jan 2026 07:47 PM IST
विनोद सिंह
विनोद बघेल, प्रयागराज
विनोद बघेल, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 14 Jan 2026 07:47 PM IST
सार
त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में मंगलवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माघ पापों के नाश का महीना है। अघ का मतलब होता है पाप और मा का मतलब होता है महीना।
विज्ञापन
शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शुरू करेंगे गौ प्रतिष्ठा यात्रा।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में मंगलवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माघ पापों के नाश का महीना है। अघ का मतलब होता है पाप और मा का मतलब होता है महीना। माघ माह में संगम स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मनुष्यों के 365 दिन के बराबर देवताओं का एक दिन होता है। माघ माह देवताओं का ब्रह्म मुहूर्त होता है।
विज्ञापन
प्रयागराज को गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम माना जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर सारे देवता यहां स्नान करने आते हैं। इसी समय धरती पर रहने वाले लोेग भी देवताओं के साथ स्नान करके इसका लाभ उठाते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि 14 जनवरी को दोपहर बाद और 15 को दिनभर मकर संक्रांति स्नान का योग है।
विज्ञापन
धर्म की बात धर्माचार्य को ही शोभा देती है
शंकराचार्य कहा कि धर्म की बात धर्माचार्य करे तो ही सही माना जाता है। नेता धर्म की बात कैसे कह सकते हैं। कोई चिकित्सक या वैद्य ही दवा की बात कह सकता है। कोई अन्य व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र की बात करता है तो वह शोभा नहीं देता है। आजकल परंपरा चल रही है कि धर्म की बात हर व्यक्ति करने लगता है उसको चाहे उसके बारे में कुछ पता है या नहीं। लोग उनकी बात को मान भी रहे हैं।
विज्ञापन
जो हिंसा से दूर है वही हिंदू
स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू एक ही है। सदा से चले आने के कारण सनातन माना जाता है। दोनों एक ही है। हिंसा से दूर रहने वाले को हिंदू कहते हैं। हि का मतलब हिंसा और दू का मतलब दूर। जो हिंसा से दूर है वही हिंदू है। कहा कि इस बार हम कोई अपना संदेश नहीं देंगे। माघ मेले में आए सारे संत महात्मा जो निचोड़ निकालेंगे उसी को हम आगे बढ़ाएंगे।