{"_id":"59b1a1c74f1c1bfc7f8b4d44","slug":"suspended-seven-school-students-in-st-joseph-school-children-hugging","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूली बच्चों को लगी ई हुक्का की लती, सेंट जोसेफ में सात छात्र निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूली बच्चों को लगी ई हुक्का की लती, सेंट जोसेफ में सात छात्र निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:34 AM IST
विज्ञापन
hukka bar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेस्टोरेंटों में हुक्का बार पर सख्ती हुई तो ई हुक्का का प्रचलन स्कूली छात्र-छात्राओं में बढ़ गया। मोटे पेन या स्केच की शक्ल में इन ई हुक्कों को छात्र स्कूलों में बेधड़क ले जा रहे हैं। पहले तो स्कूलों में किसी को भनक तक नहीं लगी लेकिन सेंट जोसेफ कॉलेज में ई हुक्का का सेवन करते सात छात्र सीसीटीवी में कैद हो गए। उन्हें एक-एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया। उनके माता पिता को बुलाकर कालेज प्रबंधन ने लिखवा लिया है कि भविष्य में ई हुक्का गुड़गुड़ाते मिले तो हमेशा के लिए कालेज से निकाल दिया जाएगा। इस घटना के बाद कई कालेजों के प्रबंधतंत्र ने छात्र-छात्राओं की निगरानी बढ़ा दी है। माता पिता को भी आगाह कर दिया है कि वह बच्चों पर ध्यान दें। उनके पास मोटा पेन या फिर मोटी स्केच की तरह का कोई सामान हो तो उसे जरूर चेक करें।
ई हुक्का खुलेआम मार्केट में 30 फ्लेवर्स में बिक रहा है। इसे खरीदने के लिए कक्षा नौ से लेकर इंटरमीडिएट व स्नातक तक के छात्र-छात्राओं में होड़ लगी हुई है। कुछ शौकिया हुक्का खरीद रहे हैं तो कुछ का दावा है कि वो इसे सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए पी रहे हैं। स्थिति यह है कि जिनके माता पिता पॉकेट मनी कम दे रहे हैं, उनके बच्चे चार से पांच के समूह में ई हुक्का खरीदकर इस शौक को पूरा कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह शौक इन छात्र छात्राओं को सिगरेट और स्मैक के नशे की ओर ले जा रहा है।
मोटी स्केच या पेन की की तरह होता है। जिसमें लगी एक तरफ की क्लिप से जेब में पेन की तरह रख लिया जाता है। इसके अंदर बैट्री होती है, जिसको एक किनारे में यूएसबी पोर्ट लगाकर लैपटॉप या बिजली से करीब 20 से 30 मिनट में चार्ज किया जा सकता है। इसी बैट्री के बराबर में फ्लेवर और तंबाकू मिली एक टिक्की या रिफिल लगी होती है। ऑन कर दूसरी ओर से कश लगाने पर सिगरेट से ढाई गुना तेजी से और अधिक धुंआ निक लता है। जिसे सिगरेट से अधिक हानिकारक बताया जा रहा है। पेन या मोटी स्केच की शक्ल में होने के कारण इसे आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
750 से लेकर एक हजार रुपये की कीमत वाला हुक्का एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि दो हजार रुपये तक के हुक्के में फ्लेवर और तंबाकू का 100 से 150 रुपये में अलग-अलग फ्लेवर में लिक्वड रिफिल करके करीब 20 बार चार्ज करने की व्यवस्था है। एक रिफिल या टिक्की में करीब 500 कश लगाने की क्षमता है। इन ई हुक्का को बेचने वालों का दावा है कि ये पूरी तरह तंबाकू फ्री है। इसमें नशा नहीं है, लेकिन यह बहुत जल्द बच्चों को नशे का लती बना देता है।
‘ई हुक्के का धुआं और बैट्री से मिलने वाली गर्मी युवाओं के फेफड़ों, चेस्ट और गुर्दे पर सीधे असर डालती है। जिसकी वजह से सांस की बीमारी, हार्ट अटैक और निमोनिया की चपेट में वे आ जाते हैं। आगे चलकर किडनी डेमेज होने का खतरा बना रहता है।’ -डा, आशुतोष गुप्ता, श्वास और दमा रोग विशेषज्ञ
कॉलेज में कई छात्र चोरी छिपे ई हुक्का लाए थे। जिनको जब्त कर नष्ट करा दिया गया है। उन्हें एक सप्ताह के लिए निलंबित करने के साथ-साथ परिजनों को बुलाकर चेतावनी दी गई है। कॉलेज परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की वजह से मोटे पेन और स्केचुनुमा ई हुक्का आसानी से दिख गए थे। भविष्य में जिस छात्र के पास ई हुक्का मिलेगा, उसे हमेशा के लिए कालेज से निष्कासित कर दिया जाएगा।’ -रॉल्फी डिसूजा, प्रिंसिपल, सेंट जोसेफ
‘ई हुक्का के बारे में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। जिसके वैध और अवैध के बारे में जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाएगी। छात्रों पर बुरा असर डालने वाले किसी भी सामान की बिक्री नहीं होने दी जाएगी।’ -एस एन साबत, अपर महानिदेशक पुलिस इलाहाबाद
विज्ञापन
ई हुक्का खुलेआम मार्केट में 30 फ्लेवर्स में बिक रहा है। इसे खरीदने के लिए कक्षा नौ से लेकर इंटरमीडिएट व स्नातक तक के छात्र-छात्राओं में होड़ लगी हुई है। कुछ शौकिया हुक्का खरीद रहे हैं तो कुछ का दावा है कि वो इसे सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए पी रहे हैं। स्थिति यह है कि जिनके माता पिता पॉकेट मनी कम दे रहे हैं, उनके बच्चे चार से पांच के समूह में ई हुक्का खरीदकर इस शौक को पूरा कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह शौक इन छात्र छात्राओं को सिगरेट और स्मैक के नशे की ओर ले जा रहा है।
विज्ञापन
मोटी स्केच या पेन की की तरह होता है। जिसमें लगी एक तरफ की क्लिप से जेब में पेन की तरह रख लिया जाता है। इसके अंदर बैट्री होती है, जिसको एक किनारे में यूएसबी पोर्ट लगाकर लैपटॉप या बिजली से करीब 20 से 30 मिनट में चार्ज किया जा सकता है। इसी बैट्री के बराबर में फ्लेवर और तंबाकू मिली एक टिक्की या रिफिल लगी होती है। ऑन कर दूसरी ओर से कश लगाने पर सिगरेट से ढाई गुना तेजी से और अधिक धुंआ निक लता है। जिसे सिगरेट से अधिक हानिकारक बताया जा रहा है। पेन या मोटी स्केच की शक्ल में होने के कारण इसे आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
750 से लेकर एक हजार रुपये की कीमत वाला हुक्का एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि दो हजार रुपये तक के हुक्के में फ्लेवर और तंबाकू का 100 से 150 रुपये में अलग-अलग फ्लेवर में लिक्वड रिफिल करके करीब 20 बार चार्ज करने की व्यवस्था है। एक रिफिल या टिक्की में करीब 500 कश लगाने की क्षमता है। इन ई हुक्का को बेचने वालों का दावा है कि ये पूरी तरह तंबाकू फ्री है। इसमें नशा नहीं है, लेकिन यह बहुत जल्द बच्चों को नशे का लती बना देता है।
‘ई हुक्के का धुआं और बैट्री से मिलने वाली गर्मी युवाओं के फेफड़ों, चेस्ट और गुर्दे पर सीधे असर डालती है। जिसकी वजह से सांस की बीमारी, हार्ट अटैक और निमोनिया की चपेट में वे आ जाते हैं। आगे चलकर किडनी डेमेज होने का खतरा बना रहता है।’ -डा, आशुतोष गुप्ता, श्वास और दमा रोग विशेषज्ञ
कॉलेज में कई छात्र चोरी छिपे ई हुक्का लाए थे। जिनको जब्त कर नष्ट करा दिया गया है। उन्हें एक सप्ताह के लिए निलंबित करने के साथ-साथ परिजनों को बुलाकर चेतावनी दी गई है। कॉलेज परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की वजह से मोटे पेन और स्केचुनुमा ई हुक्का आसानी से दिख गए थे। भविष्य में जिस छात्र के पास ई हुक्का मिलेगा, उसे हमेशा के लिए कालेज से निष्कासित कर दिया जाएगा।’ -रॉल्फी डिसूजा, प्रिंसिपल, सेंट जोसेफ
‘ई हुक्का के बारे में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है। जिसके वैध और अवैध के बारे में जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाएगी। छात्रों पर बुरा असर डालने वाले किसी भी सामान की बिक्री नहीं होने दी जाएगी।’ -एस एन साबत, अपर महानिदेशक पुलिस इलाहाबाद