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आयोग के निर्णय के विरोध में सपाइयों ने किया प्रदर्शन

Tue, 11 Feb 2020 01:39 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 01:39 AM IST
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Supporters of reserved class candidates descended
Supporters of reserved class candidates descended - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के उस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों का चयन अनारिक्षत श्रेणी में नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे अपनी ही श्रेणी में चयनित किया जाएगा। आयोग के इस निर्णय के खिलाफ समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सोमवार को विधान परिषद के सदस्य बासुदेव यादव के नेतृत्व में आयोग गेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा।
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बासुदेव यादव और निवर्तमान महानगर अध्यक्ष सैयद इफ़्तेखार हुसैन ने कहा कि आयोग ने प्रस्ताव पारित कर ओबीसी, बीएससी, एसीटी अभ्यर्थियों के अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि अगर अनारक्षित श्रेणी कोई अभ्यर्थी योग्य है और अंतिम चयन में उसके अंक अनारक्षित श्रेणी के कटऑफ से अधिक हैं तो उसे अनारक्षित श्रेणी में शामिल होने का अधिकार है। इसके लिए उन्होंने आरक्षण संबंधी अधिनियम का हवाला दिया और आरोप लगाया कि आयोग नियमों का उल्लंघन कर रहा है, जो समाज के कमजोर तबके के लिए ठीक नहीं है।
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कहा कि आयोग को कोई अधिकार नहीं कि वह विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम को समाप्त करे। निर्णय लिया गया कि यह मुद्दा निधानसभा और विधान परिषद में उठाया जाएगा। साथ ही इस मसले पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सपाइयों ने चेतावनी दी कि आयोग ने अपना तुगलकी फरमान वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन होगा। इस दौरान सपा नेता रामानंद भारती, निधि यादव, सुषम भारतीया, पप्पू लाल यादव, योगेश चंद्र यादव, महबूब उस्मानी, सैयद मोहम्मद अस्करी, रविंद्र यादव, संदीप यादव, अखिलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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आयोग के निर्णय का किया स्वागत
प्रयागराज। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आयोग की ओर से आरक्षित वर्ग की चयन प्रक्रिया में किए गए बदलाव का स्वागत किया है। कौशल का कहना है कि जातिवाद से प्रेरित कुछ पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं, जो निंदनीय है। आयोग के निर्णय से मेधावी एवं योग्य अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। कौशल ने सवाल उठाए हैं कि अभी हाल में ही गरीब सवर्ण को भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है और उनपर भी आरक्षित वर्ग में किया गया बदलाव लागू होगा, ऐसे में कुछ राजनैतिक दलों को वर्ग विशेष के लिए दर्द क्यों हो रहा है। कौशल का कहना है कि जरूरत पड़ी तो सभी प्रतियोगी छात्र सड़क पर उतरेंगे और यूपीएससी एवं अन्य भर्ती संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे।
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