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हाईकोर्ट : उत्तराधिकार अदालत तय नहीं कर सकती सेवानिवृत्ति लाभों का हक, सक्षम प्राधिकारी हो ही अधिकारी

Sat, 17 Oct 2026 03:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 Oct 2026 03:30 PM IST
सार

उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने वाली अदालत मृत कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों के अंतिम हकदार का निर्धारण नहीं कर सकती। इन लाभों का अधिकार संबंधित सेवा नियमों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी को तय करना होगा।

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succession court cannot determine entitlement to retirement benefits
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने वाली अदालत मृत कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों के अंतिम हकदार का निर्धारण नहीं कर सकती। इन लाभों का अधिकार संबंधित सेवा नियमों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी को तय करना होगा। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम ने याचिकाकर्ता शशि की अपील स्वीकार कर ली।

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मामला उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल रहे दिवंगत सुशील कुमार के सेवा लाभों से जुड़ा है। उनकी पत्नी शशि से विभाग में जमा 2,64,521 रुपये में आधे हिस्से के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगा था। यह रकम पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और अन्य सेवा लाभों से संबंधित थी। शशि ने खुद को सुशील कुमार की पत्नी बताया जबकि प्रतिवादियों ने देव सहगल को उनका बेटा बताया।
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ट्रायल कोर्ट ने याची को कर्मचारी की पत्नी माना और देव सहगल को सुशील कुमार का बेटा मानते हुए उसके अभिभावक सोना देवी के माध्यम से सेवा लाभ देने का निर्देश दिया। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी वारिस होना और किसी विशेष सेवा लाभ का हकदार होना अलग-अलग प्रश्न है। फैमिली पेंशन मृत कर्मचारी की संपत्ति नहीं बल्कि सेवा नियमों के तहत मिलने वाला लाभ है। मृतक का बेटा होना भी उसे स्वतः फैमिली पेंशन का हकदार नहीं बनाता।


कोर्ट ने सहारनपुर के अपर जिला जज कोर्ट नंबर 10 के 24 सितंबर 2011 के आदेश को संबंधित सीमा तक रद्द करते हुए सक्षम प्राधिकारी को सभी दावों पर सेवा नियमों के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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