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हांगलू के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र, निकाला मार्च
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 25 Sep 2018 02:20 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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व्हाट्स एप चैट, कॉल रिकार्डिंग का ऑडियो वायरल होने, प्रशासनिक, वित्तीय एवं अकादमिक अनियमितताओं के मामले में घिरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ छात्रों समेत तमाम वर्गों के लोग सड़क पर उतर गए हैं। कुलपति की बर्खास्तगी की मांग को लेकर सोमवार को महिला छात्रावास परिसर से सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे तक मार्च निकाला गया और इसके बाद चौराहे पर सभा की गई।
मार्च में छात्रों के साथ छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी, कर्मचारी संघ के पदाधिकारी और महिला संगठनों की प्रतिनिधि मौजूद रहीं। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव ने कहा कि गंभीर आरोपों से घिरे कुलपति प्रो. हांगलू को पद पर बने रहने को कोई अधिकारी नहीं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को तत्काल कुलपति को बर्खास्त करते हुए ऐसी मानसिकता वाले लोगों को कड़ा संदेश देना चाहिए। कहा कि मंगलवार को इविवि परिसर में कुलपति के पुतले की शवयात्रा निकाली जाएगी।
छात्रसंघ के निवर्तमान महामंत्री निर्भय कुमार द्विवेदी और पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल छात्रों की न होकर, इलाहाबाद के आमजन की लड़ाई हो गई है, क्योंकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय सभी के लिए गौरव का विषय है। जब तक कुलपति को बर्खास्त नहीं किया जाता, छात्र शांत नहीं बैठेंगे। छात्र संघर्ष मोर्चा के सदस्य राजनीश सिंह रिशू ने कहा कि कुलपति प्रो्. हांगलू की वजह से विश्वविद्यालय का नाम देश के साथ विदेश में भी खराब हुआ। अब उनकी बर्खास्तगी पर ही आंदोलन खत्म होगा।
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मार्च में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, दिनेश सिंह यादव, रोहित मिश्र, ऋचा सिंह, छात्र नेता सूर्य प्रकाश मिश्र, आनंद सिंह निक्कू, दिग्विजय सिंह, अतेंद्र सिंह, उदय प्रकाश यादव, ऋभष तिवारी, अरविंद सरोज, वीरेंद्र सिंह चौहान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष हौसला प्रसाद, निवर्तमान अध्यक्ष संतोष सहाय, अनिल कश्यप, अधिवक्ता नीरज तिवारी, अधिवक्ता रमाशीष सिंह, नारीवादी कार्यकर्ता पद्मा सिंह, तोषी पांडेय आदि शामिल रहे।
कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी का छात्रों ने तीव्र विरोध किया और सोमवार को छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव के नेतृत्व में कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन किया। छात्र सीधे कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसके मिश्र से मिलकर उन्हें ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन कार्यवाहक कुलपति सामने नहीं आए और छात्रों ने डीएसडब्ल्यू के माध्यम से कार्यवाहक कुलपति को ज्ञापन दिया।
छात्रों ने जांच कमेटी को लेकर कई गंभीर आपत्तियां उठाईं हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कोई भी समानांतर संस्था अपने पद के दुरुपयोग की जांच स्वयं नहीं कर सकती। छात्रों का आरोप है कि कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र का वरिष्ठता क्रम सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवैध घोषित किया जा चुका है। ऐसे में प्रो. केएस मिश्र कुलपति प्रो. हांगलू की कृपा पर पदासीन हैं। इसके अलावा जांच कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण टंडन खत्री पाठशाला से संबंधित है और एसएस खन्ना डिग्री कॉलेज खत्री पाठशाला द्वारा संगठित है। ऐसे में उन्हें जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना न्यायोचित नहीं है। कमेटी के नोडल अधिकारी देवेश गोस्वामी की एक माह पहले विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनाती हुई है और वर्तमान में वह परिवीक्षा अवधि में हैं।
वह कुलपति के मातहत हैं, जिनसे जांच कमेटी प्रभावित हो सकती है। वहीं, जांच कमेटी महिला उत्पीड़न की शिकायत पर गठित की गई है लेकिन इस कमेटी में किसी महिला को शामिल नहीं किया गया है। जांच के लिए कोई समय सीमा भी निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में जांच के नाम पर केवल लीपापोती हो रही है। मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्वयं जांच की प्रक्रिया में है और एसटीएफ भी इसकी जांच कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर से इस पूरे मामले को किसी अन्य एजेंसी को सौंपना जांच को प्रभावित करने जैसा होगा। उधर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने एक बार फिर मंत्रालय को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जांच कमेटी के नाम पर एक गंभीर मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रहा है।
इलाहाबाद विश्वविद्यसालय में कुलपति प्रो. हांगलू के समर्थन में गत 18 सितंबर को हुई ऑटा और ऑक्टा की संयुक्त बैठक का विरोध करने पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. एचएस उपाध्याय ने छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि अध्यापक संघ की ओर से आरोप लगाया है कि बैठक के दौरान अवनीश के नेतृत्व में अराजकतत्वों ने प्राध्यापकों के साथ हाथापाई की और अभद्रता की। यह कृत्य अनुशासनहीनता की परिधि में आता है। अवनीश से कहा गया है कि वह 27 सितंबर को अपराह्न तीन से चार बजे के बीच उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण दें, वरना विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पत्र लिखा है और मांग की है कि वह चुप्पी तोड़कर आगे आएं। पत्र में अध्यक्ष ने कहा है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है कि इस मामले में कुलपति निर्दोष हैं। रिपोर्ट भेजे जाने के बाद जांच कमेटी के गठन को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। मामला अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर फैल गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षक, छात्र, कर्मचारी और जनमानस इस घटना के अनिर्णीत भविष्य की दिशा को देखकर असहज महसूस कर रहा है। ऑटा अध्यक्ष ने मांग की है कि कुलपति चुप्पी तोड़कर आगे आएं और खुद इस मामले की जांच करें। अगर वायरल हुए ऑडियो के मामले में थोड़ी भी सच्चाई है तो कुलपति स्व विवेक से इस मामले में अपने निर्णय की घोषणा करें।
इलाहाबाद, 24 सितंबर। कुलपति प्रो. हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी के नोडल अफसर देवेश गोस्वामी ने सोमवार को इविवि के अतिथि ग्रह में कुछ लोगों से संबंधित मामले में साक्ष्य इकट्ठे किए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीआरओ प्रो. चित्तरंजन कुमार सिंह का कहना है कि कुछ लोगों ने नोडल अफसर को साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। अगर कोई अन्य व्यक्ति भी साक्ष्य उपलब्ध करना चाहता है तो 26 सितंबर तक इविवि के अतिथि गृह में सुबह 10 से दोपहर ढाई बजे तक नोडल अफसर के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीटेक छात्रों ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन से आग्रह किया है कि वह इस जांच कमेटी का नेतृत्व करें। उधर, एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि समर्थन पत्र में हस्ताक्षर करने वाले बीटेक के छात्र उसी विभाग के हैं, जिस विभाग में रजिस्ट्रा प्रो. एनके शुक्ला है। रोहित का आरोप है कि छात्रों को धमकी देकर और उन पर दबाव बनाकर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। उधर, छात्रों के बजाय समर्थन पत्र जारी करने वाले पीआरओ डॉ. चितरंजन सिंह का कहना है कि यह शुरुआत है। कुलपति के समर्थन में अन्य विभागों के छात्र भी हस्ताक्षर के लिए आगे आ रहे हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हांगलू के खिलाफ प्रो. रंजना कक्कड़ की ओर से दिए गए बयान पर ऑक्टा ने आपत्ति जताई है। ऑक्टा के महासचिव उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि इविवि के संघटक कॉलेजों को जो भी लाभ दिए गए हैं, वे विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस एवं यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप दिए गए हैं। साथ ही ऑक्टा ने न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में बनी कमेटी पर पर भी भरोसा जताया है।
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मार्च में छात्रों के साथ छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी, कर्मचारी संघ के पदाधिकारी और महिला संगठनों की प्रतिनिधि मौजूद रहीं। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव ने कहा कि गंभीर आरोपों से घिरे कुलपति प्रो. हांगलू को पद पर बने रहने को कोई अधिकारी नहीं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को तत्काल कुलपति को बर्खास्त करते हुए ऐसी मानसिकता वाले लोगों को कड़ा संदेश देना चाहिए। कहा कि मंगलवार को इविवि परिसर में कुलपति के पुतले की शवयात्रा निकाली जाएगी।
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छात्रसंघ के निवर्तमान महामंत्री निर्भय कुमार द्विवेदी और पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल छात्रों की न होकर, इलाहाबाद के आमजन की लड़ाई हो गई है, क्योंकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय सभी के लिए गौरव का विषय है। जब तक कुलपति को बर्खास्त नहीं किया जाता, छात्र शांत नहीं बैठेंगे। छात्र संघर्ष मोर्चा के सदस्य राजनीश सिंह रिशू ने कहा कि कुलपति प्रो्. हांगलू की वजह से विश्वविद्यालय का नाम देश के साथ विदेश में भी खराब हुआ। अब उनकी बर्खास्तगी पर ही आंदोलन खत्म होगा।
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मार्च में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, दिनेश सिंह यादव, रोहित मिश्र, ऋचा सिंह, छात्र नेता सूर्य प्रकाश मिश्र, आनंद सिंह निक्कू, दिग्विजय सिंह, अतेंद्र सिंह, उदय प्रकाश यादव, ऋभष तिवारी, अरविंद सरोज, वीरेंद्र सिंह चौहान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष हौसला प्रसाद, निवर्तमान अध्यक्ष संतोष सहाय, अनिल कश्यप, अधिवक्ता नीरज तिवारी, अधिवक्ता रमाशीष सिंह, नारीवादी कार्यकर्ता पद्मा सिंह, तोषी पांडेय आदि शामिल रहे।
कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी का छात्रों ने तीव्र विरोध किया और सोमवार को छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव के नेतृत्व में कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन किया। छात्र सीधे कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसके मिश्र से मिलकर उन्हें ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन कार्यवाहक कुलपति सामने नहीं आए और छात्रों ने डीएसडब्ल्यू के माध्यम से कार्यवाहक कुलपति को ज्ञापन दिया।
छात्रों ने जांच कमेटी को लेकर कई गंभीर आपत्तियां उठाईं हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कोई भी समानांतर संस्था अपने पद के दुरुपयोग की जांच स्वयं नहीं कर सकती। छात्रों का आरोप है कि कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र का वरिष्ठता क्रम सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवैध घोषित किया जा चुका है। ऐसे में प्रो. केएस मिश्र कुलपति प्रो. हांगलू की कृपा पर पदासीन हैं। इसके अलावा जांच कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण टंडन खत्री पाठशाला से संबंधित है और एसएस खन्ना डिग्री कॉलेज खत्री पाठशाला द्वारा संगठित है। ऐसे में उन्हें जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना न्यायोचित नहीं है। कमेटी के नोडल अधिकारी देवेश गोस्वामी की एक माह पहले विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनाती हुई है और वर्तमान में वह परिवीक्षा अवधि में हैं।
वह कुलपति के मातहत हैं, जिनसे जांच कमेटी प्रभावित हो सकती है। वहीं, जांच कमेटी महिला उत्पीड़न की शिकायत पर गठित की गई है लेकिन इस कमेटी में किसी महिला को शामिल नहीं किया गया है। जांच के लिए कोई समय सीमा भी निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में जांच के नाम पर केवल लीपापोती हो रही है। मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्वयं जांच की प्रक्रिया में है और एसटीएफ भी इसकी जांच कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर से इस पूरे मामले को किसी अन्य एजेंसी को सौंपना जांच को प्रभावित करने जैसा होगा। उधर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने एक बार फिर मंत्रालय को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जांच कमेटी के नाम पर एक गंभीर मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रहा है।
इलाहाबाद विश्वविद्यसालय में कुलपति प्रो. हांगलू के समर्थन में गत 18 सितंबर को हुई ऑटा और ऑक्टा की संयुक्त बैठक का विरोध करने पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. एचएस उपाध्याय ने छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि अध्यापक संघ की ओर से आरोप लगाया है कि बैठक के दौरान अवनीश के नेतृत्व में अराजकतत्वों ने प्राध्यापकों के साथ हाथापाई की और अभद्रता की। यह कृत्य अनुशासनहीनता की परिधि में आता है। अवनीश से कहा गया है कि वह 27 सितंबर को अपराह्न तीन से चार बजे के बीच उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण दें, वरना विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पत्र लिखा है और मांग की है कि वह चुप्पी तोड़कर आगे आएं। पत्र में अध्यक्ष ने कहा है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है कि इस मामले में कुलपति निर्दोष हैं। रिपोर्ट भेजे जाने के बाद जांच कमेटी के गठन को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। मामला अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर फैल गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षक, छात्र, कर्मचारी और जनमानस इस घटना के अनिर्णीत भविष्य की दिशा को देखकर असहज महसूस कर रहा है। ऑटा अध्यक्ष ने मांग की है कि कुलपति चुप्पी तोड़कर आगे आएं और खुद इस मामले की जांच करें। अगर वायरल हुए ऑडियो के मामले में थोड़ी भी सच्चाई है तो कुलपति स्व विवेक से इस मामले में अपने निर्णय की घोषणा करें।
इलाहाबाद, 24 सितंबर। कुलपति प्रो. हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी के नोडल अफसर देवेश गोस्वामी ने सोमवार को इविवि के अतिथि ग्रह में कुछ लोगों से संबंधित मामले में साक्ष्य इकट्ठे किए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीआरओ प्रो. चित्तरंजन कुमार सिंह का कहना है कि कुछ लोगों ने नोडल अफसर को साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। अगर कोई अन्य व्यक्ति भी साक्ष्य उपलब्ध करना चाहता है तो 26 सितंबर तक इविवि के अतिथि गृह में सुबह 10 से दोपहर ढाई बजे तक नोडल अफसर के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीटेक छात्रों ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के मामले में गठित जांच कमेटी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन से आग्रह किया है कि वह इस जांच कमेटी का नेतृत्व करें। उधर, एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि समर्थन पत्र में हस्ताक्षर करने वाले बीटेक के छात्र उसी विभाग के हैं, जिस विभाग में रजिस्ट्रा प्रो. एनके शुक्ला है। रोहित का आरोप है कि छात्रों को धमकी देकर और उन पर दबाव बनाकर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। उधर, छात्रों के बजाय समर्थन पत्र जारी करने वाले पीआरओ डॉ. चितरंजन सिंह का कहना है कि यह शुरुआत है। कुलपति के समर्थन में अन्य विभागों के छात्र भी हस्ताक्षर के लिए आगे आ रहे हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हांगलू के खिलाफ प्रो. रंजना कक्कड़ की ओर से दिए गए बयान पर ऑक्टा ने आपत्ति जताई है। ऑक्टा के महासचिव उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि इविवि के संघटक कॉलेजों को जो भी लाभ दिए गए हैं, वे विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस एवं यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप दिए गए हैं। साथ ही ऑक्टा ने न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में बनी कमेटी पर पर भी भरोसा जताया है।