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छात्रों के सामने संकट, उच्च शिक्षा की राह कठिन
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Mon, 18 May 2015 01:55 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। नई शिक्षा नीति तथा स्टेप मार्किंग की व्यवस्था ने मेधावी छात्र-छात्राओं के सामने भी नया संकट खड़ा कर दिया है। इन बदलावों के बाद बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में सुधार के साथ ससम्मान उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में रिकार्ड उछाल आया। खुलेआम नकल ने बारहवीं तक की पढ़ाई और आसान कर दी है, लेकिन इनकी उच्च शिक्षा की राह उतनी ही कठिन हो गई है। विश्वविद्यालयों, कालेजों, तकनीकी संस्थानों में जगह नहीं होने की वजह से प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा। मनचाहे संस्थान में दाखिला तो ससम्मान उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों के लिए सपना होगा।
यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट का रिजल्ट रविवार को घोषित हुआ। इसमें 24 लाख 55 हजार 496 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें से तीन लाख पांच हजार 166 ससम्मान तथा 10 लाख से अधिक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। प्रदेश में तकरीबन दो लाख विद्यार्थी सीबीएसई और सीआईएससीई बारहवीं पास करके निकलेंगे। इस तरह से प्रदेश में ही उच्च शिक्षा के लिए 26.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की फौज खड़ी है। लाखों विद्यार्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले वर्षों में दाखिला नहीं लिया या प्रवेश नहीं मिला। इसके विपरीत प्रदेश के कुल 34 केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में 22 लाख विद्यार्थियों को दाखिला मिल सकता है।
गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर कालेज ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थी दाखिला लेना नहीं चाहते। अच्छे कालेजों में दाखिला नहीं मिलने से वहां मजबूरी में प्रवेश लेते हैं। नकल के भरोसे डिग्री की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी ऐसे कालेजों में जाते हैं। इनके अलावा प्रदेश के तकनीकी संस्थानों में स्नातक की एक लाख 24 हजार सीट हैं, लेकिन विद्यार्थियों के आगे नहीं आने की वजह से हजारों सीट खाली रह जाती है। अब इंजीनियरिंग कालेजों के बंद होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इनके अलावा प्रदेश में तीन आईआईटी, एनआईटी, एमएनएनआईटी आदि संस्थान भी हैं। इस तरह से इतनी कवायद के बाद पूरी सीट भर जाए तब भी तकरीबन 23.50 लाख विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाएगा। इस साल बारहवीं पास करने वाले ही तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को कहीं प्रवेश नहीं मिल पाएगा।
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शिक्षा के गढ़ इलाहाबाद में ही तकरीबन 25 हजार विद्यार्थियों को स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। यूपी बोर्ड में 97 हजार से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनके अलावा 10 हजार विद्यार्थी सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए हैं। इतना ही नहीं 25 हजार से अधिक विद्यार्थी दूसरे जिलों से यहां दाखिला के लिए आते हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद और संघटक कालेजों के स्नातक पाठ्यक्रम में तकरीबन 17 हजार सीट है। इनके अलावा शियाट्स तथा जिले के तकरीबन 120 डिग्री कालेजों में 60 हजार विद्यार्थियों के दाखिले की क्षमता है। इस तरह से इन सभी के साथ तकनीकी संस्थानाें की सीट भर जाए तब भी 25 हजार से अधिक को दाखिला नहीं मिल पाएगा।
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यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट का रिजल्ट रविवार को घोषित हुआ। इसमें 24 लाख 55 हजार 496 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें से तीन लाख पांच हजार 166 ससम्मान तथा 10 लाख से अधिक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। प्रदेश में तकरीबन दो लाख विद्यार्थी सीबीएसई और सीआईएससीई बारहवीं पास करके निकलेंगे। इस तरह से प्रदेश में ही उच्च शिक्षा के लिए 26.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की फौज खड़ी है। लाखों विद्यार्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले वर्षों में दाखिला नहीं लिया या प्रवेश नहीं मिला। इसके विपरीत प्रदेश के कुल 34 केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में 22 लाख विद्यार्थियों को दाखिला मिल सकता है।
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गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर कालेज ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थी दाखिला लेना नहीं चाहते। अच्छे कालेजों में दाखिला नहीं मिलने से वहां मजबूरी में प्रवेश लेते हैं। नकल के भरोसे डिग्री की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी ऐसे कालेजों में जाते हैं। इनके अलावा प्रदेश के तकनीकी संस्थानों में स्नातक की एक लाख 24 हजार सीट हैं, लेकिन विद्यार्थियों के आगे नहीं आने की वजह से हजारों सीट खाली रह जाती है। अब इंजीनियरिंग कालेजों के बंद होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इनके अलावा प्रदेश में तीन आईआईटी, एनआईटी, एमएनएनआईटी आदि संस्थान भी हैं। इस तरह से इतनी कवायद के बाद पूरी सीट भर जाए तब भी तकरीबन 23.50 लाख विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाएगा। इस साल बारहवीं पास करने वाले ही तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को कहीं प्रवेश नहीं मिल पाएगा।
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शिक्षा के गढ़ इलाहाबाद में ही तकरीबन 25 हजार विद्यार्थियों को स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। यूपी बोर्ड में 97 हजार से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनके अलावा 10 हजार विद्यार्थी सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए हैं। इतना ही नहीं 25 हजार से अधिक विद्यार्थी दूसरे जिलों से यहां दाखिला के लिए आते हैं। इसके विपरीत इलाहाबाद और संघटक कालेजों के स्नातक पाठ्यक्रम में तकरीबन 17 हजार सीट है। इनके अलावा शियाट्स तथा जिले के तकरीबन 120 डिग्री कालेजों में 60 हजार विद्यार्थियों के दाखिले की क्षमता है। इस तरह से इन सभी के साथ तकनीकी संस्थानाें की सीट भर जाए तब भी 25 हजार से अधिक को दाखिला नहीं मिल पाएगा।