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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Steam engine gets lifeline in Prayagraj, the sound of chhuk-chhuk comes as soon as it gets dark.

Railway : प्रयागराज में भाप इंजन को मिली संजीवनी, अंधेरा होते ही आती है छुक-छुक की आवाज

Fri, 08 Mar 2024 09:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Mar 2024 09:15 PM IST
सार

तकरीबन सत्तर वर्ष से ज्यादा पुराने इस इंजन से आने वाली छुक-छुक की आवाज जहां यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, वहीं लोग इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुके इस इंजन के साथ खूब सेल्फी भी ले रहे हैं।

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Steam engine gets lifeline in Prayagraj, the sound of chhuk-chhuk comes as soon as it gets dark.
प्रयागराज जंक्शन पर लगा भाप इंजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड स्थित रिजर्वेशन काउंटर के बाहर लगे इंजन से एक बार फिर छुक-छुक की आवाज आनी शुरू हो गई है। रात होते ही जहां इंजन की सीटी बजने लगती है, वहीं उसके ऊपर से निकलता धुआं लोगों को पुराने दिनों की याद कराने लगा है। खास बात यह है कि इंजन की छुक-छुक आवाज के साथ ही उसके पहिये भी एक ही स्थान पर लगातार घूमते दिखाई देते हैं।

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तकरीबन सत्तर वर्ष से ज्यादा पुराने इस इंजन से आने वाली छुक-छुक की आवाज जहां यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, वहीं लोग इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुके इस इंजन के साथ खूब सेल्फी भी ले रहे हैं।

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वर्ष 2019 में कुंभ मेले के पूर्व ही तत्कालीन डीआरएम अमिताभ ने जंक्शन के प्रवेश द्वार पर खड़े इंजन को स्टार्ट करवाने की योजना बनाई थी। तब मंडल के इंजीनियरों की निगरानी में इसकी मरम्मत का कार्य किया गया। इसे स्टार्ट करने के लिए इसमें एक खास मोटर लगाई गई।

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तब तय हुआ था कि हर रोज शाम को इंजन को स्टार्ट किया जाएगा, ताकि लोग रेलवे के इतिहास से परिचित हो सकें। कुंभ के बाद इंजन कुछ दिन स्टार्ट भी किया गया। इसके बाद उसमें लगी मोटर में तकनीकी खामी आ गई। इसे देखते हुए डीआरएम हिमांशु बडौनी ने एक बार फिर से उक्त इंजन को स्टार्ट करवाया। यहां इंजन के आगे एक सिगनल भी लगाया गया है।

रेलसेवा से 25 फरवरी 1993 में बाहर किया गया था इंजन

जंक्शन के सिटी साइड में लगा भाप इंजन 1953 में डब्ल्यू बी वैगनाल लिमिटेड ने बनाया था। इसका मूल शेड गुजरात का गोधरा था। बताया जाता है कि 25 फरवरी 1993 में यह इंजन रेल सेवा से बाहर किया गया। इसके बाद यह इंजन प्रयागराज लाया गया। यहां पहले इसे एक अप्रैल 2003 को जंक्शन के सिटी साइड में लाकर खड़ा किया गया। फिर वर्ष 2018 में इसे भीतर लाकर रिजर्वेशन काउंटर के बाहर लगाया गया। यह इंजन नैरोगेज में चलता था। तब रेलवे ने इसे 1.61 लाख में खरीदा था। इसमें कुल 16 पहिये हैं। इसकी कुल लंबाई 42 फीट है।

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