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विसंगतियों के बीच वेतन बढ़ोतरी नाकाफी
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 14 Dec 2016 01:04 AM IST
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केंद्रीय कर्मियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने के बाद राज्य सरकार ने भी मंगलवार को अपने कर्मचारियों को यह लाभ देने की घोषणा कर दी। हालांकि केंद्रीय कर्मियों के समान राज्यकर्मियों को भी मूल वेतन में 2.57 गुना बढ़ोतरी का लाभ मिला है, जो नाकाफी है। कर्मचारियों को अब तक जितना कुल वेतन मिल रहा था, उसके मुकाबले महज 14 फीसदी की वृद्धि हुई है जबकि छठवें वेतन आयोग के तहत कुल वेतन में न्यूनतम 20 फीसदी की बढ़ोतरी का लाभ मिला था। वैसे भी ज्यादातर संवर्ग पुरानी वेतन विसंगतियों से ही जूझ रहे हैं। अब तक उनका निस्तारण ही नहीं हो सका है।
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की जो रिपोर्ट लागू की थी, राज्य सरकार ने भी वही हूबहू लागू कर दी। ऐसे में जिन विसंगतियों का केंद्रीय कर्मियों को सामना करना पड़ रहा है, वही विसंगतियां राज्य कर्मियों को भी परेशान करेंगी। कर्मचारियों को वर्तमान में मूल वेतन का 2.25 गुना वेतन मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर किसी का मूल वेतन सात हजार रुपये है तो उसे वर्तमान में 125 फीसदी डीए समेत कुल 15750 रुपये वेतन मिल रहा है। सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद मूल वेतन का 2.57 गुना यानी कुल 18000 रुपये वेतन मिलेगा। ऐसे में न्यूनतम वेतन में महज 2250 रुपये (14 फीसदी) की ही बढ़ोतरी हो रही है। यह विसंगति हर संवर्ग में है, क्योंकि सबको समान रूप से अब मूल वेतन का 2.57 गुना वेतन ही मिलेगा। इसके विपरीत छठवें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मूल वेतन पर न्यूनतम 40 फीसदी और कुल वेतन पर 20 फीसदी की बढ़ोतरी का लाभ मिला था।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने केंद्र की भांति भत्तों पर निर्णय टाल दिया है। वैसे भी राज्यकर्मियों को पहले से ही केंद्रीय कर्मियों के मुकाबले भत्ते कम मिल रहे हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा दर्जनों संवर्गों में राज्यकर्मियों को पुरानी विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है। बाल विकास पुष्टहार में मुख्य सेविकाओं के अलावा ग्राम विकास अधिकारी, एडीओ पंचायत समेत कई संवर्गों की पुरानी वेतन विसंगतियां ही अब तक दूर नहीं की जा सकी हैं। वहीं, कृषि विभाग, विपणन विभाग, सांख्यिकी विभाग आदि के कर्मचारियों के वेतन की सचिवालय कर्मियों के वेतन से भिन्नता भी बड़ी विसंगति है। इसी तरह तमाम विसंगतियां हैं, जिनका अब तक निराकरण नहीं हुआ और सातवां वेतन आयोग भी लागू कर दिया गया है। ऐसे में कर्मचारियों को पुरानी विसंगतियों से राहत की उम्मीद भी बहुत कम रह गई है।
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केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की जो रिपोर्ट लागू की थी, राज्य सरकार ने भी वही हूबहू लागू कर दी। ऐसे में जिन विसंगतियों का केंद्रीय कर्मियों को सामना करना पड़ रहा है, वही विसंगतियां राज्य कर्मियों को भी परेशान करेंगी। कर्मचारियों को वर्तमान में मूल वेतन का 2.25 गुना वेतन मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर किसी का मूल वेतन सात हजार रुपये है तो उसे वर्तमान में 125 फीसदी डीए समेत कुल 15750 रुपये वेतन मिल रहा है। सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद मूल वेतन का 2.57 गुना यानी कुल 18000 रुपये वेतन मिलेगा। ऐसे में न्यूनतम वेतन में महज 2250 रुपये (14 फीसदी) की ही बढ़ोतरी हो रही है। यह विसंगति हर संवर्ग में है, क्योंकि सबको समान रूप से अब मूल वेतन का 2.57 गुना वेतन ही मिलेगा। इसके विपरीत छठवें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मूल वेतन पर न्यूनतम 40 फीसदी और कुल वेतन पर 20 फीसदी की बढ़ोतरी का लाभ मिला था।
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इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने केंद्र की भांति भत्तों पर निर्णय टाल दिया है। वैसे भी राज्यकर्मियों को पहले से ही केंद्रीय कर्मियों के मुकाबले भत्ते कम मिल रहे हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा दर्जनों संवर्गों में राज्यकर्मियों को पुरानी विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है। बाल विकास पुष्टहार में मुख्य सेविकाओं के अलावा ग्राम विकास अधिकारी, एडीओ पंचायत समेत कई संवर्गों की पुरानी वेतन विसंगतियां ही अब तक दूर नहीं की जा सकी हैं। वहीं, कृषि विभाग, विपणन विभाग, सांख्यिकी विभाग आदि के कर्मचारियों के वेतन की सचिवालय कर्मियों के वेतन से भिन्नता भी बड़ी विसंगति है। इसी तरह तमाम विसंगतियां हैं, जिनका अब तक निराकरण नहीं हुआ और सातवां वेतन आयोग भी लागू कर दिया गया है। ऐसे में कर्मचारियों को पुरानी विसंगतियों से राहत की उम्मीद भी बहुत कम रह गई है।
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