SRN Hospital : हड़ताल तक सादे कागज पर चलेगी ओपीडी, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने दिया आदेश
रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से एसआरएन की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। लगातार चार दिनों से अस्पताल में एक भी नए मरीज नहीं देखे जा रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीज या तो निजी अस्पताल का सहारा लेते हैं या फिर घर लौट जाते हैं। इतना ही नहीं, डिजिटल एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी की जांचें भी 90 फीसदी प्रभावित हुई हैं।
विस्तार
एसआरएन अस्पताल में अब नए मरीज वापस नहीं किए जाएंगे। हड़ताल तक उन्हें सादे कागज पर चिकित्सीय सुविधाएं दी जाएंगी। यह आदेश एमएलएन मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.वत्सला मिश्रा ने सभी सीनियर कंसल्टेंट को दिया है। कहा है कि पर्चा न बनने की स्थिति में वह सादे कागज पर मरीज को देखें और दवाएं लिखें।
रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से एसआरएन की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। लगातार चार दिनों से अस्पताल में एक भी नए मरीज नहीं देखे जा रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीज या तो निजी अस्पताल का सहारा लेते हैं या फिर घर लौट जाते हैं। इतना ही नहीं, डिजिटल एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी की जांचें भी 90 फीसदी प्रभावित हुई हैं। सिर्फ गंभीर मरीजों के ही ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
वार्डों में भी हड़ताल का प्रभाव देखा जा सकता है। यहां पर भर्ती मरीजों को देखने के लिए सुबह सीनियर कंसल्टेंट का राउंड होता है। उसके बाद यह मरीज नर्स और वार्ड बॉय के हवाले होते हैं। क्योंकि, रेजिडेंट डॉक्टर काफी मुश्किल से वार्ड में दिखाई पड़ते हैं। ऐसे में मरीजों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा हड़ताल की आड़ में कई स्वास्थ्यकर्मी अपनी रोटी सेंकने में लगे हैं। मरीजों को स्ट्रेचर व व्हीलचेयर तक उपलब्ध कराने में हड़ताल का हवाला दिया जाता है।
कोलकाता की घटना के विरोध में वकीलों ने नहीं किया कामकाज
कोलकाता की घटना के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ न्यायिक कार्य से विरत रहा। वहीं, ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन से जुड़े अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने विरोध-प्रदर्शन किया। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मिश्रा रज्जू भइया ने कोलकाता की घटना की निंदा की और भारत बंद का समर्थन किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व लॉयर्स यूनियन के अध्यक्ष अरविंद कुमार राय और संचालन सचिव आशुतोष कुमार तिवारी ने किया। इस मौके पर अधिवक्ता पाशाली सोलंकी, रिंकी रेनु, सुमन श्रीवास्तव, सपना सिंह, रंजना सागर,सना बानो, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, केशल सिंह, मंजीत सिंह, आनंद स्वरूप गौतम, सुरेंद्र सिंह, सतेंद्र कुमार, राहुल त्रिपाठी, धर्मेंद्र सिंह,नीतिन श्रीवास्तव, श्याम सिंह सोमवंशी, अरविंद कुमार राय, आशुतोष कुमार तिवारी रहे।