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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Special on Women's Day: Women should move forward holding each other's hands, then things will work out

महिला दिवस पर विशेष : इक-दूजे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ें महिलाएं, तब बनेगी बात

Sat, 08 Mar 2025 02:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 08 Mar 2025 02:26 PM IST
सार

महिलाओं को जो कानूनी अधिकार मिले हैं, उसके दम पर वह शिक्षा से लेकर स्वरोजगार तक के क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। आधी आबादी का खुद पर विश्वास बढ़ा है। अब वह कार्यक्रमों में मूकदर्शक नहीं बल्कि प्रखर वक्ता बनकर पहुंच रही हैं।

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Special on Women's Day: Women should move forward holding each other's hands, then things will work out
अमर उजाला संवाद में हिस्सा लेने पहुंचीं शहर की महिला शक्तियां। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महिलाओं को जो कानूनी अधिकार मिले हैं, उसके दम पर वह शिक्षा से लेकर स्वरोजगार तक के क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। आधी आबादी का खुद पर विश्वास बढ़ा है। अब वह कार्यक्रमों में मूकदर्शक नहीं बल्कि प्रखर वक्ता बनकर पहुंच रही हैं। विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में महिलाओं ने खुलकर हर मुद्दे पर बात की।

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आंगन से लेकर अंतरिक्ष अभियानों तक महिलाओं की मौजूदगी को रेखांकित करते हुए सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज की हिंदी की प्रोफेसर डॉ. ऋतु माथुर ने कहा, महिलाएं एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बढ़ेंगी तो मुकाम जरूर हासिल होगा। अधिवक्ता ऋतंधरा मिश्रा ने बताया कि खुद को स्थापित करने के लिए कई ताने सुने। इसके बाद महिला अधिवक्ता संघ बनाया। अब तक लगभग आठ हजार से ज्यादा महिलाओं का केस सॉल्व कर चुकी हूं। वहीं, शाजिया तबस्सुम, नाजिया नफीस, डॉ. श्रुति खरे ने भी अपने विचार रखे।
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Special on Women's Day: Women should move forward holding each other's hands, then things will work out
अमर उजाला संवाद में हिस्सा लेतीं शहर की महिला शक्तियां। - फोटो : अमर उजाला।

आधी आबादी के बेबाक बोल

सपने पूरा करने के लिए परिवार का सहयोग जरूरी है। परिवार का साथ हो तो हर काम आसान होता है। महिलाएं अपने अधिकार का बेहतर तरीके से उपयोग करते हुए आगे बढ़ रही हैं। कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन वह समय के साथ समाप्त हो जाएंगी। - सुषमा शुक्ला, बाल कल्याण समिति सदस्य

महिलाओं को हमेशा आत्मनिर्भर बनने के लिए कराटे जरूर सीखना चाहिए। इससे वह अपनी सुरक्षा कर सकती हैं। अब महिलाएं बहुत कुछ कर सकती हैं। कर भी रही हैं। - प्रो. रीना सचान, माइक्रोबॉयोलोजी, विभागाध्यक्ष, एमएनलएन

महिलाओं का अपनी अहमियत खुद समझनी होगी। जब हम कीमत समझेंगे तो लोग भी हमारे विचार और निर्णयों की कद्र करेंगे। जो महिलाएं ऐसा कर पाएंगी वही समाज में खुद को स्थापित कर पाएंगी। - डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, मेडिसिन विभागाध्यक्ष, एमएलएन

लड़कियों को पहनने दो और चैन से रहने दो। साथ ही अपने घर की बेटी की तरह दूसरों को भी मानें। बेटियों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी मां की होती है। हमें खुद अपनी बेटियों का सपोर्ट करने की जरूरत है। शादी से अधिक चिंता उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए करें। -उमा दीक्षित, असिस्टेंट डायरेक्टर, प्रयाग संगीत समिति

मैं अपने पति की वजह से आगे बढ़ रही हूं। एक समय तक घर की बंदिशों में कैद थी। लेकिन, परिवार ने कहा कि आगे बढ़ो और मुखर बनो। बड़े-बड़े मंचों तक का जाने का रास्ता ससुराल ने ही दिखाया है। - नेहा सिंह, गृहिणी

अब महिलाएं ससुराल के साथ मायके को भी संभालती हैं। साथ ही नौकरी और घर व बच्चे सब एक साथ देख रही हैं। महिलाएं सशक्त हो रही हैं। देश को मजबूत करने के लिए भी अहम भूमिका निभा रही हैं। - रंजना सिंह, अधिवक्ता

हमारे लिए तो हर दिन उत्सव का दिवस है। सक्रिय होकर महिलाएं अपनी भूमिका निभाती रहें तो परिवार और समाज से सम्मान मिलता रहता है। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए खुद को निखारते रहना चाहिए। - स्वाति निरखी, गायिका

महिलाओं की स्थिति पहले से काफी सुधरी है लेकिन, अभी भी बहुत प्रयास की जरूरत है। महिलाएं को सशक्त होने के लिए एक दूसरे को सहयोग करना होगा। हम अपने सपनों को पूरा करने के साथ परिवार को भी संभाल रहे हैं। - जूही श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता

महिलाएं अब सक्षम हो गई हैं। मौका मिलता है तो घर से लेकर राजनीति के क्षेत्र तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। बस सही अवसर और परिवार का विश्वास मिलने की जरूरत है। आने वाला वक्त हमारा है। - डॉ. मंजू श्रीवास्तव, म्यूजिक, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, नेहरू ग्राम भारती मानद विश्वविद्यालय

महिलाओं को अधिकार तो मिल गया था लेकिन अब भी पुरुष और समाज के सहयोग की जरूरत है। महिलाओं को अपने अधिकार का प्रयोग सही जगह करने की आवश्यकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि हम अपना निर्णय खुद ले रहे हैं।- डॉ. अमृता चौरसिया, स्त्री रोग विभाग, विभागाध्यक्ष, एमएलएन

जहां तक साहस और हौसले की बात है तो महिलाएं हमेशा से आगे रही हैं। आज महिलाएं अंतरिक्ष मिशन से लेकर घर चलाने तक हर क्षेत्र में आगे हैं। हमें रिश्ते संभालने का सलीका और बंदूक उठाकर रखवाली करना भी आता है। - डॉ. स्नेह सुधा, केपी गर्ल्स इंटर कॉलेज, प्रवक्ता

महिलाएं वो सब कर सकती हैं जो पुरुष कर सकते हैं। कई बार उनके पास पुरुषों की तुलना में अधिक कल्पना होती है। यह साबित भी किया है। - डॉ. दीप्ति योगेश्वर, फिजियोथेरेपिस्ट

महिलाओं को पहले अपने घर के जंग से लड़कर निकलना पड़ता है। इसके बाद वह आगे बढ़ती चली जाती हैं। हर महिला की सफलता दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा होनी चाहिए। - निलेशा यादव, वन स्टॉप सेंटर, केंद्र प्रभारी

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