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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Special on Hindi Day: The whole world is illuminated by the divine light of language

हिंदी दिवस पर विशेष : भाषा की दिव्य ज्योति से ही प्रकाशमान है समस्त संसार- पिंडीवासा

Mon, 12 Sep 2022 08:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 12 Sep 2022 08:28 PM IST
सार

भाषा एक ऐसी जीवन ज्योति है जो एक व्यक्ति का दूसरे से संबंध स्थापित करती है। यदि मानव के पास भाषा जैसा अमोघ अस्त्र न होता तो मानव भी पशु पक्षियों की भांति  अपने भावों एवं विचारों को प्रकट करने में असमर्थ रहता।

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Special on Hindi Day: The whole world is illuminated by the divine light of language
भाषा। - फोटो : Istock

विस्तार

भाषा का अर्थ है बोलना या कहना अर्थात भाषा वह है, जिसे बोला जाए। भाषा अपने व्यापकतम् में वह साधन है जिसके माध्यम से हम सोचते हैं तथा विचारों और भावों को व्यक्त करते हैं। मानव विकास के साथ-साथ नदी के प्रवाह की तरह भाषा का विकास भी आवश्यक है, क्योंकि भाषा एक निरंतर प्रवाहमान वस्तु है, इसलिए परिस्थितयों संस्कृत और बदली भौगोलिक स्थित के समानांतर भाषी में भी निरंतर परिवर्तन होता रहता है। भाषा समाज की धरोहर होती है। भाषा ही व्यक्ति को समाज से जोड़ती है तथा व्यक्ति को समाज के माध्य एक प्रमुख कड़ी का काम करती है। व्यक्ति भाषा को समाज में ही रहकर सीखता है। जिन व्यक्तियों के बीच किसी बच्चे का पालन-पोषण होता है, उसी की भाषा के आधार पर उसकी भाषा का निर्माण होता है।

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भाषा एक ऐसी जीवन ज्योति है जो एक व्यक्ति का दूसरे से संबंध स्थापित करती है। यदि मानव के पास भाषा जैसा अमोघ अस्त्र न होता तो मानव भी पशु पक्षियों की भांति  अपने भावों एवं विचारों को प्रकट करने में असमर्थ रहता। भाषा को यदि मैं मानव शरीर में दैवीय अंश के रूप में कहूं तो गलत न होगा, क्योंकि इस सृष्टि में मानव मात्र को ही यह दैवीय अंश प्राप्त है।
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यह भाषा रूपी दिव्य ज्योति ही आपसी विचार विनमय के रूप में समस्त संसार में अपना प्रकाश फैलाए हुए है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि इस भाषा ज्योति के बिना संसार घोर अंधकारमय की स्थिति में होता। इस भाषा रूपी दैवीय अंश के द्वारा मानव इस संसार में सर्वोत्तम माना जाता है। भाषा व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है और इससे अधिक मूल्यवान संपत्ति उसकी और कुछ नहीं हो सकती। कल्पना करें कि यदि मानव को भाषा संपर्क से दूर रखा जाए तो क्या उसका बहुमुखी विकास हो सकता है, शायद नहीं।

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भाषा का इतिहास मानव के इतिहास से जुड़ा

भाषा का जन्म कैसे हुआ भाषा कैसे विकसित हुई, इस सब की कहानी कम रोचक नहीं है। किंतु यहां इतना ही उल्लेख करना चाहूंगा कि भाषाओं का इतिहास मानव के इतिहास से जुड़ा हुआ है। मानव जितना पुराना है, भाषा भी उतनी पुरानी हो सकती है। भाषा की विकास कथा में किसी भी समाज का सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनितिक प्रतिबिब झलकता है। मनुष्य सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर उसे अन्य व्यक्तियों से विचार-विनिमय करना पड़ता है। विचार-विनिमय के माध्यम में भाषा सबसे प्रमुख घटक है।


भाषा विचारों की पोषक होती हैं। भाषा के बिना विचार अस्तित्वहीन होता है। भाषा और विचार का अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। एक के अभाव में दूसरे की कल्पना व्यर्थ है। विचारों के अभाव में भाषा का कोई महत्व नहीं होता और भाषा के अभाव में विचारों का भी कोई महत्व नहीं रह जाता। एमर्सन ने भाषा के महत्व पर लिखा है - भाषा एक नगर है जिसके निर्माण में प्रत्येक मानव एक पत्थर लाया है। भाषा संस्कृति की देन तो है ही साथ ही वह केवल संस्कृति की रक्षा ही नहीं करती, अपितु उसे अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित भी करती है। भाषा अपने विचार प्रकट करने तथा दूसरे के विचार सुनने का एक मात्र साधन है। भाषा का प्रयोग हम आवश्यकतानुसार कभी बोलकर करते हैं और कभी सिखकर। भाषा का बोला गया रूप मौखिक और लिखा गया रूप लिखित कहलाता है। भाषा के विशेष ज्ञान के लिए उस भाषा का व्याकरण जानना आवश्यक होता है। 

संसार में लगभग 12 भाषा परिवार

भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन भाषा-विज्ञान है। वैज्ञानिक अध्ययन से तात्पर्य भाषा के बाहरी और भीतरी रूप एवं  विकास आदि का सम्यक अध्ययन है। इसी प्रकार भाषा के दो आधार हैं, एक मानिसक दूसरा भौतिक। मानसिक आधार भाषा की आत्मा है तो भौतिक आधार उसका शरीर। भाषा का भवन इसी पर खड़ा है। भाषा वैज्ञानिको ने एक भाषा से निकली और विकसित हुई। भाषाओं को एक परिवार माना है। इस प्रकार भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से संसार में लगभग 12 भाषा परिवार है। गणना करने वालों के अनुसार विश्व में लगभग 5000 भाषाएं और भारत में लगभग 1653 भाषाएं हैं।


विश्व में जितनी भी भाषाएं बोली जाती हैं, उसमें से मात्र 92 भाषाएं साहित्यिक महत्व की मानी जाती हैं। यदि बोलने वालों की संख्या की दृष्टि से देखें तो सारे संसार में पहला स्थान चीनी भाषा का दूसरा अंग्रेजी का और तीसरा हिंदी का है। हिंदी भाषा का प्रचलन भारत, नेपाल, मलयेशिया, इंडोनेशिया, सूरीनाम, फिजी, गुयाना, मारीशस, त्रिनिडाड आदि लगभग 50 देशों में हैं। 

भाषा ही कराती है मानवीय मूल्यों का बोध

भाषा और आदत का भी घनिष्ठ संबंध है। कहावत है आदत दूसरा स्वभाव बन जाती है। भाषा के बिना मनुष्य सर्वथा अपूर्ण है और अपने इतिहास तथा परंपरा से विछिन्न है। परस्पर विचारों का आदान प्रदान पहले कभी इशारों, चिन्हों और जानी पहचानी ध्वनियों से किया जाता था, लेकिन भाषा यानि ध्वनि संकेत की वह पद्धति है जिसके द्वारा मानव परस्पर विचारों का आदान प्रदान करता है। भाषा एक पद्धति है, सुव्यवस्थित योजना का संगठन है, जिससे कर्ता, कर्म, क्रिया व्यवस्थित रूप में आ सकें और व्याकरण के आधार पर लिखने या बोलने में जिसका बोध हो सके। बोली भाषा की छोटी इकाई है। किसी ने ठीक ही कहा है- भाषा की लहरों में जीवन की हलचल में। ध्वनि में क्रिया भरी है और क्रिया में बल है।।


भाषा का आयाम बहुत विस्तृत है तथा यह अभ्यास की वस्तु है। भाषा का सवाल सिर्फ माध्यम का सवाल नहीं है, बल्कि संस्कृति का सवाल है। भाषा से ही संस्कृति है और संस्कृति से ही राष्ट्र बनता है। आचार्य नरेंद्र देव का कथन है- संस्कृति चिंतना की खेती है। भाषा ही मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक आर्थिक का सक्रिय बोध कराती है। भाषा हमारे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास का कार्य करती है। नि:संकोच यह कह सकते हैं कि भाषा विकास का भी फल है और बीज भी। भाषा समाज के बीच एक पुल का काम करती है, इसलिए वह व्यक्ति को समाज से जोड़ती है, तोड़ती नहीं। - पं. रामनरेश तिवारी, पिंडीवासा, नगर प्रधान, केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद।

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