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कैलाशानंद गिरि से विशेष बातचीत : सारी दुनिया एक दिन सनातनी होगी...इसका समय आ चुका है

Sat, 18 Jan 2025 05:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Jan 2025 05:17 AM IST
सार

एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स को महाकुंभ में दीक्षा देकर और अमृत स्नान पर्व पर एक माॅडल को अपने शाही रथ पर बैठाकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आए पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने नवीन सिंह पटेल से विशेष बातचीत की। आगे है बातचीत के प्रमुख अंश....

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Special Interview with Kailashanand Giri: One day the whole world will be Sanatani...its time has come
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स को महाकुंभ में दीक्षा देकर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि आजकल अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। मेला क्षेत्र के सेक्टर नौ में केदारनाथ मंदिर की आकृति के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही उनकी वैभवशाली दुनिया से राब्ता होने लगता है। करीब तीन सौ मीटर अंदर आचार्य के कक्ष से पहले सुंदर बागवानी है। इसके दाएं-बाएं सुविधा संपन्न गंगा और यमुना कॉटेज में देश-विदेश के श्रद्धालु ठहरे हैं। यहां से गुजरते वक्त एक कक्ष से अंग्रेजी में हाउस कीपिंग की पुकार सुनाई देती है।

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कक्ष के बाहर साधु-संतों से लेकर श्रद्धालु तक बुलावे के इंतजार में खड़े हैं। अंदर काफी भीड़ है। अशोक की लाट के नीचे 'सत्यमेव जयते' लिखे आसन पर बैठे आचार्य से मुखातिब पंजाब से आए पंच प्यारों के मुखिया कहते हैं, पांच करोड़ लोगों को शस्त्र से लैस करना है। आचार्य प्रतिवाद करते हैं, अब संतों को इसकी क्या जरूरत। तर्क होता है, अशोक ने शस्त्र ही तो रख दिए थे, तभी मुगलों ने शासन किया। गुरुजी (गोविंद सिंहजी) भी रख देते तो क्या हाल होता?
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तभी, आचार्य की निगाह कृपाण की जगह बंदूक थामे एक प्यारे पर पड़ती है। वह मुस्कुरा कर कहते हैं, यह बढ़िया है! पांच मिनट अलग कमरे में गुफ्तगू हुई और फिर इनका सम्मान। आशीष की चाह में भक्तों की कतार है कि टूटती ही नहीं। बीच-बीच में प्रसाद का लड्डू बंटता है। बगल के आसन में विराजे दूसरे महात्मा को गाय का दूध बढ़ाते हुए आचार्य बताते हैं, हम बाद में दाखिल हुए, गायें पहले लाए। रोज 40 लीटर दूध की व्यवस्था है यहां। 

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Special Interview with Kailashanand Giri: One day the whole world will be Sanatani...its time has come
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि। - फोटो : अमर उजाला।

प्रथम अमृत स्नान के दौरान आपका एक पूर्व टीवी एंकर को रथ पर लेकर पहुंचना कई संतों को चुभ गया!
 

कुंभ की परंपरा से लोग प्रभावित होते हैं। देखना चाहते हैं कि यह है क्या। मगर, संन्यास का मार्ग बहुत कठिन है। इसमें बड़ा समय लगता है, बहुत तपना पड़ता है। हर्षा रिछारिया ने अभी संन्यास की दीक्षा नहीं ली है। सामान्य दीक्षा है उसको। अगर वह परिवर्तन में आ रही है तो अच्छी बात है।

 

टीवी सेलेब्रेटी के कारण ज्यादा अहमियत दे दी?
 

अरे नहीं... मैं इन चीजों पर बहुत ध्यान नहीं रखता। न जाने कितने लोग आते हैं। कौन कितना बड़ा-छोटा है, किस-किस का ध्यान रख पाएंगे।

 

आपने तो स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन को भी जोड़ लिया!

वह आश्रम की बेटी है। सबसे सरल, सहज महिलाओं में से एक। कुंभ में तो अभी आई, लेकिन मैं उसे डेढ़ वर्ष से देख रहा हूं। उसे नाम दिया, गोत्र दिया। परम सात्विक है। चार दिन हमारी कुटिया में रही। कभी कोई इच्छा प्रकट नहीं की। न कुछ खाने की, न कहीं जाने की। उसके हजारों सवाल जरूर थे।

Special Interview with Kailashanand Giri: One day the whole world will be Sanatani...its time has come
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि। - फोटो : अमर उजाला।

कैसे सवाल?
 

जैसे पुण्य क्या है, परंपरा क्या है, जो आपने दीक्षा दी है वह क्या है, गोत्र क्या है...। हर चीज पर सवाल दर सवाल..।
 

पॉबेला फिर आएंगी कुंभ में?
 

अब तो नहीं आएगी। अभी तो अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने गई है। कुंभ बाद हरिद्वार आश्रम में आएगी। हमारी दिनचर्या देखेगी।

 

 

संतों में समाज सादगी का भाव देखता है। लेकिन, इतना लाव-लश्कर क्यों?

हम किसी मोह में नहीं बंधे। यह गंगा की रेती पर बना है। इसे यहीं छोड़ जाना है। साधु अगर मोह से बंधा होता तो स्थायी निर्माण करा लेता, होटल या धर्मशाला बनवा लेता। हमारे पास तो कुछ है नहीं। जो है, सब भक्तों का है। वही एक करोड़ लोगों को भोजन कराएंगे। हम तो बस गइया लेकर आए हैं।

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पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि। - फोटो : अमर उजाला।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हिंदू समाज से जाति को ही खत्म कर देंगे तो बचेगा क्या। आपका क्या मत है?
 

सनातन धर्म एक है। नारायण के शरीर से सब पैदा हुए हैं। कर्म के आधार पर इसकी पैदाइश अलग-अलग हिस्सों से हुई है। 14 जनवरी को जब शाही स्नान के लिए हमारी सवारी निकली तो लाखों लोग खड़े थे। यहां कोई जात-पांत नहीं थी। सनातन में जाति विभाजन हो सकता है, कर्म या कर्तव्य विभाजन हो सकता है, पर उद्देश्य एक है। इसके आगे क्या बांटेंगे, यह तो नारायण ने ही यह बंटवारा किया है। मानवीय भेद नहीं है।

 

...पर समाज में यह खूब दिखता है

 

मेरा मानना है कि मानवीय भेद से ही भारतीय परंपरा कमजोर पड़ती दिख रही है। लेकिन, सनातन की हम बात करें तो हम सब एक हैं, एक रहना चाहिए। मेरा मानना है कि सारी दुनिया एक दिन सनातनी होगी। इसका समय आ चुका है। रामराज्य की तरह...।


जिन विदेशियों को दीक्षा दी गई, क्या वह सनातनी हो गए?
 

तुरंत तो नहीं हो गए। इसमें समय लगेगा। लेकिन, आदमी ने एक बार यह मार्ग चुन लिया तो सनातन की परिक्रमा करने लगेगा। फिर उसे दूसरे में आनंद नहीं आएगा। जैसे पॉवेला जॉब्स खिंची चली आई, उसी तरह दूसरे भी चले आएंगे।

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