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डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य भर्ती के खिलाफ स्पेशल अपील खारिज
Thu, 15 Oct 2020 01:37 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2020 01:37 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की भर्ती 2018 रेग्युलेशन के आधार पर करने के खिलाफ विशेष अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज द्वारा 2010 के रेग्यूलेशन से की जा रही भर्ती को वैध करार देने के एकलपीठ के आदेश को सही ठहराया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने डा. हेम प्रकाश व तीन अन्य की विशेष अपील पर दिया है।
आयोग ने दो मार्च 19 को प्राचार्य भर्ती का विज्ञापन निकाला था। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जून 19 थी। आयोग द्वारा यह भर्तियां यूजीसी के 2010 के परिनियम के तहत की जा रही हैं। 29 अक्तूबर 20 को इसकी परीक्षा होनी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2018 में परिनियम में संशोधन किया है। जिसे राज्य सरकार ने 28 जून 19 को लागू किया है।
याची का कहना था कि प्राचार्य भर्ती नए संशोधित नियम 2018 से की जानी चाहिए। एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि 2018 का संशोधन लागू होने से पहले आवेदन जमा करने की तिथि समाप्त हो चुकी थी। इसलिए 2010 के नियम से भर्ती करना सही है। जिसे अपील में चुनौती दी गईग् थी। खंडपीठ ने कहा कि खेल के बीच में खेल के नियम नहीं बदले जा सकते। इसलिए भर्ती के समय लागू नियम से ही चयन किया जाना सही है। कोर्ट के इस आदेश से डिग्री कालेजों के प्राचार्यों के चयन का रास्ता साफ हो गया है।
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आयोग ने दो मार्च 19 को प्राचार्य भर्ती का विज्ञापन निकाला था। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जून 19 थी। आयोग द्वारा यह भर्तियां यूजीसी के 2010 के परिनियम के तहत की जा रही हैं। 29 अक्तूबर 20 को इसकी परीक्षा होनी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2018 में परिनियम में संशोधन किया है। जिसे राज्य सरकार ने 28 जून 19 को लागू किया है।
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याची का कहना था कि प्राचार्य भर्ती नए संशोधित नियम 2018 से की जानी चाहिए। एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि 2018 का संशोधन लागू होने से पहले आवेदन जमा करने की तिथि समाप्त हो चुकी थी। इसलिए 2010 के नियम से भर्ती करना सही है। जिसे अपील में चुनौती दी गईग् थी। खंडपीठ ने कहा कि खेल के बीच में खेल के नियम नहीं बदले जा सकते। इसलिए भर्ती के समय लागू नियम से ही चयन किया जाना सही है। कोर्ट के इस आदेश से डिग्री कालेजों के प्राचार्यों के चयन का रास्ता साफ हो गया है।
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