फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   So tickled with humor satire on Notbandi

हास्य से गुदगुदाया तो नोटबंदी पर कटाक्ष

Mon, 05 Dec 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 05 Dec 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
So tickled with humor satire on Notbandi
इलाहाबाद - फोटो : allahabad
पद्मश्री और वरिष्ठ समीक्षक, कवि अशोक चक्रधर ने सांस्कृतिक केंद्र में ‘इलाहाबाद सांस्कृतिक पर्व 2016’ में हास्य-व्यंग की कविताओं से लोगों को खूब गुदगुदाया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल कविता के मर्म को बताया, बल्कि मौजूदा राजनीति पर भी तंज कसे। नोटबंदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कवि होने के नाते वह समाज के उस अंतिम व्यक्ति के साथ खड़े हैं, जो निरीह, जरूरतमंद और शोषित है। उन्होंने ‘दिन के उजेरे में न करो ऐसा कोई काम, नींद न आए रात के अंधेरे में’ कविता की लाइन बोलकर सत्ता को भी सचेत किया। कहा, आज लोग सुखद भविष्य की आशा में लाइन में भी खड़े होकर भी कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन विडंबना है कि ऐसे लोगों के लिए बोलने वालों को देशद्रोही करार दिया जा रहा है। 
विज्ञापन


कवि डॉ. श्लेष गौतम के साथ ‘कविता की वाचिक परंपरा और हास्य व्यंग कविताओं की स्वीकार्यता और लोकप्रियता’ पर भी उन्होंने विचार साझा किए। कवि अशोक चक्रधर ने कहा कि साहित्य का धर्म है कि  वह भूत से सबक लेते हुए भविष्य के प्रति सचेत करते हुए वर्तमान को भी ध्यान में रखे। कविता का भी यही धर्म है। उन्होंने कविता की शास्त्रीय परंपराओं पर चर्चा करते हुए अज्ञेय, हरिवंश राय बच्चन, मुक्तिबोध जैसे कवियों के कविताओं की दो-चार लाइनें सुनाईं।

विज्ञापन


इससे पूर्व संचारी द्वारा आयोजित ‘इलाहाबाद सांस्कृतिक पर्व 2016’ के तीसरे और अंतिम दिन कई कार्यक्रम हुए। निर्देशक मुजफ्फर अली के साथ प्रो. अली अहमद फातमी और प्रो. ललित जोशी ने समाज, साहित्य और सिनेमा का संदर्भ लेते हुए चर्चा की। धर्म, अध्यात्म और समाज के अंतर संबंधों पर मुजफ्फर अली ने कहा की धर्म की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। बस जरूरी ये है की हम किसी विषय या संदर्भ को कितना गहरे और भीतर तक जान पाते हैं। उन्होंने ‘उमरावजान’ और ‘गमन’ फिल्म से जुड़े अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि ‘उमरावजान’ बनाने से पहले उन्होंने दिन रात उपन्यास को पढ़ा। लेखक नीरज श्रीवास्तव की पुस्तक ‘ड्रेगर्स ऑफ ट्रीजन’ का विमोचन मुजफ्फर अली और अशोक चक्रधर ने रंजीत घई की पुस्तक ‘मेरी आरजू’ का भी विमोचन किया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन


प्रो. नीलम शरण गौर और रशीद कमाल ने ‘इलाहाबाद के भूत प्रेत और जीन’ विषय पर चर्चा की। रशीद कमाल ने चुडै़लों से जुड़ी कहानियां लोगों को सुनाईं। रिचर्ड और साइकिल चलने वाले भूत का विशेषरूप से जिक्र किया। कवि यश मालवीय ने भी काव्य पाठ किया। सुबह हेरीटेज वॉक आसिफ खान के नेतृत्व में चौक घंटाघर से निकाली गई। हेरीटेज वॉक विभिन्न रास्तों से होते हुए यादगारे हुसैनी इंटर कॉलेज में खत्म हुई। जहां अकबर इलाहाबादी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन पल्लवी चंदेल, स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन समीना नकवी ने किया। सांस्कृतिक पर्व पर में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ,  पंकज नकवी व अभिनव उपाध्याय समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed