हास्य से गुदगुदाया तो नोटबंदी पर कटाक्ष
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कवि डॉ. श्लेष गौतम के साथ ‘कविता की वाचिक परंपरा और हास्य व्यंग कविताओं की स्वीकार्यता और लोकप्रियता’ पर भी उन्होंने विचार साझा किए। कवि अशोक चक्रधर ने कहा कि साहित्य का धर्म है कि वह भूत से सबक लेते हुए भविष्य के प्रति सचेत करते हुए वर्तमान को भी ध्यान में रखे। कविता का भी यही धर्म है। उन्होंने कविता की शास्त्रीय परंपराओं पर चर्चा करते हुए अज्ञेय, हरिवंश राय बच्चन, मुक्तिबोध जैसे कवियों के कविताओं की दो-चार लाइनें सुनाईं।
इससे पूर्व संचारी द्वारा आयोजित ‘इलाहाबाद सांस्कृतिक पर्व 2016’ के तीसरे और अंतिम दिन कई कार्यक्रम हुए। निर्देशक मुजफ्फर अली के साथ प्रो. अली अहमद फातमी और प्रो. ललित जोशी ने समाज, साहित्य और सिनेमा का संदर्भ लेते हुए चर्चा की। धर्म, अध्यात्म और समाज के अंतर संबंधों पर मुजफ्फर अली ने कहा की धर्म की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। बस जरूरी ये है की हम किसी विषय या संदर्भ को कितना गहरे और भीतर तक जान पाते हैं। उन्होंने ‘उमरावजान’ और ‘गमन’ फिल्म से जुड़े अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि ‘उमरावजान’ बनाने से पहले उन्होंने दिन रात उपन्यास को पढ़ा। लेखक नीरज श्रीवास्तव की पुस्तक ‘ड्रेगर्स ऑफ ट्रीजन’ का विमोचन मुजफ्फर अली और अशोक चक्रधर ने रंजीत घई की पुस्तक ‘मेरी आरजू’ का भी विमोचन किया गया।
प्रो. नीलम शरण गौर और रशीद कमाल ने ‘इलाहाबाद के भूत प्रेत और जीन’ विषय पर चर्चा की। रशीद कमाल ने चुडै़लों से जुड़ी कहानियां लोगों को सुनाईं। रिचर्ड और साइकिल चलने वाले भूत का विशेषरूप से जिक्र किया। कवि यश मालवीय ने भी काव्य पाठ किया। सुबह हेरीटेज वॉक आसिफ खान के नेतृत्व में चौक घंटाघर से निकाली गई। हेरीटेज वॉक विभिन्न रास्तों से होते हुए यादगारे हुसैनी इंटर कॉलेज में खत्म हुई। जहां अकबर इलाहाबादी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन पल्लवी चंदेल, स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन समीना नकवी ने किया। सांस्कृतिक पर्व पर में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पंकज नकवी व अभिनव उपाध्याय समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।