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एसएमए काजमी के जनाजे में शामिल लोग
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 27 Nov 2014 02:42 AM IST
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इलाहाबाद। पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काज़मी को बुधवार सुबह तुलसीपुर रसूलपुर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया गया। इससे पूर्व नुरूल्ला रोड बैरियर तिराहा पर जनाजे की नमाज अदा की गई। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इसमें हाईकोर्ट के न्यायाधीशगण, प्रदेश सरकार के मंत्री, बुद्धिजीवी, तमाम राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता के अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता तथा आम लोग मौजूद थे। लोगों ने नम आंखों से काजमी को अंतिम विदाई दी। जनाजे को कंधा देने की लोगों मेें होड़ लगी रही। बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनके घर पहुंचे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
रसूलपुर कब्रिस्तान के लिए उनका जनाजा लूकरगंज स्थित आवास से सुबह करीब नौ बजे उठाया गया। इससे पूर्व जनाजे को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। तमाम नेताओं और अन्य लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। नुरूल्ला रोड तिराहा पर पहुंचकर लोगों ने जनाजे की नमाज अदा की फिर वहां से जनाजे को रसूलपुर कब्रिस्तान ले जाया गया। वहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उनको सुपुर्दे खाक किया गया। कैबिनेट मंत्री आजम खां, अंबिका सोनी, रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया, महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह, पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्र, पूर्व सांसद अतीक अहमद, अशरफ जमाल, कांग्रेस नेता रीता जोशी, शेखर बहुगुणा के अलावा प्रो. अली अहमद फातमी, डॉ. मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरन जैन, रिजवान अली अख्तर, हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय, महासचिव सीपी उपाध्याय सहित शहर की तमाम जानी मानी हस्तियां, शायर और साहित्यकार शामिल हुए। अंतिम विदाई के वक्त श्री काज़मी के जूनियर और तमाम रिश्तेदार आपस में लिपटकर रोते देखे गए। यह मंजर देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी काज़मी के घर पहुंचकर उनके शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने दिलासा दी कि दुख की इस घड़ी वह और समाजवादी पार्टी उनके परिवार केसाथ है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि काज़मी जैसे योग्य अधिवक्ता का इस प्रकार से अचानक चले जाना उनके परिवार के लिए बड़ा सदमा है। वह समाजवादी पार्टी से लंबे समय से जुड़े रहे हैं उनके निधन से पार्टी और मुझे बेहद दुख पहुंचा है। काज़मी न सिर्फ एक काबिल वकील थे बल्कि बड़े विद्वान थे और हर क्षेत्र में उनकी दखल थी। उनका निधन अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री दिन में करीब 12 बजे काजमी के आवास पर पहुंचे और करीब 20 मिनट तक परिवार के साथ रहे। उन्होंने काजमी की पत्नी, बेटे और बेटियों से बात की तथा उनको दिलासा दी। इस मौके पर राजा भइया, पूर्व सांसद अतीक अहमद, परवेज टंकी आदि भी साथ थे।
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पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काज़मी के निधन पर एक अधिवक्ता द्वारा पढ़ी गई यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं कि ‘आसमां भर गया परिंदों से, दरख्त हरा कोई टूटा होगा’। उनके निधन से हर कोई गमगीन है। अधिवक्ता संगठनों के अलावा अन्य तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी शोक सभाओं का आयोजन कर काजमी को श्रद्धांजलि दी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता राकेश पांडेय ने की तथा संचालन सीपी उपाध्याय ने किया। अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। शोक सभा में राजेश कुमार, शिव सिंह, एलडी राजभर, सुनीता जैन, एके ओझा, संजय त्रिपाठी, अभिषेक चौहान, राहुल कुमार पांडेय, उत्तरा शर्मा, राजीव शुक्ला सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य और अधिवक्ता मौजूद थे। अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्र, हीरालाल यादव, शैलेंद्र द्विवेदी, बृजेश ओझा, अल्पसंख्यक अधिवक्ता एसोसिएशन के जावेद आलम, लियाकत अली, फहीम अहमद, वॉयस ऑफ लॉ एंड जस्टिस के अनूप बरनवाल, धर्मपाल सिंह, अशोक मेहता, एमए कदीर, डीआर चौधरी, डीके तिवारी आदि ने शोक सभा का आयोजन कर श्रद्धांजलि दी।
जिला अधिवक्ता संघ द्वारा फुलकोर्ट रेफरेंस और शोकसभा का आयोजन अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र की अगुवाई में किया गया। सभा में अधिवक्ता जगदीश त्रिपाठी ने उपरोक्त पंक्तियां पढ़ कर सभी को द्रवित कर दिया। मंत्री देवेंद्र मिश्र ने संचालन किया। सभा में श्री काज़मी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। शोक सभा में एडीजे विकार अहमद अंसारी के अलावा अन्य न्यायाधीश गण तथा अधिवक्ता जगतपाल सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, केबी तिवारी, वीके राय आदि मौजूद थे। डीआरटी बार एसोसिएशन के कुशलकांत, केके तिवारी, पवन मिश्रा, हरीश मेहरोत्रा, संदीप अरोड़ा आदि शामिल थे। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश केपूर्व अध्यक्ष अजय शुक्ल ने निधन पर शोक व्यक्त किया है।
एसएमए काज़मी के पिता मो. सलीम की लिखी कविता आज सही बैठती है। इस कविता का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रिजवान अली अख्तर ने बताया कि उनके पिता की लिखी कविता ‘काल कुचाल तेरी गति न्यारी, जो कोई जाने थोड़ा है, बालक, वृद्ध, युवा, अवतारी किसको तूने छोड़ा है’ रिजवान बताते हैं कि वह अक्सर अपने पिता की लिखी यह कविता पढ़ा कर लोगों को सुनाया करते थे कि जीवन कितना क्षण भंगुर है और काल के आगे हम सब कितने विवश हैं।
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रसूलपुर कब्रिस्तान के लिए उनका जनाजा लूकरगंज स्थित आवास से सुबह करीब नौ बजे उठाया गया। इससे पूर्व जनाजे को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। तमाम नेताओं और अन्य लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। नुरूल्ला रोड तिराहा पर पहुंचकर लोगों ने जनाजे की नमाज अदा की फिर वहां से जनाजे को रसूलपुर कब्रिस्तान ले जाया गया। वहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उनको सुपुर्दे खाक किया गया। कैबिनेट मंत्री आजम खां, अंबिका सोनी, रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया, महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह, पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्र, पूर्व सांसद अतीक अहमद, अशरफ जमाल, कांग्रेस नेता रीता जोशी, शेखर बहुगुणा के अलावा प्रो. अली अहमद फातमी, डॉ. मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरन जैन, रिजवान अली अख्तर, हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय, महासचिव सीपी उपाध्याय सहित शहर की तमाम जानी मानी हस्तियां, शायर और साहित्यकार शामिल हुए। अंतिम विदाई के वक्त श्री काज़मी के जूनियर और तमाम रिश्तेदार आपस में लिपटकर रोते देखे गए। यह मंजर देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी काज़मी के घर पहुंचकर उनके शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने दिलासा दी कि दुख की इस घड़ी वह और समाजवादी पार्टी उनके परिवार केसाथ है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि काज़मी जैसे योग्य अधिवक्ता का इस प्रकार से अचानक चले जाना उनके परिवार के लिए बड़ा सदमा है। वह समाजवादी पार्टी से लंबे समय से जुड़े रहे हैं उनके निधन से पार्टी और मुझे बेहद दुख पहुंचा है। काज़मी न सिर्फ एक काबिल वकील थे बल्कि बड़े विद्वान थे और हर क्षेत्र में उनकी दखल थी। उनका निधन अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री दिन में करीब 12 बजे काजमी के आवास पर पहुंचे और करीब 20 मिनट तक परिवार के साथ रहे। उन्होंने काजमी की पत्नी, बेटे और बेटियों से बात की तथा उनको दिलासा दी। इस मौके पर राजा भइया, पूर्व सांसद अतीक अहमद, परवेज टंकी आदि भी साथ थे।
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पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काज़मी के निधन पर एक अधिवक्ता द्वारा पढ़ी गई यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं कि ‘आसमां भर गया परिंदों से, दरख्त हरा कोई टूटा होगा’। उनके निधन से हर कोई गमगीन है। अधिवक्ता संगठनों के अलावा अन्य तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी शोक सभाओं का आयोजन कर काजमी को श्रद्धांजलि दी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता राकेश पांडेय ने की तथा संचालन सीपी उपाध्याय ने किया। अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। शोक सभा में राजेश कुमार, शिव सिंह, एलडी राजभर, सुनीता जैन, एके ओझा, संजय त्रिपाठी, अभिषेक चौहान, राहुल कुमार पांडेय, उत्तरा शर्मा, राजीव शुक्ला सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य और अधिवक्ता मौजूद थे। अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्र, हीरालाल यादव, शैलेंद्र द्विवेदी, बृजेश ओझा, अल्पसंख्यक अधिवक्ता एसोसिएशन के जावेद आलम, लियाकत अली, फहीम अहमद, वॉयस ऑफ लॉ एंड जस्टिस के अनूप बरनवाल, धर्मपाल सिंह, अशोक मेहता, एमए कदीर, डीआर चौधरी, डीके तिवारी आदि ने शोक सभा का आयोजन कर श्रद्धांजलि दी।
जिला अधिवक्ता संघ द्वारा फुलकोर्ट रेफरेंस और शोकसभा का आयोजन अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र की अगुवाई में किया गया। सभा में अधिवक्ता जगदीश त्रिपाठी ने उपरोक्त पंक्तियां पढ़ कर सभी को द्रवित कर दिया। मंत्री देवेंद्र मिश्र ने संचालन किया। सभा में श्री काज़मी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। शोक सभा में एडीजे विकार अहमद अंसारी के अलावा अन्य न्यायाधीश गण तथा अधिवक्ता जगतपाल सिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, केबी तिवारी, वीके राय आदि मौजूद थे। डीआरटी बार एसोसिएशन के कुशलकांत, केके तिवारी, पवन मिश्रा, हरीश मेहरोत्रा, संदीप अरोड़ा आदि शामिल थे। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश केपूर्व अध्यक्ष अजय शुक्ल ने निधन पर शोक व्यक्त किया है।
एसएमए काज़मी के पिता मो. सलीम की लिखी कविता आज सही बैठती है। इस कविता का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रिजवान अली अख्तर ने बताया कि उनके पिता की लिखी कविता ‘काल कुचाल तेरी गति न्यारी, जो कोई जाने थोड़ा है, बालक, वृद्ध, युवा, अवतारी किसको तूने छोड़ा है’ रिजवान बताते हैं कि वह अक्सर अपने पिता की लिखी यह कविता पढ़ा कर लोगों को सुनाया करते थे कि जीवन कितना क्षण भंगुर है और काल के आगे हम सब कितने विवश हैं।