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‘साहब! जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं होता, हमें छुट्टी नहीं चाहिए’, महिला सिपाहियों ने नहीं लिया मातृत्व अवकाश
Wed, 06 May 2020 12:26 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 06 May 2020 12:26 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
‘अरे नहीं साहब! हमे छुट्टी नहीं चाहिए, हमारे बच्चों का क्या है, उन्हें तो परिवार वाले पाल लेंगे, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में अगर हमने अपनी ईमानदारी से ड्यूटी की तो कई और बच्चों के मां-बाप की जान बचा सकते हैं। जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं हो जाता, हम छुट्टी नहीं लेंगे।’ यह वाक्य ऐसी दो महिला आरक्षियों का है, जो अभी चार से छह महीने के बीच में मां बनी हैं और दोनों चाइल्ड मेडिकल लीव की हकदार हैं, लेकिन इन दोनों महिला आरक्षियों ने छुट्टी लेकर बच्चों की देखभाल करने के बजाए ड्यूटी की प्राथमिकता दी है, जिसकी सभी प्रशंसा कर रहे हैं।
घूरपुर थाने में तैनात महिला आरक्षी रंजू यादव मूलत: चंदौली जनपद के सकलडिहा थानांतर्गत नोनार गांव निवासी हैं। रंजू यादव के पति शिक्षक हैं। चार महीने पहले रंजू को एक बेटी हुई। इन्हीं के साथ महिला आरक्षी सरोज मौर्या भी चंदौली जनपद के ही चकिया गायघाट की रहने वाली हैं। उन्होंने छह महीने पहले बेटे को जन्म दिया था। पहले तो दोनों महिला आरक्षियों ने अपने बच्चों को अपने साथ रखा लेकिन 24-24 घंटे की लगातार ड्यूटी की वजह से वह दोनों अपने-अपने बच्चों से नहीं मिल पाती थीं। जिसकी वजह से दोनों महिला आरक्षियों ने अपने बच्चों को अपने घर चंदौली भेज दिया और खुद ड्यूटी कर रही हैं। उनका कहना है कि जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं हो जाता, तब तक वह छुट्टी नहीं लेंगी।
महिला सिपाहियों ने एक मिशाल पेश की है। पूरा स्टाफ कोरोना वायरस की इस लड़ाई में खुद की और परिवार की परवाह किए बगैर ड्यूटी कर रहा है। यह हमारे लिए फक्र की बात है। इससे सीख लेने की जरूरत है।
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आईपीएस अनिल यादव, प्रभारी निरीक्षक, घूरपुर
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घूरपुर थाने में तैनात महिला आरक्षी रंजू यादव मूलत: चंदौली जनपद के सकलडिहा थानांतर्गत नोनार गांव निवासी हैं। रंजू यादव के पति शिक्षक हैं। चार महीने पहले रंजू को एक बेटी हुई। इन्हीं के साथ महिला आरक्षी सरोज मौर्या भी चंदौली जनपद के ही चकिया गायघाट की रहने वाली हैं। उन्होंने छह महीने पहले बेटे को जन्म दिया था। पहले तो दोनों महिला आरक्षियों ने अपने बच्चों को अपने साथ रखा लेकिन 24-24 घंटे की लगातार ड्यूटी की वजह से वह दोनों अपने-अपने बच्चों से नहीं मिल पाती थीं। जिसकी वजह से दोनों महिला आरक्षियों ने अपने बच्चों को अपने घर चंदौली भेज दिया और खुद ड्यूटी कर रही हैं। उनका कहना है कि जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं हो जाता, तब तक वह छुट्टी नहीं लेंगी।
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महिला सिपाहियों ने एक मिशाल पेश की है। पूरा स्टाफ कोरोना वायरस की इस लड़ाई में खुद की और परिवार की परवाह किए बगैर ड्यूटी कर रहा है। यह हमारे लिए फक्र की बात है। इससे सीख लेने की जरूरत है।
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आईपीएस अनिल यादव, प्रभारी निरीक्षक, घूरपुर