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siddharth shukla : कुंभ पर फिल्म बनाने की सिद्धार्थ शुक्ला की इच्छा रह गई अधूरी
Thu, 02 Sep 2021 07:29 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 02 Sep 2021 07:29 PM IST
सार
अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के निधन से संगमनगरी में उनके चाहने वाले प्रशंसक और कलाकार बेहद दुखी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम बताते हैं कि सिद्धार्थ शुक्ला कुंभ पर एक फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
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सिद्धार्थ शुक्ला
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम बताते हैं कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम में कुछ साल पहले सिद्धार्थ से उनकी मुलाकात हुई थी। सिद्धार्थ धार्मिक स्वभाव के थे, उन्हें कुंभ का वैभव बहुत पसंद आता था। मुझसे बोले थे कि 'महाराज जी ईश्वर की कृपा होगी तो कुंभ पर बड़ी फिल्म बनाऊंगा, लेकिन वो आस अधूरी रह गई। उन्हें 2019 कुंभ में प्रयागराज आना था, परंतु शूटिंग की व्यस्तता के चलते नहीं आ पाए।
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अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ल के निधन से मुंबई ही नहींं संगमनगरी में भी शोक की लहर है। रंगमंच से जुड़े लोगों ने उनके असमय निधन पर दु:ख व्यक्त किया है, क्योंकि इस शहर से उनका आत्मीय नाता था। सिद्धार्थ का जन्म भले मुंबई में हुआ था, लेकिन उनका जुड़ाव प्रयागराज से हमेशा रहा।
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अभिनेता बनकर काफी शोहरत हासिल करने वाले सिद्धार्थ के पिता अशोक शुक्ल आरबीआइ में सिविल इंजीनियर थे, वो अल्लापुर मोहल्ले में रहते थे। स्थानांतरण होने के बाद अशोक ने 1976-77 में शहर छोड़ दिया। वो मुंबई जाकर बस गए थे। सिद्धार्थ शुक्ला का जन्म मुंबई में ही हुआ था। वहीं उन्होंने स्कूल और कालेज से शिक्षा ग्रहण की थी। सिद्धार्थ 2007 के अर्द्ध कुंभ में कुछ मित्रों के साथ प्रयागराज आए थे। संगम स्नान के साथ बड़े हनुमान जी का दर्शन किया था।
साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले बाबा अभय अवस्थी बताते हैं कि सिद्धार्थ के पिता कुछ साल प्रयागराज में रहे हैं। प्रयागराज के अलावा कानपुर में भी उनका परिवार रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रवीण शेखर कहते हैं कि सिद्धार्थ का असमय निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, वो युवा रंगकर्मियों के रोल माडल थे। बताते हैं कि उनका प्रयागराज तो कम आना हुआ लेकिन यहां से कोई मुंबई जाता था तो उससे पूरी आत्मीयता से मिलते थे। निर्देशक सुदीपा मित्रा कहती हैं कि बिग बास, बालिका वधु सहित तमाम धारावाहिकों में सिद्धार्थ का काम लोगों के दिल को छूने वाला था, घर-घर में उनके चाहने वाले हो गए थे, उनका असमय जाना बहुत कष्टकारी है।
साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले बाबा अभय अवस्थी बताते हैं कि सिद्धार्थ के पिता कुछ साल प्रयागराज में रहे हैं। प्रयागराज के अलावा कानपुर में भी उनका परिवार रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रवीण शेखर कहते हैं कि सिद्धार्थ का असमय निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, वो युवा रंगकर्मियों के रोल माडल थे। बताते हैं कि उनका प्रयागराज तो कम आना हुआ लेकिन यहां से कोई मुंबई जाता था तो उससे पूरी आत्मीयता से मिलते थे। निर्देशक सुदीपा मित्रा कहती हैं कि बिग बास, बालिका वधु सहित तमाम धारावाहिकों में सिद्धार्थ का काम लोगों के दिल को छूने वाला था, घर-घर में उनके चाहने वाले हो गए थे, उनका असमय जाना बहुत कष्टकारी है।