{"_id":"5a132a9b4f1c1b97678bccda","slug":"sick-patients-teasing-sick146","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीजों को मुंह चिढ़ा रहा बीमार अस्पताल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीजों को मुंह चिढ़ा रहा बीमार अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 21 Nov 2017 01:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीस बिस्तर वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) सरसवां एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। इसके चलते यमुना तराई के करीब 50 गांवों के लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं। सीएचसी सिर्फ रेफर सेंटर बन कर रह गया है। ऐसे में तमाम लोग सीएचसी में इलाज कराने आने से बचने लगे हैं।
यमुना की तराई के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कराए जाने के लिए सरसवां में वर्ष 2008 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोला गया। सीएचसी के डॉक्टरों की मनमानी से इमरजेंसी सेवा पूरी तरह से प्रभावित है। तैनाती तो दो चिकित्सक की है पर, एक चिकित्सक के भरोसे ही अस्पताल संचालित हो रहा है।
वह भी चर्मरोग विशेषज्ञ हैं। उनके ही पास अस्पताल की कमान भी है। शाम होते ही अस्पताल फार्मासिस्ट और नर्सों के भरोसे हो जाता है। महिला चिकित्सक कब आती हैं और कब चली जाती हैं, इसकी किसी को जानकारी तक नहीं हो पाती है। मरीजों के भर्ती की बात करना ही गलत है। यहां सिर्फ उपचार किया जाता है, भर्ती नहीं। ऐसे में सीएचसी रेफर सेंटर बन चुका है। वार्डाें में तो ऐसी गंदगी है कि सांस लेना भी दूभर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यमुना की तराई के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कराए जाने के लिए सरसवां में वर्ष 2008 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोला गया। सीएचसी के डॉक्टरों की मनमानी से इमरजेंसी सेवा पूरी तरह से प्रभावित है। तैनाती तो दो चिकित्सक की है पर, एक चिकित्सक के भरोसे ही अस्पताल संचालित हो रहा है।
विज्ञापन
वह भी चर्मरोग विशेषज्ञ हैं। उनके ही पास अस्पताल की कमान भी है। शाम होते ही अस्पताल फार्मासिस्ट और नर्सों के भरोसे हो जाता है। महिला चिकित्सक कब आती हैं और कब चली जाती हैं, इसकी किसी को जानकारी तक नहीं हो पाती है। मरीजों के भर्ती की बात करना ही गलत है। यहां सिर्फ उपचार किया जाता है, भर्ती नहीं। ऐसे में सीएचसी रेफर सेंटर बन चुका है। वार्डाें में तो ऐसी गंदगी है कि सांस लेना भी दूभर है।
विज्ञापन