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Mahakumbh : शृंगवेरपुर का हुआ शृंगार, निषादराज पार्क भी खास, यहां से प्रभु श्रीराम ने पार की थी गंगा नदी
Mon, 23 Dec 2024 12:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 23 Dec 2024 12:37 PM IST
सार
रामायण में वर्णन आता है कि पुत्रकामेष्टी यज्ञ के लिए राजा दशरथ ने वशिष्ठ मुनि के कहने पर श्रृंगी ऋषि को अयोध्या बुलाया था। श्रृंगी ऋषि के यज्ञ फल से ही राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी।
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श्रृंगवेरपुर स्थित भगवान राम और निषादराज की प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रभु श्रीराम के जीवन और वनवास प्रसंग से प्रयागराज का विशेष संबंध है। रामायण में वर्णन मिलता है कि वनवास के लिए अयोध्या से निकल कर प्रभु श्रीराम प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम पहुंचे थे, जहां उन्होंने रात्रि निवास कर अपने मित्र निषादराज की मदद से गंगा नदी पार की थी। फिर भरद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे थे। श्रृंगी ऋषि की तपस्थली होने कारण ही यह क्षेत्र शृंगवेरपुर कहलाता है। महाकुंभ से पहले यहां भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जिसमें लगी विशाल प्रतिमा और निषादराज पार्क श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
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रामायण में वर्णन आता है कि पुत्रकामेष्टी यज्ञ के लिए राजा दशरथ ने वशिष्ठ मुनि के कहने पर श्रृंगी ऋषि को अयोध्या बुलाया था। श्रृंगी ऋषि के यज्ञ फल से ही राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। ऋषि विभाण्डक के पुत्र श्रृंगी ऋषि की तपस्थली होने के कारण गंगा तट का यह क्षेत्र शृंगवेरपुर कहलाता है। रामायण की कथा में वर्णित है कि प्रभु श्रीराम की बहन शांता का विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ ही हुआ था। आज भी शृंगवेरपुर में श्रृंगी ऋषि और शांता मां का मंदिर है, जहां श्रद्धालु संतान प्राप्ति की कामना और पूजन करते हैं।
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श्रृंगवेरपुर धाम।
- फोटो : अमर उजाला।
वाल्मीकि रामायण और तुलसी कृत रामचरित मानस में वर्णन आता है कि जब प्रभु श्रीराम राजा दशरथ की आज्ञा का पालन कर वनवास के लिए अयोध्या से निकले थे तो सबसे पहले वो शृंगवेरपुर ही पहुंचे थे। यहां उनका मिलन अपने बाल सखा निषादराज से हुआ था, जिनके कहने पर उन्होंने यहां एक रात्रि निवास भी किया था। केवटों का वह गांव आज भी रामचौरा के नाम से जाना जाता है।
यहां गंगा तट के पास राम शयन आश्रम भी है, मान्यता है प्रभु श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहां ही रात्रि निवास किया था। शृंगवेरपुर के घाट से ही निषादराज ने प्रभु श्रीराम को अपनी नौका में बैठा कर गंगा पार करवाई थी और भरद्वाज मुनि के आश्रम लेकर गये थे। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शृंगवेरपुर धाम का अब 14 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण और भव्य कॉरिडोर का निर्माण करवाया गया है।
यहां गंगा तट के पास राम शयन आश्रम भी है, मान्यता है प्रभु श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहां ही रात्रि निवास किया था। शृंगवेरपुर के घाट से ही निषादराज ने प्रभु श्रीराम को अपनी नौका में बैठा कर गंगा पार करवाई थी और भरद्वाज मुनि के आश्रम लेकर गये थे। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शृंगवेरपुर धाम का अब 14 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण और भव्य कॉरिडोर का निर्माण करवाया गया है।