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इलाहाबाद में अखिलेश का ही पलड़ा दिख रहा भारी 

Sat, 31 Dec 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 31 Dec 2016 12:51 AM IST
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Showing the balance heavily in Allahabad Akhilesh
इलाहाबाद - फोटो : allahabad
मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भले ही पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया हो लेकिन उनके इस निर्णय के बाद इलाहाबाद में सीएम के पक्ष में माहौल बनता दिखाई दे रहा है। बुजुर्ग कार्यकर्ताओं से लेकर युवा कार्यकर्ता इस निर्णय से खासे निराश हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के खिलाफ पार्टी के जमीनी नेता भले ही खुलकर बोलने को तैयार न हों लेकिन अधिकांश दबी जुबान में अखिलेश का ही साथ देते दिखाई दे रहे हैं। 
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दूसरे शब्दों में कहा कि जाए कि मुलायम के नजदीकी रहे स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र और राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह के शहर में अखिलेश यादव का पलड़ा भारी नजर आ रहा है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। दरअसल इलाहाबाद एक ऐसा शहर रहा है जिसने मुलायम को खासी मजबूती दी है। लेकिन शुक्रवार को अखिलेश को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद यहां पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से जो प्रतिक्रिया मिली है और जिस तरह से उनके पक्ष में युवा समर्थक सड़कों पर उतरे, उससे तो यही लगा कि मुलायम नहीं बल्कि अखिलेश का जमाना है।
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अखिलेश को पार्टी से बाहर करने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे ने कहा कि जब राजनीति में स्वार्थ बढ़ जाता है तो टकराव होना तय है। पार्टी के लिए और समाजवादी आंदोलन के लिए यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे निश्चित ही डा. राम मनोहर लोहिया का सपना चकनाचूर होगा। समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष संदीप यादव ने भी इस निर्णय पर निराशा जाहिर की है। कहा कि अब सपा में सब कुछ अखिलेश ही हैं। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव और नगर अध्यक्ष ने इस बारे में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी। पूर्व नगर अध्यक्ष केके श्रीवास्तव ने सिर्फ इतना ही कहा कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है। 
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‘समाजवादी पार्टी में जो हो रहा है वह एक तरह से राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सत्ता की लड़ाई है। यह हमेशा से होता रहा है। महाभारत का उदाहरण भी सामने है। इससे अच्छे बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह नकारात्मक बदलाव है।’
डॉ.बद्री नारायण, गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान

‘यह एक परिवार का मामला है। मै किसी भी गुट में नहीं हूं। मै सिर्फ सपा के साथ था और सपा के साथ ही रहूंगा। 
00 परवेज अहमद, विधायक शहर दक्षिणी।

‘सपाइयों के लिए यह बुरा दिन है। इस निर्णय से जमीनी कार्यकर्ता खासे निराश हैं जबकि लखनऊ का चक्कर काटने वाले खुश हैं। ’
00 विनय कुशवाहा, जिला उपाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
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