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शिक्षामित्रों के दो वर्षीय प्रशिक्षण के खिलाफ याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 29 Apr 2016 01:44 AM IST
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खुशी का इजहार करते शिक्षामित्र
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण देने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है। याचिका बीटीसी अभ्यर्थियों कुलदीप सिंह और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि मामला इसी न्यायालय की खंडपीठ से एक बार निर्णीत हो चुका है तथा सुप्रीमकोर्ट में लंबित है इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
शिक्षामित्रों के अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बताया कि शिक्षा मित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन के खिलाफ दाखिल दाखिल याचिकाओं पर हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने 12 सितंबर 2015 को समायोजन रद्द कर दिया था। इनमें से कुछ याचिकाओं में शिक्षामित्रों को दिए गए दूरस्थ माध्यम से दो वर्षीय प्रशिक्षण का मामला भी उठा था मगर पूर्णपीठ ने इसे एनसीटी के हवाले छोड़ते हुए कहा कि प्रशिक्षण की वैधता पर एनसीटी निर्णय करे।
पूर्णपीठ के आदेश को शिक्षा मित्रों ने विशेष अपील में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीमकोेर्ट ने पूर्णपीठ का आदेश स्थगित कर दिया है। समायोजन के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट में अभी सुनवाई चल रही है। दूसरी ओर दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण का मामला बीटीसी अभ्यर्थी भी सुप्रीमकोर्ट ले गए मगर उनको यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि वह अपनी बात हाईकोर्ट के समक्ष रखें।
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इसके बाद बीटीसी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में एकलपीठ के समक्ष याचिका दाखिल प्रशिक्षण की वैधता को चुनौती दे दी। मांग की गई कि दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण को अवैध घोषित किया जाए। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल यादव ने यह जानकारी देते हुए फैसले पर खुशी जाहिर की है।
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शिक्षामित्रों के अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बताया कि शिक्षा मित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन के खिलाफ दाखिल दाखिल याचिकाओं पर हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने 12 सितंबर 2015 को समायोजन रद्द कर दिया था। इनमें से कुछ याचिकाओं में शिक्षामित्रों को दिए गए दूरस्थ माध्यम से दो वर्षीय प्रशिक्षण का मामला भी उठा था मगर पूर्णपीठ ने इसे एनसीटी के हवाले छोड़ते हुए कहा कि प्रशिक्षण की वैधता पर एनसीटी निर्णय करे।
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पूर्णपीठ के आदेश को शिक्षा मित्रों ने विशेष अपील में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीमकोेर्ट ने पूर्णपीठ का आदेश स्थगित कर दिया है। समायोजन के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट में अभी सुनवाई चल रही है। दूसरी ओर दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण का मामला बीटीसी अभ्यर्थी भी सुप्रीमकोर्ट ले गए मगर उनको यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि वह अपनी बात हाईकोर्ट के समक्ष रखें।
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इसके बाद बीटीसी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में एकलपीठ के समक्ष याचिका दाखिल प्रशिक्षण की वैधता को चुनौती दे दी। मांग की गई कि दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण को अवैध घोषित किया जाए। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल यादव ने यह जानकारी देते हुए फैसले पर खुशी जाहिर की है।