शंकराचार्य निश्चलानंद बोले : अमेरिकी संसद में भी उठी है भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की आवाज
गोवर्धनमठ पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की आवाज अमेरिका के संसद भवन में भी गूंज चुकी है। वहां पर विपक्ष ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर सवाल उठाया था।
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गोवर्धनमठ पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की आवाज अमेरिका के संसद भवन में भी गूंज चुकी है। वहां पर विपक्ष ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर सवाल उठाया था। पुरी शंकराचार्य ने ये बातें शनिवार को मौनी अमावस्या पर्व पर भक्तों को संबोधित करते हुए कहीं। माघ मेले के शिविर में भक्तों की ओर से धर्म और आध्यात्म पर किए गए सवालों के पुरी शंकराचार्य ने जवाब दिए।
पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आगे कहा कि अमेरिका में भी लोग सावधान हैं कि कहीं भारत हिंदू राष्ट्र न हो जाए। पुरी शंकराचार्य ने जोर देते हुए कहा कि अगर सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू थे तो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने में क्या आपत्ति है। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि जो असंभव को संभव कर देने की भावना रखता है वही उज्जवल इतिहास की रचना करता है। कहा कि भारत से अंग्रेजों को खदेड़ना औरों के लिए असंभव था, लेकिन जिन राष्ट्र भक्तों के लिए संभव था, उन्होंने इतिहास की रचना की।
कहा कि हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना मेरे लिए असंभव नहीं लगती है। कहा कि रोम में ईसा मसीह की प्रतिमा वैष्णव तिलक से युक्त है। उस प्रतिमा के पीछे पर्दा लगा रखा है। पर्दा हटाकर देखेंगे तो वैष्णव तिलक के साथ उनका स्वरूप दिखेगा। कहा कि ईसा मसीह भी हिंदू के पक्षधर थे। एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि दर्शन, विज्ञान और व्यवहार में सामंजस्य साधने वाला केवल सनातन वैदिक आर्य सिद्घांत ही है।
उन्होंने पूरी पृथ्वी की आयु के बारे में भी भक्तों को जानकारी दी। कहा कि आधुनिक विज्ञान लाखों वर्ष तक वैदिक विज्ञान से मार्गदर्शन ले सकता है। कहा कि विश्व बैंक के प्रतिनिधि ने भी अर्थशास्त्र से जुड़ी गुत्थियों को मेरे पास आकर सुलझाया था। कहा कि अर्थशास्त्र की गुत्थी भी भारत में आकर ही सुलझती है। एक अन्य सवाल के जवाब में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि माता-पिता सन्यासी के लिए भी पूज्य होते हैं। यहां तक माता पिता की महिमा है। पुरी शंकराचार्य ने माता शबरी को ब्रह्म बताया।