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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले : जहां नहाते थे शंकराचार्य, वहीं नहाएंगे दलित-पिछड़े, मां की गोद में कौन VIP

Sat, 11 Jan 2025 12:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Jan 2025 12:56 PM IST
सार

मेला 13 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है। मेले की बसावट की व्यवस्थाएं बहुत धीमी गति से चल रही हैं। व्यवस्थाएं समय पर होने पर ही मेले की महत्ता एवं गरिमा स्थापित हो सकेगी और श्रद्धालुओं को भी असुविधाजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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Shankaracharya Avimukteshwaranand said: Where Shankaracharya used to bathe
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, ज्योतिष्पीठ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज हमसे कहा गया कि यहां पर वीआईपी घाट हैं। मां की गोद में कौन वीआईपी होता है? हमारे धर्म के अनुसार वीआईपी घाट नहीं हो सकता है। उसी घाट पर शंकराचार्य जी नहाते हैं और उसी पर दलित और पिछड़े भी। कोई किसी से जात पूछता है क्या? शुक्रवार को एक चैनल से बात करते हुए शंकराचार्य ने व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की।

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इसके अलावा शंकराचार्य के शिविर में आयोजित परम धर्म संसद में भी कई प्रस्ताव पारित किए गए। शंकराचार्य ने कहा कि प्रथम स्नान पर्व से पहले संगम पर गंगाजल की जांच कराकर सरकार को बताना चाहिए कि गंगा में डुबकी के लिए मिलने वाला जल निर्मल है। मेला क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्र नालियों के पास रखने पर भी आपत्ति जताई गई।

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मेला 13 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है। मेले की बसावट की व्यवस्थाएं बहुत धीमी गति से चल रही हैं। व्यवस्थाएं समय पर होने पर ही मेले की महत्ता एवं गरिमा स्थापित हो सकेगी और श्रद्धालुओं को भी असुविधाजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। शंकराचार्य ने कहा कि साइनेज एवं होर्डिंग में कुंभ मेले का वर्ष ईस्वी सन 2025 का उल्लेख किया गया है, उसके स्थान पर हिंदी विक्रम संवत 2081 किया जाना चाहिए। इससे पहले अग्नि अखाडा के सभापति मुक्तानंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर परम धर्म संसद का उद्घाटन किया।

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