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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से संतुष्ट नहीं केंद्रीयकर्मी

Thu, 30 Jun 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 30 Jun 2016 01:19 AM IST
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Seventh Pay Commission was not satisfied with the central personnel
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केंद्रीय सरकार की ओर से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने की घोषणा को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में बहुत उत्साह नहीं है। उनका आरोप है कि घोषणाएं जहां उम्मीदों के मुताबिक नहीं, वहीं सरकार ने न्यूनतम वेतनमान, वेतन बढ़ोतरी समेत कई अन्य मांगों के मामले में भी निराश ही किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करके आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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सिविल एकाउंट ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरीशंकर तिवारी कहते हैं, वेतन के साथ कर्मचारियों को पांच प्रमोशन, पांच फीसदी इंक्रीमेंट, प्रमोशन पर दो इंक्रीमेंट जैसी कई मांगें थी लेकिन इसमें से एक भी पूरी नहीं हुई। ऑल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष पांडेय ने भी इसे अब तक का सबसे असफल आयोग बताया। कहा, इससे कर्मचारियों को घोर निराशा हुई है। इस मामले में अब तक हुई बैठकों से उम्मीद थी कि कर्मचारियों की मांगें पूरी होंगी लेकिन लगता है कि वेतन आयोग और वित्त मंत्री के बीच सांठ-गांठ हो गई। आयोग में तो भत्ते और एरियर पर भी कैंची चला दी गई । 
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केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष टीपी मिश्र ने इसे आजादी के बाद का सबसे रद्दी वेतन रिपोर्ट बताया। कहा, सरकार ने कर्मचारियों की कोई मांग ही नहीं मानी है। केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वय समिति के महामंत्री और नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन के जिला सह संयोजक बजरंग बली गिरी कहते हैं, कर्मचारियों ने 24 हजार न्यूनतम वेतनमान की मांग की थी लेकिन सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर 18 हजार रुपये ही निर्धारित कर दिया। छठे वेतन आयोग में न्यूनतम 40 फीसदी का इजाफा हुआ था जबकि अबकी अधिकतम वेतन 23 फीसदी ही इजाफा हुआ है। अब केंद्रीय नेताओं की दिल्ली में हो रही बैठक के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक हनुमान  प्रसाद श्रीवास्तव कहते हैं, इससे कोई विशेष फायदा नहीं है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को न्यूनतम साढ़े सोलह हजार रुपये वेतनमान मिल रहा है। वेतन आयोग से उन्हें मात्र डेढ़ हजार रुपये का ही लाभ है। हाईकोर्ट के कर्मचारी नेता मो.अतहर तो कहते हैं कि आयोग की सिफारिशों से कर्मचारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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