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खारिज होने के बाद दोबारा धारा 156 (3) की अर्जी नहीं दाखिल की जा सकती : हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि खारिज होने के बाद धारा 156 (3) की अर्जी दोबारा दाखिल नहीं की जा सकती। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश मथुरा और सीजेएम मथुरा के 19 मार्च 2024 व 18 सितंबर 2024 के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही नए सिरे से पक्षों को सुनकर पुनरीक्षण अर्जी तय करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ब्रह्मपाल सिंह उर्फ ब्रह्म प्रकाश शर्मा तथा छह अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
मथुरा नौहझील थाना क्षेत्र में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने इनामी अमित बावरिया का मुठभेड़ में मार गिराया था। दिल्ली के नजफगढ़ निवासी अनिल की मां शीला देवी ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए सीजेएम मथुरा की अदालत में धारा 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की और आरोपी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी। इसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी सत्र अदालत में दाखिल की गई।
सत्र अदालत ने बिना याचियों को नोटिस दिए एकपक्षीय आदेश से अर्जी स्वीकार करते हुए सीजेएम को अर्जी फिर से तय करने का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट ने एसएसपी मथुरा को एफआईआर दर्ज कराकर सीओ रैंक के अधिकारी से विवेचना कराने का आदेश दिया। याची ने इस आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। याची अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि धारा 156 (3) की अर्जी एक बार खारिज होने के बाद दोबारा दाखिल नहीं की जा सकती। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने सत्र अदालत व सीजेएम के आदेश को रद्द कर दिया।
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मथुरा नौहझील थाना क्षेत्र में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने इनामी अमित बावरिया का मुठभेड़ में मार गिराया था। दिल्ली के नजफगढ़ निवासी अनिल की मां शीला देवी ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए सीजेएम मथुरा की अदालत में धारा 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की और आरोपी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी। इसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी सत्र अदालत में दाखिल की गई।
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सत्र अदालत ने बिना याचियों को नोटिस दिए एकपक्षीय आदेश से अर्जी स्वीकार करते हुए सीजेएम को अर्जी फिर से तय करने का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट ने एसएसपी मथुरा को एफआईआर दर्ज कराकर सीओ रैंक के अधिकारी से विवेचना कराने का आदेश दिया। याची ने इस आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। याची अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि धारा 156 (3) की अर्जी एक बार खारिज होने के बाद दोबारा दाखिल नहीं की जा सकती। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने सत्र अदालत व सीजेएम के आदेश को रद्द कर दिया।
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