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Scam : आश्रम पद्धति विद्यालयों के घोटाले का खुलेगा राज, एसआईटी को सौंपे 2200 पन्नों के अभिलेख

Sat, 26 Oct 2024 03:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Oct 2024 03:38 PM IST
सार

जांच को आगे बढ़ाने के लिए एसआईटी ने अगस्त में जिला समाज कल्याण विभाग से चार साल (2018-2022) तक विद्यालयों में होने वाले कार्य, अधिकारियों की तैनाती, कार्मिकों का विवरण, छात्रों की सूची, विद्यालयों की पत्रावली आदि जानकारियां मांगी गई थीं।

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secret of the scam of ashram system schools will be revealed, 2200 pages of records handed over to SIT
पैसा - फोटो : Istock

विस्तार

समाज कल्याण विभाग की ओर संचालित आश्रम पद्धति बालिका विद्यालयों में अनियमितता की जांच की कार्रवाई फिर से तेज हो गई है। लखनऊ विशेष जांच दल (एसआईटी) को जिला समाज कल्याण ने 2200 पन्नों के अभिलेख सौंप दिए हैं। इसी के आधार पर एसआईटी ने आगे की जांच शुरू कर दी है।

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कोरांव, कौड़िहार, सुरवल सहनी और खाई करछना के चार राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में करोड़ों के गबन मामले में एसआईटी ने तीन जून 2024 को तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह, तत्कालीन प्रभारी प्रधानाचार्य रेनू सिंह, छोटेलाल, जीत लाल पटेल, छात्रावास अधीक्षक अमित शुक्ला, विद्यालयों में कार्यरत पटल सहायकों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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जांच को आगे बढ़ाने के लिए एसआईटी ने अगस्त में जिला समाज कल्याण विभाग से चार साल (2018-2022) तक विद्यालयों में होने वाले कार्य, अधिकारियों की तैनाती, कार्मिकों का विवरण, छात्रों की सूची, विद्यालयों की पत्रावली आदि जानकारियां मांगी गई थीं।

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हर एक विद्यालयों के 500 से अधिक पन्ने

एसआईटी की ओर से मांगी गईं चारों विद्यालयों की जानकारियों को एकत्र करने में जिला विभाग को डेढ़ माह का वक्त लग गया। अभिलेखों में कोरांव, कौड़िहार, सुरवल सहनी और खाई करछना के चार राजकीय आश्रम विद्यालयों में तैनात कार्मिकों का विवरण, छात्रों की सूची, प्रधानाचार्य व अध्यापकों की तैनाती, विद्यालयों के सभी कार्य आदि सभी जानकारियां दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार हर एक विद्यालयों के करीब 500 से अधिक पन्नों के अभिलेख तैयार किए गए थे।

इसलिए एसआईटी ने दर्ज किया था मुकदमा

राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को भोजन, आवास, छात्रावास, पुस्तकें, स्टेशनरी व अन्य सुविधाएं समाज कल्याण विभाग की ओर से निशुल्क मुहैया कराई जाती हैं। लेकिन, एसआईटी की जांच में सामने आया था कि वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच सभी राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में ग्रामीण विकास सेवा संस्थान नामक संस्था को भोजन व्यवस्था का काम दिया गया था। आरोप है कि तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने विद्यालयों के प्रधानाचार्य और अधीक्षकों से मिलकर 1.38 करोड़ का गबन किया है।

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