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गैंग का सरगना है स्कूल प्रबंधक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 19 Dec 2016 01:58 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट एआरओ परीक्षा का पेपर लीक कराने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया तो पता चला कि इस गैंग में वकील, स्कूल प्रबंधक, सिपाही, प्रतियोगी छात्र भी शामिल हैं। गिरोह का सरगना स्कूल प्रबंधक है। पूछताछ में पता चला कि गिरोह में किसकी क्या भूमिका थी और कैसे पेपर उन तक पहुंचा।
एसपी सिटी विपिन टाडा ने बताया कि पेपर लीक कराकर पास कराने वाले इस गिरोह का सरगना स्कूल प्रबंधक अनिल मिश्र है। जयंतीपुर निवासी सरगना अनिल के कई कॉलेज हैं। वह अपने वकील दोस्तों जयदीप अग्निीहोत्री, ललित त्रिपाठी की मदद से गिरोह संचालित करता है। ललित के परिचित मेरी लूकस स्कूल के शिक्षक मोहम्मद सिद्दीकी की मदद से गिरोह के लोग साथी वकील जयदीप की ड्यूटी बीएचएस स्थित परीक्षा केंद्र पर लगवाते थे। इसके सहयोग में अशोक तिवारी भी रहते हैं। जयदीप और अशोक पेपर परीक्षा कें द्र से बाहर लाए। पेपर की फोटो कॉपी लेकर जयशंकर पाल निवासी हंडिया हंसराज इंस्टीट्यूट पहुंचा। यहां इसके प्रबंधक दुर्गेश शर्मा व विमलेश शर्मा को आरएन यादव द्वारा 20 हजार रुपये में हल उपलब्ध कराया गया। महाराज यादव, वकील यादव, प्रमोद कुमार यादव साल्वर की भूमिका में थे। इनके बारे में और जानकारी ली जा रही है।
मौके पर एक निलंबित सिपाही महेंद्र प्रसाद निवासी वनकेशर थरवई भी पकड़ा गया है। जो सुरक्षा के लिए वहां मौजूद था। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर ललित कुमार तिवारी, अनिल मिश्र और जयदीप अग्निहोत्री को नगदी, क ार, रिवॉल्वर समेत दबोच लिया। सभी के मोबाइल पुलिस ने कब्जे में ले लिए हैं। जयशंकर पाल ने अपने तीन परिचित छात्रों अविनाश कुमार पाल निवासी राजापुर, पंकज कुमार पाल निवासी भदोही तथा एक अन्य छात्र को परीक्षा में नकल कराकर पास कराने के लिए सरगना अनिल मिश्र से संपर्क किया था। जयशंकर अभ्यर्थियों को खोज कर लाता है। एक अभ्यर्थी से तीन से पांच लाख तक रुपये लिए जाते हैं। सबको उनके कार्य के मुताबिक हिस्सा मिलता था। सबसे अधिक रकम सरगना अनिल मिश्र लेता था।
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पहले भी कई परीक्षाओं में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हो चुका है। रेलवे, पीसीएस, माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड, एसएससी समेत कई संस्थाओं की बड़ी परीक्षाओं में नकल माफियाओं ने पर्चा लीक करा लिया था। अभ्यर्थियों के हंगामे के बाद परीक्षा तक निरस्त करनी पड़ी थी।
अप्रैल 2016 में आरआरबी की ऑनलाइन परीक्षा में तेलियरगंज के एक सेंटर को ही नकल माफियाओं ने हाईजैक कर लिया था। वे कहीं और बैठक र पर परीक्षा कें द्र के कंप्यूटरों को संचालित कर रहे थे। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया था। पकड़े गए आरोपियों में रेलवे का इंजीनियर भी शामिल था। पीसीएस 2015 प्रारंभिक परीक्षा प्रश्नपत्र लखनऊ में आउट हुआ था। जिसके बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसके अलावा माध्ययिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में कई केंद्रों की परीक्षा पेपर लीक होने के चलते लीक हुआ था।
सिविल लाइंस में बीएचएस स्थित परीक्षा केंद्र में एक छात्र ब्लूटूथ के जरिए नकल करते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया है। उसे सिविल लाइंस पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अरुण कुमार त्यागी ने बताया कि पकड़ा गया सुमित पटेल निवासी उमरापट्टी प्रतापगढ़ है। वह ब्लूटूथ के जरिए नकल करते हुए पकड़ा गया। उसके खिलाफ मुकदमा लिखकर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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एसपी सिटी विपिन टाडा ने बताया कि पेपर लीक कराकर पास कराने वाले इस गिरोह का सरगना स्कूल प्रबंधक अनिल मिश्र है। जयंतीपुर निवासी सरगना अनिल के कई कॉलेज हैं। वह अपने वकील दोस्तों जयदीप अग्निीहोत्री, ललित त्रिपाठी की मदद से गिरोह संचालित करता है। ललित के परिचित मेरी लूकस स्कूल के शिक्षक मोहम्मद सिद्दीकी की मदद से गिरोह के लोग साथी वकील जयदीप की ड्यूटी बीएचएस स्थित परीक्षा केंद्र पर लगवाते थे। इसके सहयोग में अशोक तिवारी भी रहते हैं। जयदीप और अशोक पेपर परीक्षा कें द्र से बाहर लाए। पेपर की फोटो कॉपी लेकर जयशंकर पाल निवासी हंडिया हंसराज इंस्टीट्यूट पहुंचा। यहां इसके प्रबंधक दुर्गेश शर्मा व विमलेश शर्मा को आरएन यादव द्वारा 20 हजार रुपये में हल उपलब्ध कराया गया। महाराज यादव, वकील यादव, प्रमोद कुमार यादव साल्वर की भूमिका में थे। इनके बारे में और जानकारी ली जा रही है।
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मौके पर एक निलंबित सिपाही महेंद्र प्रसाद निवासी वनकेशर थरवई भी पकड़ा गया है। जो सुरक्षा के लिए वहां मौजूद था। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर ललित कुमार तिवारी, अनिल मिश्र और जयदीप अग्निहोत्री को नगदी, क ार, रिवॉल्वर समेत दबोच लिया। सभी के मोबाइल पुलिस ने कब्जे में ले लिए हैं। जयशंकर पाल ने अपने तीन परिचित छात्रों अविनाश कुमार पाल निवासी राजापुर, पंकज कुमार पाल निवासी भदोही तथा एक अन्य छात्र को परीक्षा में नकल कराकर पास कराने के लिए सरगना अनिल मिश्र से संपर्क किया था। जयशंकर अभ्यर्थियों को खोज कर लाता है। एक अभ्यर्थी से तीन से पांच लाख तक रुपये लिए जाते हैं। सबको उनके कार्य के मुताबिक हिस्सा मिलता था। सबसे अधिक रकम सरगना अनिल मिश्र लेता था।
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पहले भी कई परीक्षाओं में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हो चुका है। रेलवे, पीसीएस, माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड, एसएससी समेत कई संस्थाओं की बड़ी परीक्षाओं में नकल माफियाओं ने पर्चा लीक करा लिया था। अभ्यर्थियों के हंगामे के बाद परीक्षा तक निरस्त करनी पड़ी थी।
अप्रैल 2016 में आरआरबी की ऑनलाइन परीक्षा में तेलियरगंज के एक सेंटर को ही नकल माफियाओं ने हाईजैक कर लिया था। वे कहीं और बैठक र पर परीक्षा कें द्र के कंप्यूटरों को संचालित कर रहे थे। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया था। पकड़े गए आरोपियों में रेलवे का इंजीनियर भी शामिल था। पीसीएस 2015 प्रारंभिक परीक्षा प्रश्नपत्र लखनऊ में आउट हुआ था। जिसके बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसके अलावा माध्ययिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में कई केंद्रों की परीक्षा पेपर लीक होने के चलते लीक हुआ था।
सिविल लाइंस में बीएचएस स्थित परीक्षा केंद्र में एक छात्र ब्लूटूथ के जरिए नकल करते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया है। उसे सिविल लाइंस पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अरुण कुमार त्यागी ने बताया कि पकड़ा गया सुमित पटेल निवासी उमरापट्टी प्रतापगढ़ है। वह ब्लूटूथ के जरिए नकल करते हुए पकड़ा गया। उसके खिलाफ मुकदमा लिखकर विधिक कार्रवाई की जा रही है।