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हाईकोर्ट ने कहा : बजट खत्म होने के आधार पर छात्रवृत्ति देने से नहीं कर सकते इन्कार, तीन माह में करें भुगतान

Wed, 28 Aug 2024 12:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 28 Aug 2024 12:15 PM IST
सार

न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने पुलस्त्य तिवारी की याचिका पर अधिवक्ता रामानुज तिवारी व अखिलेंद्र सिंह को सुनकर यह आदेश दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमएससी फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने वाले छात्र पुलस्त तिवारी ने यूपी छात्रवृत्ति योजना 2023-24 के तहत आवेदन किया था।

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Scholarship cannot be refused on the basis of end of budget, payment must be made within three months
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति और बजट खत्म होने के आधार पर योग्य उम्मीदवार को छात्रवृत्ति देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग प्रयागराज को तीन माह के भीतर योजना के तहत छात्रवृत्ति का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने पुलस्त्य तिवारी की याचिका पर अधिवक्ता रामानुज तिवारी व अखिलेंद्र सिंह को सुनकर यह आदेश दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमएससी फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने वाले छात्र पुलस्त तिवारी ने यूपी छात्रवृत्ति योजना 2023-24 के तहत आवेदन किया था।
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छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर उसने पूछताछ की तो पता चला कि अयोध्या की रहने वाली एक छात्रा को छात्रवृत्ति दी गई है, जिसने अपने आवेदन में याची के हाईस्कूल के रोल नंबर का उपयोग किया था।
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पुलस्त्य तिवारी के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची की ओर से कोई गलती नहीं की गई है, इसलिए उसे योजना के तहत छात्रवृत्ति के अनुदान से वंचित नहीं किया जा सकता है। प्रतिवादियों की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने भी जवाबी हलफनामा प्रस्तुत कर बताया कि याची छात्रवृत्ति के लिए पात्र है।


अनजाने में याची के हाईस्कूल के रोल नंबर का उपयोग करने वाली छात्रा को छात्रवृत्ति दे दी गई। वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया है और बजट भी समाप्त हो गया है। इसलिए याची को छात्रवृत्ति नहीं दी जा सकती है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का संज्ञान लेते हुए समाज कल्याण विभाग को ऑर्डर की कॉपी मिलने के तीन माह के भीतर याची को छात्रवृत्ति का भुगतान करने का आदेश दिया।

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