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High Court : अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर पांच साल तक फैसला नहीं लेने पर एसबीआई पर एक लाख जुर्माना

Wed, 01 Oct 2025 12:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 01 Oct 2025 12:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर पांच साल तक निर्णय नहीं लेने पर भारतीय स्टेट बैंक पर एक लाख जुर्माना लगाया है। हालांकि, कोर्ट ने देरी व लापरवाही के आधार पर याचिका खारिज कर दी।

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SBI fined Rs 1 lakh for not taking decision on compassionate appointment application for five years
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर पांच साल तक निर्णय नहीं लेने पर भारतीय स्टेट बैंक पर एक लाख जुर्माना लगाया है। हालांकि, कोर्ट ने देरी व लापरवाही के आधार पर याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकल पीठ ने प्रिंसू सिंह की याचिका पर दिया है।

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बांदा निवासी प्रिंसु सिंह के पिता की 2019 में सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। याची ने 2020 में मां के माध्यम से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। बार-बार प्रतिनिधित्व के बावजूद बैंक की ओर से 2025 तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस पर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अनुरोध किया कि प्रतिवादी बैंक को अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर निर्णय लेने के लिए निर्देश दिया जाए। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए छह महीने की समयसीमा के भीतर आवेदन प्रतिवादी को दिया गया था। बैंक ने पांच साल तक याची के आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया।
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न्यायालय ने समयसीमा में निर्णय लेने में विफल रहने के लिए प्रतिवादी बैंक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही कहा कि आवेदन दाखिल करने में देरी या न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने में देरी से यह अनुमान लगाया जाता है कि मृतक के परिवार के सामने मौजूद वित्तीय संकट समाप्त हो गया है। याची ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पारिवारिक मुकदमेबाजी में व्यस्त था और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में उसने जानबूझकर देरी की। इसलिए यह माना गया कि परिवार की तत्काल वित्तीय आवश्यकता समाप्त हो गई होगी। याची अपने अधिकारों के प्रति जागरूक था और उसके पास पर्याप्त संसाधन भी थे। इसलिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में उसकी ओर से की गई लापरवाही क्षमा योग्य नहीं है। विलंब और लापरवाही के आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

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