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जीवन सुगमता सूचकांक में संगम नगरी का देश में 96 वां स्थान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:59 AM IST
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डिप्टी सीएम समेत चार मंत्रियों का अपना शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में फिसड्डी साबित होने के बाद एक बार फिर पिछड़ गया है। केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी ‘जीवन सुगमता सूचकांक’ रैंकिंग में संगमनगरी को देश के 111 शहरों में रहने के लिहाज से 96 वां स्थान मिला है। कुंभ कार्यों के चलते कई बिंदुओं पर अनुकूल अंक न मिलने से रैकिंग पिछड़ गई। सुखद है कि स्मार्ट सिटी की योजनाओं में इलाहाबाद प्रदेश भर में अव्वल है।
शहर के हालात इन दिनों हर किसी की परेशानी का कारण बने हैं। हर तरफ खोदाई, धूल के गुबार और जन सुविधाएं बदहाल हैं। नागरिक सुविधाओं के मामले में शहरी इन दिनों कराह रहे हैं। कहीं जलजमाव तो कहीं पेयजल संकट, स्ट्रीट लाइटें कहीं लुपलुप करती तो कहीं बुझी हुई दिख रही हैं। मंत्रालय ने 16 बिंदुओं पर जो सर्वे कराया और लोगों से फीडबैग लिया, उससे कई बिंदुओं पर हमारा शहर फिसड्डी रहा। कूड़ा प्रबंधन में एक बार फिर मात मिली है। अधिकांश सड़कें धंसी और उखड़ी हैं। जगह-जगह गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। सोमवार को को जारी ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में संगम नगरी में कुंभ कार्यो के तहत मिशन मोड में चल रही परियोजनाओं के कारण कई मानकों पर बेहतर अंक नहीं मिले। इस कारण हम छोटे शहरों की अपेक्षा काफी पिछड़े। यदि यही सर्वे अक्तूबर के बाद होता तो नागरिक सुविधाओं और स्मार्ट सिटी के तहत किए गए कार्यों से स्थिति कुछ और ही होती।
गवर्नेंस, सभ्यता एंव संस्कृति, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक खुले स्थान, आवासीय एवं बुनियादी सुविधाएं, शहर की आर्थिक एवं रोजगार सृजन की क्षमता, शहर का घनत्व, विद्युत आपूर्ति एवं सुनिश्चित पेयजलापूर्ति, परिवहन एवं गतिशीलता, जल संरक्षण एवं निस्तारण, कूड़ा निस्तारण एवं प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति।
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शहर के हालात इन दिनों हर किसी की परेशानी का कारण बने हैं। हर तरफ खोदाई, धूल के गुबार और जन सुविधाएं बदहाल हैं। नागरिक सुविधाओं के मामले में शहरी इन दिनों कराह रहे हैं। कहीं जलजमाव तो कहीं पेयजल संकट, स्ट्रीट लाइटें कहीं लुपलुप करती तो कहीं बुझी हुई दिख रही हैं। मंत्रालय ने 16 बिंदुओं पर जो सर्वे कराया और लोगों से फीडबैग लिया, उससे कई बिंदुओं पर हमारा शहर फिसड्डी रहा। कूड़ा प्रबंधन में एक बार फिर मात मिली है। अधिकांश सड़कें धंसी और उखड़ी हैं। जगह-जगह गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। सोमवार को को जारी ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में संगम नगरी में कुंभ कार्यो के तहत मिशन मोड में चल रही परियोजनाओं के कारण कई मानकों पर बेहतर अंक नहीं मिले। इस कारण हम छोटे शहरों की अपेक्षा काफी पिछड़े। यदि यही सर्वे अक्तूबर के बाद होता तो नागरिक सुविधाओं और स्मार्ट सिटी के तहत किए गए कार्यों से स्थिति कुछ और ही होती।
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गवर्नेंस, सभ्यता एंव संस्कृति, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक खुले स्थान, आवासीय एवं बुनियादी सुविधाएं, शहर की आर्थिक एवं रोजगार सृजन की क्षमता, शहर का घनत्व, विद्युत आपूर्ति एवं सुनिश्चित पेयजलापूर्ति, परिवहन एवं गतिशीलता, जल संरक्षण एवं निस्तारण, कूड़ा निस्तारण एवं प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति।
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