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Prayagraj : संगमनगरी में सिमटी गंगा में उभरेे रेत के टीले, आचमन-स्नान के लायक भी नहीं बचा जल

Mon, 29 May 2023 05:52 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 29 May 2023 05:52 PM IST
सार

गंगोत्री से गंगासागर तक करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार बनी जीवनदायिनी गंगा प्रयागराज में अब खुद प्यास से तड़प रही है। प्रवाह कम होने से यह संकट पैदा हुआ है। साथ ही नालों से गंदा पानी बहाए जाने से मुक्तिदायिनी की धारा प्रदूषित भी हो रही है।

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Sand dunes emerged in the confined Ganga in Sangamnagari, there is no water left even for bathing
जलस्तर घटने से गंगा में बन गए हैं टीले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगमनगरी में गंगा की धारा कई जगह सिमट गई है। प्रवाह कम होने और जलधारा सूखने से फाफामऊ से संगम के बीच कई जगह रेत के टीले उभर आए हैं। कई घाटों पर जल धारा ठहर कर काली पड़ने लगी है। इससे संगम और आसपास के घाटों पर डुबकी लगाने और आचमन करने लायक भी जल नहीं रह गया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं, तीर्थपुरोहितों और संतों की चिंता बढ़ गई है।

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तटवर्ती इलाकों में रेती पर जायद की फसलों की सिंचाई का भी संकट पैदा हो गया है। साथ ही भूजल स्तर खिसकने की आशंका बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि अगर समय रहते न्यूनतम प्रवाह को लेकर सरकारों ने नहीं चेता तो आने वाले समय में तीर्थनगरी में संकट बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।गंगोत्री से गंगासागर तक करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार बनी जीवनदायिनी गंगा प्रयागराज में अब खुद प्यास से तड़प रही है।

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प्रवाह कम होने से यह संकट पैदा हुआ है। साथ ही नालों से गंदा पानी बहाए जाने से मुक्तिदायिनी की धारा प्रदूषित भी हो रही है। माघ मेले के दौरान जहां गंगा में तेज प्रवाह की वजह से साधु-संतों के शिविरों के पास कटान हो गई थी और प्रवाह करीब तीन सौ मीटर के दायरे तक फैला नजर आ रहा था, वहीं अब गंगा सिमट कर कहीं 50 तो कहीं 30 मीटर से भी कम रह गई हैं।

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संगम पर जल स्तर इतना सिमट गया है कि लोग स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं। गंगा की इस दशा को लेकर साधु-संत और तीर्थ पुरोहितों की चिंता बढ़ गई है। संगम नगरी में जहां महीने भर पहले ही माघ मेले में लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा था, वहीं अब संंगम पर ही डुबकी लगाने भर के लिए जल नहीं रह गया है।

इसका एक बड़ा कारण यह भी है की माघ मेले के बाद गंगा में नरोरा और कानपुर बैराज से पानी न के बराबर छोड़ा जा रहा है। माघ मेले के समय जहां सात हजार से 18 हजार क्यूसेक प्रति दिन जल छोड़ा जा रहा था, वहीं मौजूदा समय महज दो से ढाई हजार क्यूसेक ही जल नरौरा, कानपुर बैराजों से छोड़ा जा रहा है। गंगा पर लंबे समय से काम कर रहे टीकरमाफी मठ के महंत स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी गंगा में जल न छोड़े जाने से नाराज हैं।

उनका कहना है कि सिर्फ स्नान पर्वों पर ही पानी छोड़ने की रस्म अदायगी की जाती है, लेकिन इस बार गंगा दशहरा पर भी शासन ने गंगा की सुध नहीं ली। जबकि, झूंसी, नैनी और फाफामऊ के सारे नाले खुलेआम गंगा में बहाए जा रहे हैं। इसे किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इसी तरह प्रयागवाल सभा के महामंत्री ऋतुराज मिश्र ने गंगा की इस दुर्दशा पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बैराजों से शीघ्र जल नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उधर, शिवकुटी, बदरा-सोनौटी से लेकर अरैल के बीच जायद की फसलें भी सिंचाई के अभाव में मुरझाने लगी हैं।

तीर्थपुरोहित रेनू मिश्रा और जय त्रिवेणी जय प्रयाग आरती समिति के संस्थापक प्रदीप पांडेय बताते हैं कि जलधारा तेजी से सिमट रही है। इस वजह से स्नानार्थियों को तो दिक्कतें हो ही रही हैं, रेती पर उगाई जाने वाली सब्जियों की सिंचाई को लेकर संकट पैदा हो गया है।

मौजूदा समय ढाई हजार क्यूसेक जल नियमित रूप से नरौरा बैराज से छोड़ा जा रहा है। प्रवाह की अगर कमी है तो इस जलराशि को बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। प्रवाह बनाए रखने के लिए नियमित मॉनीटरिंग की जा रही हैै। - सिद्धार्थ कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल प्रयागराज।

यूपी-उत्तराखंड के सीएम से मिलेंगे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष

हरिद्वार के मनसा देवी ट्रस्ट और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष औ महंत रवींद्र पुरी ने संगम पर गंगा की जलधारा सूखने के लिए उत्तराखंड और यूपी के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। रविवार को उन्होंने बताया कि वह गंगा की मौजूदा स्थिति पर सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से शीघ्र मुलाकात करेंगे।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि कोर्ट ने भी न्यूनतम प्रवाह बनाए रखने का आदेश दिया है। उसका पालन तो हर हाल में किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा न किया जाना करोड़ों श्रद्धालुओं और साधु-संतों की आस्था के साथ छलावा है। गंगा दशहरा के पहले न्यूनतम प्रवाह बनाए रखा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर अखाड़ा परिषद दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भी लिखेगा।

स्वामी हरि चैतन्य का दावा, एक बूंद भी गंगा में गंगा में नहीं छोड़ा जा रहा जल

हाईकोर्ट में गंगा के प्रवाह से संबंधित मुकदमा चलने के बावजूद एक बूंद भी जल बैराजों से गंगा में नहीं छोड़ा जा रहा है। इसी वजह से गंगा की धारा लगातार सिमट रही है। प्रयागराज में गंगा दशहरा पर लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से आते हैं, लेकिन इस बड़े स्नान पर्व पर भी गंगा में न्यूनतम प्रवाह बनाए रखने की चिंता नहीं की गई।

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