फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Samosa will now become the unique identity of Prayagraj, selected under the 'One District One Dish' scheme.

Prayagraj : समोसा अब बनेगा प्रयागराज की अनोखी पहचान, ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के तहत किया गया चयन

Wed, 29 Apr 2026 11:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 29 Apr 2026 11:31 AM IST
सार

कचौड़ी, इमरती और रबड़ी वाली लस्सी समेत कई व्यंजनों को पीछे छोड़कर समोसा ने बाजी मार ली है। समोसा अब जिले की अनोखी पहचान बनेगा। इस वर्ष के बजट में शुरू की गई ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के तहत समोसा का चयन किया गया है।

विज्ञापन
Samosa will now become the unique identity of Prayagraj, selected under the 'One District One Dish' scheme.
समोसा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कचौड़ी, इमरती और रबड़ी वाली लस्सी समेत कई व्यंजनों को पीछे छोड़कर समोसा ने बाजी मार ली है। समोसा अब जिले की अनोखी पहचान बनेगा। इस वर्ष के बजट में शुरू की गई ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के तहत समोसा का चयन किया गया है।

विज्ञापन

उपायुक्त उद्योग शरद टंडन का कहना है कि जिले के व्यंजन के रूप में चयन की प्रक्रिया के अंतर्गत स्थानीय संस्कृति, खानपान और परंपराओं की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों से अलग-अलग परामर्श लिया गया। स्थानीय व्यंजनों और खानपान से जुड़ी मंडल स्तरीय विशेषज्ञ समिति से भी सुझाव लिए गए।

विज्ञापन


इससे इतर खानपान से जुड़े लोगों से भी रायशुमारी की गई। विभाग ने समोसा के उत्पादन और बिक्री से जुड़ी जानकारियों के आकलन के लिए सर्वेक्षण कर शासन को भेज दिया है। योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठान संचालित करने वाले और कारोबार शुरू करने वाले लोगों को आर्थिक मदद और प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में 1,000 से अधिक कार्यशील इकाइयां

उपायुक्त उद्योग का कहना है कि सर्वेक्षण के बाद पाया गया कि जिले में इससे जुड़ी 1,000 से अधिक कार्यशील इकाइयां हैं। इसमें 600 मैन्यूफैक्चरर, 200 स्ट्रीट वेंडर, 200 रेस्टोरेंट और लगभग 12 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। समोसा बनाने वाली 30 बड़ी इकाइयों की सूची भी विभाग ने तैयार की है।

संस्कृति और पर्यटन के साथ व्यंजन का संगम

इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक कालीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. हेरंब चतुर्वेदी का कहना है कि भारत में व्यंजनों की समृद्ध विरासत है। समोसा दूसरे वर्ग में आता है। 11वीं सदी के इतिहासकार अबुल फल बेहाकी ने अपनी पुस्तक ‘तारीख-ए-बेहाकी’ में ‘सम्बोसा’ का जिक्र किया है। समोसा ईरान से 13वीं सदी में भारत आया। इसका उस समय वहां नाम सनबोसाग था जिसका अर्थ होता है त्रिकोण परतनुमा डिश जिसमें चिलगोजा या मीट के अंश भरावन में होते थे। संस्कृति और मिजाज को समझने वाले समीक्षक और लेखक रविनंदन सिंह का कहना है कि समोसे का गढ़ लोकनाथ रहा है। यहां नमकीन समोसे के साथ मीठे समोसे की जुगलबंदी ने भी इसे जन-जन तक पहुंचाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed