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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Sai Baba comes to Kumbh Mela, takes a dip in the Sangam every day

Mahakumbh 2025 : कुंभ मेले में आते हैं साईं बाबा, रोज लगाते हैं संगम में डुबकी; बुजुर्ग की तरह होती है सेवा

Fri, 14 Feb 2025 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 14 Feb 2025 06:09 AM IST
सार

संगम में पिछले 29 सालों से लगातार शिरडी के साईं बाबा का शिविर लगाया जा रहा है। शिरडी साईं स्प्रिचुअल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी  ने कहा कि हम लोग तो घर के बुजुर्ग की तरह साईं बाबा की सेवा करते हैं। ममता प्रकाश से आलोक कुमार त्रिपाठी की विशेष बातचीत...

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Sai Baba comes to Kumbh Mela, takes a dip in the Sangam every day
महाकुंभ - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ में संपूर्ण विश्व के मत, मतावलंबी और पंथ एकाकार हो रहे हैं। साईं भक्त रोजाना शिविर से उनकी प्रतिमा लेकर गंगा स्नान के लिए जाते हैं। संगम में पिछले 29 सालों से लगातार शिरडी के साईं बाबा का शिविर लगाया जा रहा है। शिरडी साईं स्प्रिचुअल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी  ने कहा कि हम लोग तो घर के बुजुर्ग की तरह साईं बाबा की सेवा करते हैं। ममता प्रकाश से आलोक कुमार त्रिपाठी की विशेष बातचीत...

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महाकुंभ में साईं बाबा का शिविर कब से लगा रही हैं?
साईं बाबा का शिविर 1995 में पहली बार माघ मेले में लगना शुरू हुआ था। इसके बाद हर साल माघ मेला, कुंभ, और महाकुंभ में शिविर का संचालन किया जाता है। देश भर से साईं भक्त त्रिवेणी स्नान और कल्पवास के लिए यहां आते हैं। 
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मंदिरों में साईं बाबा की प्रतिमा पर धर्माचार्यों ने आपत्ति जताई थी, क्या कहेंगी?
हिंदू धर्म में ही कितने मतावलंबी हैं। कुछ कंकण को ही शंकर मान लेते हैं। सबकी अपनी-अपनी आस्था है। सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जिसमें कोई किसी के विश्वास का विरोध नहीं करता है। साईं बाबा के बारे में इस तरह की भावना रखना, बड़े-बड़े धर्मात्मा और पढ़े लिखे विद्वान लोग जब इस तरह की बात करते हैं तो यह बहुत दुख का विषय है। यहां तो पत्थर की भी पूजा करते हैं। 
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साईं बाबा में विश्वास और आस्था पर आपका क्या कहना है?
कुछ विश्वास होता है जो फलित होता है। ऐसा ही हम लोगों का साईं बाबा में विश्वास है। आस्था की बात क्या कहें? जब मेरे बेटे की मौत हुई तो एक तरफ उसका शव रखा था और मेरे पति सीपी गुप्ता ने उस समय भी साईं बाबा की आरती उतारी। उनके गुरु ने कहा कि अगर मेरे साथ ऐसा हादसा होता तो मैं तो मूर्ति उठाकर फेंक देता। तब मेरे पति ने कहा कि जब मेरा बेटा बीमार हुआ तो उस समय में उसे दिखाने में ही परेशान रहा, बाबा से कुछ कह ही नहीं पाया। हमारे यहां उस दिन आरती हुई, बहुत से लोगों ने उल्टा सीधा भी कहा।  

आपको भी विरोध झेलना पड़ा?
प्रयागराज में तो हमको कोई विरोध नहीं झेलना पड़ा। हम लोगों के यहां कुछ लोगों का फोन आया कि सुरक्षा बढ़वाइए। हमें बताया गया कि विरोध वहां हो रहा है जिन मंदिरों में साईं बाबा की प्रतिमा रखी है। हमारे यहां तो साईं बाबा का ही मंदिर था। इस तरह का काम करने वालों के मन में क्या था भगवान ही जानें। महाकुंभ में तो कोई विरोध नहीं झेलना पड़ा। किसी के विचार को लेकर क्या कर सकते हैं? किसी की भी आस्था को चोट पहुंचाना अच्छी बात नहीं होती है।  


साईं बाबा को भगवान मानती हैं कि देवदूत
न देवदूत मानते हैं ना भगवान मानते हैं। हमारे गुरु ने कहा था कि उनको अपने घर का बुजुर्ग समझना। हम लोग उनको अपने घर का बुजुर्ग ही समझते हैं। उन्होंने कहा था कि अगर तुम उनको भगवान मानोगे तो बहुत कुछ पाबंदियां होंगी। घर का बुजुर्ग समझकर करोगी तो बहुत से कर्मकांड और पाबंदियां नहीं होंगी। अगर तुम बासी रोटी भी खा रही हो तो वही बासी रोटी उनको भी अर्पित कर सकते हो। हम लोग तो यही मानते हैं।

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