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Prayagraj News: कोलकाता के सिलीगुड़ी, कंकुरगाछी के दो खातों में गए 1.43 करोड़ रुपये
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कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के बेटे के अकाउंटेंट से 2.08 करोड़ की ठगी में पुलिस को एक अहम जानकारी मिली है। पता चला है कि बरेली के अलावा कोलकाता के जिन दो खातों में रकम ट्रांसफर की गई, वह सिलीगुड़ी और कंकुरगाछी स्थित बैंक में खुलवाए गए। पुलिस अब इन खातों के धारकों का नाम-पता मालूम करने में जुट गई है।
एक दिन पहले इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया गया था कि साइबर ठगों ने मंत्री के बेटे के अकाउंटेंट से ठगी कर उड़ाई 2.08 करोड़ की रकम तीन खातों में ट्रांसफर की। इनमें से एक बरेली स्थित आईसीआईसीआई बैंक का खाता था।
इस खाते में 65 लाख रुपये आए और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इस लेनदेन से संबंधित पांचों लोग, जिनमें साइबर ठग गिरोह के दो एजेंट भी शामिल रहे, रविवार को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच आगे बढ़ाने पर पता चला है कि कोलकाता के जिन दो खातों में 1.43 करोड़ रुपये भेजे गए, वह सिलिगुड़ी और कंकुरगाछी स्थित बैंक शाखाओं में खुलवाए गए।
पहला खाता कोलकाता के मानिकतला मेन रोड स्थित एक्सिस बैंक की कंकुरगाछी शाखा का है। इसमें ठगी की रकम में से कुल 68 लाख रुपये भेजे गए। दूसरा खाता यूको बैंक की सिलिगुड़ी, दार्जिलिंग रोड शाखा का है, जिसमें 75 लाख रुपये डाले गए। पुलिस अब इनके खाताधारकों का नाम पता करने में जुट गई है।
इसके लिए संंबंधित बैंकों से पत्राचार किया जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि बैंकों की ओर से डिटेल मिलने के बाद पुलिस की टीमें जल्द ही कोलकाता भी जा सकती हैं। पुलिस का मानना है कि खाताधारकों के पकड़े जाने के बाद ही इस मामले की जांच आगे बढ़ सकेगी। उनसे पूछताछ के बाद ही पता चलेगा कि उन्होंने अपने खाते का एक्सेस किसे दिया था।
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आठ दिन में पार कर दिए 1.96 करोड़ रुपये
पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि मंत्री के बेटे के अकाउंटेंट से ठगी गई रकम में से कुल 1.96 करोड़ रुपये साइबर ठग गिरोह ने महज आठ दिनों में ठिकाने लगा दिए। दरअसल, 14 नवंबर को रिपाेर्ट दर्ज होने के साथ ही पुलिस इस मामले की पड़ताल में जुट गई थी। 22 नवंबर तक पुलिस को आराेपियों का सुराग मिल गया और अगले ही दिन उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया। हालांकि, उनसे पूछताछ व जांच के क्रम में यह पता चला कि ठगी की रकम में से केवल 12.22 लाख रुपये ही एक खाते में बचे हैं, जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया। शेष रकम के बारे में पता चला कि इन्हें अलग-अलग कई खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। कोलकाता के दो खातों से भी कुछ ऐसा ही किए जाने की आशंका है। क्योंकि इन दोनों खातों में भेजे गए 1.43 करोड़ रुपये में से केवल 12.22 लाख रुपये ही शेष मिले हैं।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं वादी
उधर पुलिस की ओर से वादी रितेश श्रीवास्तव को सीए बताने को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सीआईआरसी की प्रयागराज शाखा के सीए गौरव मिश्रा ने गलत बताया है। उनका कहना है कि वादी सीए नहीं बल्कि अकाउंटेंट है। गौरतलब है कि पुलिस की ओर से इस संबंध में जारी प्रेस नोट में वादी को सीए बताया गया है।
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एक दिन पहले इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया गया था कि साइबर ठगों ने मंत्री के बेटे के अकाउंटेंट से ठगी कर उड़ाई 2.08 करोड़ की रकम तीन खातों में ट्रांसफर की। इनमें से एक बरेली स्थित आईसीआईसीआई बैंक का खाता था।
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इस खाते में 65 लाख रुपये आए और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इस लेनदेन से संबंधित पांचों लोग, जिनमें साइबर ठग गिरोह के दो एजेंट भी शामिल रहे, रविवार को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच आगे बढ़ाने पर पता चला है कि कोलकाता के जिन दो खातों में 1.43 करोड़ रुपये भेजे गए, वह सिलिगुड़ी और कंकुरगाछी स्थित बैंक शाखाओं में खुलवाए गए।
पहला खाता कोलकाता के मानिकतला मेन रोड स्थित एक्सिस बैंक की कंकुरगाछी शाखा का है। इसमें ठगी की रकम में से कुल 68 लाख रुपये भेजे गए। दूसरा खाता यूको बैंक की सिलिगुड़ी, दार्जिलिंग रोड शाखा का है, जिसमें 75 लाख रुपये डाले गए। पुलिस अब इनके खाताधारकों का नाम पता करने में जुट गई है।
इसके लिए संंबंधित बैंकों से पत्राचार किया जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि बैंकों की ओर से डिटेल मिलने के बाद पुलिस की टीमें जल्द ही कोलकाता भी जा सकती हैं। पुलिस का मानना है कि खाताधारकों के पकड़े जाने के बाद ही इस मामले की जांच आगे बढ़ सकेगी। उनसे पूछताछ के बाद ही पता चलेगा कि उन्होंने अपने खाते का एक्सेस किसे दिया था।
आठ दिन में पार कर दिए 1.96 करोड़ रुपये
पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि मंत्री के बेटे के अकाउंटेंट से ठगी गई रकम में से कुल 1.96 करोड़ रुपये साइबर ठग गिरोह ने महज आठ दिनों में ठिकाने लगा दिए। दरअसल, 14 नवंबर को रिपाेर्ट दर्ज होने के साथ ही पुलिस इस मामले की पड़ताल में जुट गई थी। 22 नवंबर तक पुलिस को आराेपियों का सुराग मिल गया और अगले ही दिन उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया। हालांकि, उनसे पूछताछ व जांच के क्रम में यह पता चला कि ठगी की रकम में से केवल 12.22 लाख रुपये ही एक खाते में बचे हैं, जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया। शेष रकम के बारे में पता चला कि इन्हें अलग-अलग कई खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। कोलकाता के दो खातों से भी कुछ ऐसा ही किए जाने की आशंका है। क्योंकि इन दोनों खातों में भेजे गए 1.43 करोड़ रुपये में से केवल 12.22 लाख रुपये ही शेष मिले हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं वादी
उधर पुलिस की ओर से वादी रितेश श्रीवास्तव को सीए बताने को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सीआईआरसी की प्रयागराज शाखा के सीए गौरव मिश्रा ने गलत बताया है। उनका कहना है कि वादी सीए नहीं बल्कि अकाउंटेंट है। गौरतलब है कि पुलिस की ओर से इस संबंध में जारी प्रेस नोट में वादी को सीए बताया गया है।