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संकट में संगमनगरी, खतरे के निशान को पार कर उफान मार रही गंगा, बढ़ सकता है यमुना का पानी
Wed, 18 Sep 2019 12:47 AM IST
Prachi Priyam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: Prachi Priyam
Updated Wed, 18 Sep 2019 12:47 AM IST
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प्रयागराज में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार की शाम गंगा खतरे के निशान को पार कर गई, जबकि यमुना किसी भी समय खतरे के निशान को पार कर सकती है। इस बीच राजस्थान के कोटा और धौलपुर बांधों से फिर 26 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की खबर है। इससे आने वाले कुछ दिनों के भीतर तटवर्ती इलाकों में बाढ़ से हालात और बिगड़ने की आशंका है। बाढ़ के संकट को देखते हुए प्रशासन राहत और बचाव में जुट गया है।
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गंगा-यमुना के जलस्तर की रफ्तार मंगलवार को धीमी रही। दिन में एक से डेढ़ सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से जल स्तर बढ़ता रहा। दोपहर 12 बजे गंगा खतरे के निशान पर पहुंच गई। इसके बाद शाम चार बजे तक एक सेमी और जलस्तर में वृद्धि दर्ज होने के साथ ही गंगा खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी।
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रात आठ बजे गंगा स्थिर हो गई थी, जबकि यमुना आधा सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही थी। मंगलवार की सुबह एक बार फिर राजस्थान के धौलपुर बांध से 21.65 लाख, 386 क्यूसेक और कोटा बांध से 5.39 लाख, 826 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई। चंबल में बाढ़ के बाद लगातार यमुना में भारी जलराशि छोड़े जाने को लेकर यहां प्रशासन राहत व बचाव के लिए मुस्तैद हो गया है।
जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने दिन में कई बार हालात की समीक्षा की और अफसरों को राहत शिविरों में खाने के पैकेट, बिजली, पानी व दवा के समुचित इंतजाम रखने के निर्देश दिए। इस बीच कछारी इलाकों में बाढ़ का दायरा बढ़ने से हजारों घरों में पानी भरने से अफरा-तफरी मची रही। लोग राहत शिविरों के अलावा किराए के घरों या फिर परिचितों के यहां शरण ले रहे हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में बिजली-पानी काटी जा रही है और गृहस्थी बचाना मुश्किल हो गया है।
झूंसी का श्मशान घाट भी बाढ़ की चपेट में
प्रयागराज। बाढ़ की चपेट में झूंसी का छतनाग श्मशान घाट भी आ गया है। कुंभ मेले के दौरान करोड़ों के बजट से बनाए गए दोनों स्नान घाट बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। श्मशान घाट की बारादरी और उसके बगल स्थित प्राचीन मंदिर भी बाढ़ में डूबे हुए हैं। ऊंचाई पर खाली पड़ी जगह पर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। प्रतापगढ़ के इंद्रबहादुर यादव ने बताया कि नाविकों द्वारा मदद करने को कौन कहे, वे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मोटी रकम वसूल रहे हैं। उधर, प्रशासन नाविकों की मनमानी को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
उफनाए नाले में डूबकर महिला की मौत
घूरपुर। थाना क्षेत्र के पालपुर गांव में सोमवार को भैंस चराने गई उर्मिला देवी (44) पत्नी नंदलाल की उफनाए नाले में डूबकर मौत हो गई। महिला नाले में फंसी भैंस को निकालने का प्रयास कर रही थी, तभी वह बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई। मंगलवार को उसका शव बरामद हुआ।