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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए हुई धांधली
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 15 Apr 2017 01:17 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा (2016-17) में व्यापक पैमाने पर धांधली हुई। यह आरोप छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने विश्वविद्यालय से जनसूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर लगाया है। अध्यक्ष ने सुबूत के तौर पर कुछ दस्तावेज केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपे हैं और मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन इस आरोप को खारिज कर रहा है। अफसरों का कहना है कि अध्यक्ष के पास कोई दस्तावेज है तो उसे विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पेश करना चाहिए। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय में निजी एजेंसी टीसीएस को प्रवेश परीक्षा (सत्र 2016-17) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में एजेंसी पर अनियमितता के आरोप लगे तो उसका भुगतान रोक दिया गया और एजेंसी को भी इस प्रक्रिया से अलग कर दिया गया। अब इसके लिए नई एजेंसी का चयन कर लिया गया है। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि गलती एजेंसी की नहीं थी, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिजल्ट के साथ छेड़छाड़ की थी। रोहित के पास कुछ दस्तावेज हैं। इनमें विश्वविद्यालय से जन सूचना अधिकार के तहत मिले वह दस्तावेज हैं, जिनमें पांच विभागों में प्रवेश परीक्षा के रिजल्ट शामिल हैं। इसके अलावा टीएस एजेंसी ने जो परिणाम जारी किए, उससे संबंधित दस्तावेज हैं। हालांकि निजी एजेंसी पर जनसूचना अधिकार का नियम लागू नहीं होता है। रोहित का दावा है कि निजी एजेंसी से उन्होंने अपने संपर्कों के आधार पर दस्तावेज प्राप्त किए हैं और यह पूरी तरह से विश्वसनीय हैं।
दोनों का मिलान करने पर नंबरों में काफी अंतर आ रहा है। कई परीक्षार्थियों को टीसीएस ने जो नंबर दिए, उन नंबरों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बदल दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जनसूचना अधिकार के तहत दिए गए दस्तावेज इसे साबित भी कर रहे हैं। इनमें से एक छात्र ऐसा है जिसके लिए कहा जाता है कि वह कुलपति के काफी करीब है। प्रवेश परीक्षा में टीसीएस ने ओएमआर शीट के जांच के बाद उसे 147 अंक दिए जबकि विश्वविद्यालय ने उसके अंक को बढ़ाकर 164.90 कर दिया। इसी तरह एक छात्र को टीसीएस ने 102.85 अंक दिए और विश्वविद्यालय ने उसके अंक को बढ़ाकर 160.50 कर दिया। अध्यक्ष का आरोप है कि वह छात्र तत्कालीन प्रवेश निदेशक का करीबी रिश्तेदार है। इसी तरह पांच विभागों में तकरीबन 18 छात्रों के अंकों से छेड़छाड़ की गई और इनमें से ज्यादातर छात्रों के अंक बाद में बढ़ा दिए गए। अध्यक्ष ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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- छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रवेश में हुई धांधली का खुलासा किए जाने के बाद उनकी जान पर खतरा मंडरा रहा है। कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए कुलपति जिम्मेदार होंगे। अध्यक्ष ने कहा कि पहले उन्हें निलंबित किया गया और विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित भी कर दिया गया। अब उन पर हमला कराए जाने की साजिश की जा रही है।
‘तीन माह पहले हुए आंदोलन के दौरान भी छात्रसंघ अध्यक्ष ने प्रवेश परीक्षा में धांधली के आरोप लगाए थे। उस वक्त कुलपति ने अध्यक्ष से कहा था कि प्रमाण दीजिए, जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी जरूर होगी लेकिन अध्यक्ष ने कोई प्रमाण नहीं दिया। अगर वह मामले कार्रवाई चाहते थे तो एफिडेविट के साथ सुबूत देना चाहिए था। उनकी ओर से प्रस्तुत किसी भी दस्तावेज को बिना जांच के कोई सुबूत नहीं माना जा सकता।’ -प्रो. हर्ष कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी
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विश्वविद्यालय में निजी एजेंसी टीसीएस को प्रवेश परीक्षा (सत्र 2016-17) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में एजेंसी पर अनियमितता के आरोप लगे तो उसका भुगतान रोक दिया गया और एजेंसी को भी इस प्रक्रिया से अलग कर दिया गया। अब इसके लिए नई एजेंसी का चयन कर लिया गया है। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि गलती एजेंसी की नहीं थी, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिजल्ट के साथ छेड़छाड़ की थी। रोहित के पास कुछ दस्तावेज हैं। इनमें विश्वविद्यालय से जन सूचना अधिकार के तहत मिले वह दस्तावेज हैं, जिनमें पांच विभागों में प्रवेश परीक्षा के रिजल्ट शामिल हैं। इसके अलावा टीएस एजेंसी ने जो परिणाम जारी किए, उससे संबंधित दस्तावेज हैं। हालांकि निजी एजेंसी पर जनसूचना अधिकार का नियम लागू नहीं होता है। रोहित का दावा है कि निजी एजेंसी से उन्होंने अपने संपर्कों के आधार पर दस्तावेज प्राप्त किए हैं और यह पूरी तरह से विश्वसनीय हैं।
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दोनों का मिलान करने पर नंबरों में काफी अंतर आ रहा है। कई परीक्षार्थियों को टीसीएस ने जो नंबर दिए, उन नंबरों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बदल दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जनसूचना अधिकार के तहत दिए गए दस्तावेज इसे साबित भी कर रहे हैं। इनमें से एक छात्र ऐसा है जिसके लिए कहा जाता है कि वह कुलपति के काफी करीब है। प्रवेश परीक्षा में टीसीएस ने ओएमआर शीट के जांच के बाद उसे 147 अंक दिए जबकि विश्वविद्यालय ने उसके अंक को बढ़ाकर 164.90 कर दिया। इसी तरह एक छात्र को टीसीएस ने 102.85 अंक दिए और विश्वविद्यालय ने उसके अंक को बढ़ाकर 160.50 कर दिया। अध्यक्ष का आरोप है कि वह छात्र तत्कालीन प्रवेश निदेशक का करीबी रिश्तेदार है। इसी तरह पांच विभागों में तकरीबन 18 छात्रों के अंकों से छेड़छाड़ की गई और इनमें से ज्यादातर छात्रों के अंक बाद में बढ़ा दिए गए। अध्यक्ष ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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- छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रवेश में हुई धांधली का खुलासा किए जाने के बाद उनकी जान पर खतरा मंडरा रहा है। कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए कुलपति जिम्मेदार होंगे। अध्यक्ष ने कहा कि पहले उन्हें निलंबित किया गया और विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित भी कर दिया गया। अब उन पर हमला कराए जाने की साजिश की जा रही है।
‘तीन माह पहले हुए आंदोलन के दौरान भी छात्रसंघ अध्यक्ष ने प्रवेश परीक्षा में धांधली के आरोप लगाए थे। उस वक्त कुलपति ने अध्यक्ष से कहा था कि प्रमाण दीजिए, जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी जरूर होगी लेकिन अध्यक्ष ने कोई प्रमाण नहीं दिया। अगर वह मामले कार्रवाई चाहते थे तो एफिडेविट के साथ सुबूत देना चाहिए था। उनकी ओर से प्रस्तुत किसी भी दस्तावेज को बिना जांच के कोई सुबूत नहीं माना जा सकता।’ -प्रो. हर्ष कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी