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जीएम बोले, यात्री हित में है बोर्ड का पुनर्गठन
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प्रयागराज। रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर रेल यूनियनें भले ही हल्ला मचाए लेकिन जीएम एनसीआर राजीव चौधरी इस निर्णय को यात्री हित में मानते हैं। उनका कहना है कि भारतीय रेलवे प्रबंधक सेवा नाम की एक केंद्रीय सेवा से भले ही कुछ अफसरों को दिक्कत हो लेकिन कर्मचारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। रेलवे की कार्यशैली तकनीकी है। इस परिप्रेक्ष्य में कुछ खींचतान जरूर है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम सकारात्मक है। यह निर्णय रेलवे की विकास यात्रा का इंजन बनने में सहायक होगा।
दरअसल मंगलवार को ही मोदी कैबिनेट ने ‘इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस’ नाम की नई सेवा की घोषणा की। इस घोषणा के बाद से ही रेल यूनियनें विरोध में उतर गई। यूनियन ने इसे रेल निजीकरण की ओर बढ़ने वाला रास्ता बताया। यूनियनों के विरोध के चलते बृहस्पतिवार को जीएम एनसीआर राजीव चौधरी ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय से तमाम सुधार होंगे। वर्ष 2021 से यह कमेटी काम शुरू कर देगी। इसके तहत रेलवे बोर्ड मुख्य रूप से नीति बनाएगा। इसे जीएम और डीआरएम स्तर पर तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे। ऐसे में यात्री सुविधा के काम तेजी से होंगे। सभी जीएम को इस दौरान केंद्र सरकार के सचिव के बराबर का स्तर दिया जाएगा। इससे तमाम निर्णय जल्द लिए जा सकेंगे। उन्होंने निजीकरण के सवाल पर कहा कि इससे निजीकरण नहीं होगा। लेकिन रेलवे आउट सोर्सिंग जरूर करेगी। रेलवे बोर्ड की पांच सदस्यीय टीम पालिसी बनाने पर काम करेगी। रेलवे के बिजनेस हित को देखते हुए जल्द निर्णय लिए जाएंगे। परियोजनाएं जल्द स्वीकृति होंगी। काम जल्द समाप्त होगा। भविष्य में रेल परिचालन और बेहतर होगा। भर्ती किए जाने वाले अफसर टेक्निकल और नॉन टेक्निकल क्षेत्रों से आएंगे। उनकी विशेषज्ञता के अनुसार तैनाती की जाएगी।
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दरअसल मंगलवार को ही मोदी कैबिनेट ने ‘इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस’ नाम की नई सेवा की घोषणा की। इस घोषणा के बाद से ही रेल यूनियनें विरोध में उतर गई। यूनियन ने इसे रेल निजीकरण की ओर बढ़ने वाला रास्ता बताया। यूनियनों के विरोध के चलते बृहस्पतिवार को जीएम एनसीआर राजीव चौधरी ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय से तमाम सुधार होंगे। वर्ष 2021 से यह कमेटी काम शुरू कर देगी। इसके तहत रेलवे बोर्ड मुख्य रूप से नीति बनाएगा। इसे जीएम और डीआरएम स्तर पर तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे। ऐसे में यात्री सुविधा के काम तेजी से होंगे। सभी जीएम को इस दौरान केंद्र सरकार के सचिव के बराबर का स्तर दिया जाएगा। इससे तमाम निर्णय जल्द लिए जा सकेंगे। उन्होंने निजीकरण के सवाल पर कहा कि इससे निजीकरण नहीं होगा। लेकिन रेलवे आउट सोर्सिंग जरूर करेगी। रेलवे बोर्ड की पांच सदस्यीय टीम पालिसी बनाने पर काम करेगी। रेलवे के बिजनेस हित को देखते हुए जल्द निर्णय लिए जाएंगे। परियोजनाएं जल्द स्वीकृति होंगी। काम जल्द समाप्त होगा। भविष्य में रेल परिचालन और बेहतर होगा। भर्ती किए जाने वाले अफसर टेक्निकल और नॉन टेक्निकल क्षेत्रों से आएंगे। उनकी विशेषज्ञता के अनुसार तैनाती की जाएगी।
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