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आपराधिक केस के आधार पर ज्वाइन न कराने पर जवाब तलब
Thu, 18 Feb 2021 08:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 18 Feb 2021 08:03 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट स्टॉफ सेवा में चयनित अभ्यर्थी को आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आधार पर ज्वाइन न कराने पर प्रदेश सरकार व अन्य पक्षकारों से जवाब तलब किया है। याची का कहना था कि वह उप्र सिविल कोर्ट स्टाफ सेंट्रलाइज्ड सेवा भर्ती बोर्ड से चयनित हुआ है इसके बावजूद उसे काम पर नहीं लिया जा रहा है। याचिका की सुनवाई 18 मार्च को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अभिजीत सिंह की याचिका पर दिया है।
याची चपरासी के पद पर चयनित हुआ है। उसकी नियुक्ति आजमगढ़ में की गई है। इससे पहले उसने ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा दी थी। आयोग ने याची सहित 137 लोगों के खिलाफ ओएमआर सीट में अंतर होने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। याची का कहना है कि आयोग ने याची को तीन साल के लिए परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इसी केस के आधार पर याची की चतुर्थश्रेणी पद पर नियुक्ति होने के बाद भी उसे ज्वाइन नहीं कराया जा रहा है। याची किसी अपराध में दोषी करार नहीं दिया गया है। उसके विधिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
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याची चपरासी के पद पर चयनित हुआ है। उसकी नियुक्ति आजमगढ़ में की गई है। इससे पहले उसने ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा दी थी। आयोग ने याची सहित 137 लोगों के खिलाफ ओएमआर सीट में अंतर होने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। याची का कहना है कि आयोग ने याची को तीन साल के लिए परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इसी केस के आधार पर याची की चतुर्थश्रेणी पद पर नियुक्ति होने के बाद भी उसे ज्वाइन नहीं कराया जा रहा है। याची किसी अपराध में दोषी करार नहीं दिया गया है। उसके विधिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
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