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Prayagraj News: स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने का दावा खारिज करने के मामले में मांगा जवाब
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने का दावा खारिज किए जाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से जिस रजिस्टर की प्रति प्रस्तुत की गई है। उसका निरीक्षण कर स्पष्ट तथ्यों के साथ जवाब दाखिल किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने कुशीनगर निवासी विमलेश पांडेय की याचिका पर दिया।
याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 14 फरवरी 2012 को पारित आदेश से विमलेश पांडेय का स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने का दावा खारिज कर दिया गया था। यह आदेश प्रासंगिक अभिलेखों पर विचार किए बिना पारित किया गया।
अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष नकल रजिस्टर की प्रति प्रस्तुत करते हुए कहा कि उसमें याची के पिता के हिरासत से फरार होने की स्पष्ट प्रविष्टि दर्ज है। यह प्रविष्टि इस बात का साक्ष्य है कि उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण गिरफ्तार किया गया था।
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राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित रजिस्टर का निरीक्षण कर उसके संबंध में स्पष्ट तथ्य बताते हुए प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
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याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 14 फरवरी 2012 को पारित आदेश से विमलेश पांडेय का स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने का दावा खारिज कर दिया गया था। यह आदेश प्रासंगिक अभिलेखों पर विचार किए बिना पारित किया गया।
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अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष नकल रजिस्टर की प्रति प्रस्तुत करते हुए कहा कि उसमें याची के पिता के हिरासत से फरार होने की स्पष्ट प्रविष्टि दर्ज है। यह प्रविष्टि इस बात का साक्ष्य है कि उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण गिरफ्तार किया गया था।
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राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित रजिस्टर का निरीक्षण कर उसके संबंध में स्पष्ट तथ्य बताते हुए प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।