{"_id":"61113cfc8ebc3e7b344c7569","slug":"reply-called-for-delay-in-investigation-of-1600-crore-scam-in-bundelkhand-power-project","type":"story","status":"publish","title_hn":" बुंदेलखंड विद्युत परियोजना में 1600 करोड़ के घोटाले की विवेचना में देरी पर जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड विद्युत परियोजना में 1600 करोड़ के घोटाले की विवेचना में देरी पर जवाब तलब
Mon, 09 Aug 2021 08:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 09 Aug 2021 08:04 PM IST
सार
- आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी न होने पर कोर्ट ने मांगी जानकारी
विज्ञापन
allahabad high court
- फोटो : social media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड विद्युतीकरण योजना के तहत झांसी के 23 गांवों के विद्युतीकरण में 1600 करोड़ के घोटाले पर राज्य सरकार को 24अगस्त तक का अतिरिक्त समय दिया है और पूछा है कि विवेचना पूरी करने में देरी क्यों की जा रही है। कौन से कारण हैं जिनके चलते भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट ने एफआईआर में 1600 करोड़ के घोटाले को गंभीर माना और कहा कि यदि संसाधनों की कमी के कारण संबंधित थाने की पुलिस विवेचना नहीं कर पा रही है तो सरकार दूसरी जांच एजेंसी को विवेचना क्यों स्थानांतरित नहीं कर देती। अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में देरी की सराहना नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता एस ए मुर्तजा ने जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय की मांग की जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 24अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की खंडपीठ ने गिरराज सिंह की जनहित याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि भारी संख्या में गांवों के लोग विवेचना में शामिल हैं।अब तक क्या तथ्य इकट्ठा किए गए हैं।यदि आरोपी अधिकारी जमानत पर नहीं हैं तो क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है। यदि गिरफ्तार नहीं किया गया है तो क्या कारण है। जिसके लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
याची का कहना है कि मेसर्स आई वी आर सी एल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट लि हैदराबाद व बिजली विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रूपए का बिना काम किए भुगतान लिया गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर एफ आई आर दर्ज कराई गई है।जिसकी जांच बिजिलेंस विभाग कर रहा है।
5 जुलाई 19 को थाना नवाबाद , झांसी में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
विज्ञापन
कोर्ट ने एफआईआर में 1600 करोड़ के घोटाले को गंभीर माना और कहा कि यदि संसाधनों की कमी के कारण संबंधित थाने की पुलिस विवेचना नहीं कर पा रही है तो सरकार दूसरी जांच एजेंसी को विवेचना क्यों स्थानांतरित नहीं कर देती। अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में देरी की सराहना नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता एस ए मुर्तजा ने जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय की मांग की जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 24अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की खंडपीठ ने गिरराज सिंह की जनहित याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि भारी संख्या में गांवों के लोग विवेचना में शामिल हैं।अब तक क्या तथ्य इकट्ठा किए गए हैं।यदि आरोपी अधिकारी जमानत पर नहीं हैं तो क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है। यदि गिरफ्तार नहीं किया गया है तो क्या कारण है। जिसके लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
याची का कहना है कि मेसर्स आई वी आर सी एल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट लि हैदराबाद व बिजली विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रूपए का बिना काम किए भुगतान लिया गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर एफ आई आर दर्ज कराई गई है।जिसकी जांच बिजिलेंस विभाग कर रहा है।
5 जुलाई 19 को थाना नवाबाद , झांसी में एफआईआर दर्ज कराई गई है।