High Court : पासपोर्ट का नवीनीकरण नागरिकों का मौलिक अधिकार, आपराधिक मुकदमा लंबित रहते नवीनीकरण संभव
यह आदेश न्यायमूर्ति नंदप्रभा शुक्ला की एकल पीठ ने आगरा निवासी नौसेना अधिकारी विश्वेंद्र सिंह की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याची ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आगरा (सीजेएम)के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट ने आपराधिक मुकदमा लंबित के दौरान पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए से मांगी गई अनुमति देने से इन्कार कर दिया था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट का नवीनीकरण नागरिकों का मौलिक अधिकार है। आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति नंदप्रभा शुक्ला की एकल पीठ ने आगरा निवासी नौसेना अधिकारी विश्वेंद्र सिंह की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याची ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आगरा (सीजेएम)के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट ने आपराधिक मुकदमा लंबित के दौरान पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए से मांगी गई अनुमति देने से इन्कार कर दिया था।
मामला आगरा के न्यू आगरा थाना क्षेत्र का है। याची नौसेना में अधिकारी के पद पर कार्यरत है। 21 दिसंबर 2023 को मुबंई के ठाणे रेलवे स्टेशन से उसका सामान चोरी हो गया, जिसमें कई दस्तावेजों संग पासपोर्ट भी था। याची ने 16 जनवरी को फिर से पासपोर्ट जारी करने के लिए आवेदन किया था। 30 जनवरी 2024 को याची को पासपोर्ट कार्यालय से सूचना दी गई कि न्यू आगरा थाने की ओर से दोबारा पासपोर्ट जारी करने की संस्तुति नहीं की गई है।
थाने की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक याची के खिलाफ थाने में छेड़खानी का मामला वर्ष अप्रैल 2021 में दर्ज हुआ था। विवेचना के बाद आरोप पत्र भी सीजेएम की अदालत में दाखिल किया जा चुका है। लिहाजा, याची ने आपराधिक मुकदमा लंबित रहते हुए सीजेएम की अदालत में पासपोर्ट जारी की अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की अर्जी दी थी। इसे सीजेएम ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए अनापत्ति जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं है।
विदेश यात्रा के लिए लेनी होगी अनुमति
याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि वह नौसेना में अधिकारी है। बिना पासपोर्ट के वह अपनी नौकरी नहीं कर सकता। सीजेएम की अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमा लंबे समय तक चलेगा। ऐसे में नवीनीकृत पासपोर्ट जारी करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाना अति-आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि विदेश मंत्रालय की 1993 की अधिसूचना के मुताबिक आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान नागरिकों को पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, बशर्ते वह विदेश यात्रा के लिए न्यायालय की अनुमति प्राप्त करें। मौजूदा मामले में याची पर लगाए गए आरोप जघन्य या गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और वह जमानत पर है। मिली जमानत की शर्तों में ऐसी कोई बात नहीं है कि वह विदेश यात्रा नहीं कर सकता।
कोर्ट ने सशर्त याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट में याची को यह सिद्ध करना होगा कि चोरी हुआ उसका पासपोर्ट बरामद नहीं हुआ है। साथ ही याची को यह हलफनामा देना होगा कि विदेश यात्रा से पूर्व वह ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेगा और हर तारीख पर अदालत में हाजिर रहेगा। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सीजेएम का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही पासपोर्ट प्राधिकारी को याची के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है।