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Prayagraj News: पूर्व विधायक मो. रिजवान को राहत, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा के पूर्व विधायक मो. रिजवान को बड़ी राहत दी है। संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में पक्षकारों के बीच सुलह की संभावना को देखते हुए मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया है।
मुरादाबाद के कुंदरकी थाने में पूर्व विधायक व अन्य पर तीन जुलाई 2026 को धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची ने दर्ज एफआईआर को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एफआईआर पक्षकारों के बीच संपत्ति विवाद के कारण दर्ज हुई है और दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है। पक्षकारों के अधिवक्ताओं ने भी सुलह की संभावना स्वीकार की। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को छह अगस्त 2026 को हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
अदालत ने मध्यस्थ को एक महीने के भीतर मध्यस्थता अथवा सुलह की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करने और मध्यस्थता केंद्र को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। तब तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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मुरादाबाद के कुंदरकी थाने में पूर्व विधायक व अन्य पर तीन जुलाई 2026 को धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची ने दर्ज एफआईआर को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एफआईआर पक्षकारों के बीच संपत्ति विवाद के कारण दर्ज हुई है और दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है। पक्षकारों के अधिवक्ताओं ने भी सुलह की संभावना स्वीकार की। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को छह अगस्त 2026 को हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
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अदालत ने मध्यस्थ को एक महीने के भीतर मध्यस्थता अथवा सुलह की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करने और मध्यस्थता केंद्र को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। तब तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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