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राजूपाल हत्याकांड में अतीक की जमानत निरस्त

Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
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Rejecting the anticipatory bail in Raju Pal murder case
atiq ahmed
बसपा विधायक राजूपाल हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद अतीक अहमद की जमानत निरस्त कर दी है। पूर्व विधायक पूजा पाल ने उनकी जमानत निरस्त कराने की अर्जी कोर्ट में दाखिल की थी। अतीक को हाईकोर्ट ने ही 12 अप्रैल 2005 को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
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जमानत निरस्त करने की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने कहा कि अतीक अहमद ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने न सिर्फ मुकदमे से संबंधित साक्ष्यों से छेड़छाड़ की बल्कि गवाहों का अपहरण कर उनको धमकाया और बयान बदलने पर मजबूर किया। उन्होंने वादी पूजा पाल को भी जान से मारने की धमकी दी। अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास है। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि अतीक जमानत पर रिहा होने के बाद भी लगातार अपराध करते आ रहे हैं। उन्होंने पूरे समाज को भयभीत कर रखा है।
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कोर्ट ने कहा कि 12 अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट द्वारा राजू पाल हत्याकांड में अतीक की जमानत मंजूर करते समय अतीक के लंबे आपराधिक इतिहास पर विचार नहीं किया जो कि उनको सुप्रीमकोर्ट द्वारा तय न्यायिक मानक के आधार पर करना चाहिए था। इससे भी अधिक इस बात के स्पष्ट साक्ष्य हैं कि अतीक साक्ष्यों से छेड़छाड़ करते रहे और उन्होंने गवाहों का अपहरण कर उनको प्रताड़ित किया, धमकाया और डराकर बयान बदलने पर मजबूर किया। इसलिए वह जमानत पर रहने के हकदार नहीं हैं।
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जमानत निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त पहले से जेल में है। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति डीजीपी, आईजी जेल और देवरिया जेल अधीक्षक को भेज कर अविलंब कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
याची ने जमानत देने पर उठाए थे सवाल

राजूपाल की पत्नी पूजा पाल ने अतीक की जमानत निरस्त करने की अर्जी दाखिल कर अतीक की जमानत मंजूर करने पर सवाल उठाए। पूजा पाल के अधिवक्ता मिथलेश कुमार तिवारी ने कहा कि जमानत अर्जी मात्र इस आधार पर मंजूर कर ली गई अभियुक्त पर सिर्फ आपराधिक षड्यंत्र का आरोप है। कोर्ट ने अभियुक्त के लंबे आपराधिक इतिहास पर विचार नहीं किया। जिस समय अतीक की जमानत मंजूर की गई उन पर 58 गंभीर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। वह एक गैंग के लीडर हैं और गैंग चार्ट में 138 सदस्य हैं। अतीक ने जमानत पर रिहा होने के बाद गवाह सादिक और उमेश पाल का अपहरण कर लिया और डरा धमका कर उनके बयान बदलवा दिए।

गवाहों की सुरक्षा पर बने कानून: हाईकोर्ट

अतीक की जमानत निरस्त करने संबंधी अर्जी पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के गवाहों की सुरक्षा पर भी गंभीरता से विचार किया। कोर्ट ने कहा कि गवाह किसी मुकदमे की आंख और कान होते हैं। जब वह सही तरीके से गवाही नहीं दे पाते हैं तो मुकदमों में सजा की रद्द या कम हो जाती है और गंभीर अपराधी बरी हो जाते हैं। इसका प्रभाव आपराधिक न्याय निष्पादन प्रणाली पर पड़ता और आम जनता के भरोसे का धक्का पहुंचता है। जस्टिस मलीमथ कमेटी की रिपोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर कड़ा कानून बनाने की अनुशंसा की है। इसी प्रकार से लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की 198 वीं रिपोर्ट में भी गवाहों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की सलाह दी गई है।
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