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बैनामा कराने के लिए जरूरी नहीं है पंजीकृत पावर ऑफ अटार्नी
Wed, 20 May 2020 12:41 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 20 May 2020 12:41 AM IST
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति के पंजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि संपत्ति के पंजीकरण के लिए गैर पंजीकृत पावर ऑफ अटार्नी धारक व्यक्ति भी उतना ही अधिकृत है, जितना पंजीकृत पावर ऑफ अटार्नी धारक होता है। यदि उस पर किसी प्रकार के फ्रॉड करने का आरोप साबित नहीं है तो पावर ऑफ अटार्नी का पंजीकरण न होना बैनामा कराने की राह में रोड़ा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति का पंजीकरण कराते समय मूल स्वामी द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत किया जाना चाहिए, यह दस्तावेज पावर ऑफ अटार्नी रखने वाला व्यक्ति भी मूल स्वामी के एजेंट के तौर पर प्रस्तुत कर सकता है। जब तक कि उस पर किसी प्रकार की धोखाधड़ी का आरोप साबित नहीं है।
बरेली के रवींद्र कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि राकेश चंद्र शर्मा और उनकी पत्नी कुंती शर्मा ने नेवादा में पांच प्लॉट खरीदे थे। बाद में इसकी पावर ऑफ अटार्नी उन्होंने याची को दे दी। नोटरी पर हस्ताक्षर करने वालों के दस्तखत अधिवक्ता और नोटरी द्वारा सत्यापित किए गए हैं। बाद में याची ने इनमें से तीन प्लॉट की रजिस्ट्री कराने के लिए दस्तावेज सब रजिस्ट्रार बरेली के समक्ष प्रस्तुत किया। सब रजिस्ट्रार ने कई आपत्तियां लगाते हुए रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। इनमें से एक आपत्ति यह भी थी कि याची की पावर ऑफ अटार्नी महानिदेशक निबंधन द्वारा पंजीकृत नहीं है।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन ने कहा कि पावर ऑफ अटार्नी का पंजीकृत होना कोई बाध्यता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याची के पक्ष में पावर ऑफ अटार्नी देने वालों ने उस पर किसी प्रकार का आरोप नहीं लगाया है। यह भी साबित नहीं है कि उसने किसी धोखे या छल से इसे प्राप्त किया है। ऐसे में याची को रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है।
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बरेली के रवींद्र कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि राकेश चंद्र शर्मा और उनकी पत्नी कुंती शर्मा ने नेवादा में पांच प्लॉट खरीदे थे। बाद में इसकी पावर ऑफ अटार्नी उन्होंने याची को दे दी। नोटरी पर हस्ताक्षर करने वालों के दस्तखत अधिवक्ता और नोटरी द्वारा सत्यापित किए गए हैं। बाद में याची ने इनमें से तीन प्लॉट की रजिस्ट्री कराने के लिए दस्तावेज सब रजिस्ट्रार बरेली के समक्ष प्रस्तुत किया। सब रजिस्ट्रार ने कई आपत्तियां लगाते हुए रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। इनमें से एक आपत्ति यह भी थी कि याची की पावर ऑफ अटार्नी महानिदेशक निबंधन द्वारा पंजीकृत नहीं है।
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याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन ने कहा कि पावर ऑफ अटार्नी का पंजीकृत होना कोई बाध्यता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याची के पक्ष में पावर ऑफ अटार्नी देने वालों ने उस पर किसी प्रकार का आरोप नहीं लगाया है। यह भी साबित नहीं है कि उसने किसी धोखे या छल से इसे प्राप्त किया है। ऐसे में याची को रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है।
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