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High Court: ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक से इन्कार, क्यूनेट के नाम पर लाखों की ठगी का मामला

Fri, 31 Oct 2025 03:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Oct 2025 03:55 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑनलाइन बिजनेस क्यूनेट के जरिये लोगों को यात्रा पैकेज व हेल्थ प्रोडक्ट में निवेश के नाम पर ठगी के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक से इन्कार कर दिया। 

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Refusal to stop arrest of online fraud accused, case of fraud worth lakhs in the name of Qnet
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑनलाइन बिजनेस क्यूनेट के जरिये लोगों को यात्रा पैकेज व हेल्थ प्रोडक्ट में निवेश के नाम पर ठगी के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह, न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने पारुल बुधराजा और अन्य की याचिका पर दिया है। मामला गाजियाबाद के लिंक रोड थाना क्षेत्र का है।

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शिकायतकर्ता शुभम अग्निहोत्री ने साढ़े सात लाख रुपये की ठगी मामले में याचियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि क्यूनेट नामक ऑनलाइन नेटवर्किंग बिजनेस के जरिये यात्रा पैकेज और हेल्थ प्रोडक्ट्स में निवेश के नाम पर लोगों से लाखों रुपये वसूले गए। इस आधार पर याचियों के खिलाफ 2021 में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी।
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मौजूदा मामले में आरोप है कि याचियों ने शुभम अग्निहोत्री और उनके परिजनों के जाली हस्ताक्षर व नोटरी मुहर लगाकर फर्जी ‘डिक्लेरेशन’ व ‘डिस्ट्रीब्यूटर एप्लीकेशन’ तैयार किया। इस बात की पुष्टि करते हुए नोटरी ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद अदालत के आदेश पर नई एफआईआर दर्ज हुई। वहीं, याचियों की दलील है कि यह दूसरी एफआईआर पहले वाले मामले की पुनरावृत्ति है। लिहाजा, एक ही मामले की दो एफआईआर पोषणीय नहीं है।
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हालांकि, कोर्ट ने याचियों की दलील की सिरे से खारिज कर दी। कहा कि पहला मामला धोखाधड़ी से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला दस्तावेजों की जालसाजी का है। दोनों स्वतंत्र अपराध हैं। इसलिए नई विवेचना के प्रारंभिक स्तर पर कोर्ट कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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